ध्यान दें:



Mains Marathon

  • 28 Jul 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    दिवस 37: जब निजी संबंध सार्वजनिक कर्त्तव्यों को प्रभावित करते हैं, तो हितों का टकराव किस प्रकार उत्पन्न होता है, विवेचना कीजिये। प्रशासन में ऐसे संघर्षों के प्रबंधन के लिये उपयुक्त तंत्रों एवं रूपरेखाओं का सुझाव भी दीजिये। (250 शब्द)

    उत्तर

     हल करने का दृष्टिकोण:

    • लोक प्रशासन के संदर्भ में हितों के टकराव की अवधारणा की व्याख्या कीजिये।
    • प्रासंगिक उदाहरणों के माध्यम से दर्शाइये कि निजी संबंध किस प्रकार सार्वजनिक कर्त्तव्य को प्रभावित कर सकते हैं, साथ ही ऐसे टकरावों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के तरीकों का सुझाव दीजिये।
    • उपयुक्त निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    हितों का टकराव तब उत्पन्न होता है जब किसी व्यक्ति के निजी संबंध या व्यक्तिगत हित निष्पक्ष रूप से आधिकारिक कर्त्तव्यों का पालन करने की उसकी क्षमता में बाधा डालते हैं। लोक प्रशासन में, अनियंत्रित हितों के टकराव पक्षपातपूर्ण निर्णयों, भ्रष्टाचार और संस्थाओं में जनता के विश्वास के क्षरण का कारण बन सकते हैं।

    मुख्य भाग:

    निजी संबंधों का सार्वजनिक कर्त्तव्य पर प्रभाव:

    • भर्ती और पदस्थापना में पक्षपात: भर्ती या पदस्थापना में अधिमान्य व्यवहार प्रशासन में योग्यता और निष्पक्षता को कमज़ोर करता है।
      • उदाहरण के लिये, अनुबंध आवंटन में रिश्तेदारों या परिचितों को तरजीह देना निर्णय लेने में निष्पक्षता और तटस्थता का उल्लंघन करता है।
    • क्रय निर्णय विकृति: ठेकेदारों या कॉर्पोरेट संस्थाओं के साथ व्यक्तिगत संबंध खरीद निर्णयों को विकृत कर सकते हैं।
      • आपूर्तिकर्त्ताओं के साथ पारिवारिक संबंध रखने वाले अधिकारी योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत लाभ के आधार पर निविदाएँ प्रदान कर सकते हैं।
    • परस्पर विरोधी निष्ठाओं का निर्माण: राजनीतिक व्यक्तियों या व्यावसायिक नेताओं के साथ लेन-देन के संबंध परस्पर विरोधी निष्ठाओं का निर्माण करते हैं।
      • किसी राजनीतिक व्यक्ति से विवाहित लोक सेवक को नीति प्रवर्तन या नियामक कार्रवाइयों में नैतिक दुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
    • रिवॉल्विंग डोर समस्या: सेवानिवृत्ति के बाद की नौकरियाँ या निजी हित, पद पर रहते हुए भी निर्णय लेने में पूर्वाग्रह उत्पन्न कर सकते हैं।
      • ’रिवॉल्विंग डोर’ की प्रथा, जिसमें नियामक बाद में उन्हीं निजी कंपनियों में शामिल हो जाते हैं जिनकी निगरानी उन्होंने की थी, निष्पक्षता एवं सत्यनिष्ठा को प्रभावित करती है। 
    • निष्पक्षता में बाधा डालने वाले सामाजिक संबंध: हितधारकों के साथ अनौपचारिक सामाजिक संबंध नियमों के निष्पक्ष प्रवर्तन और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में बाधा डाल सकते हैं।
      • प्रभावशाली उल्लंघनकर्त्ताओं के साथ सामाजिक निकटता के परिणामस्वरूप चयनात्मक प्रवर्तन और नियमों का कमज़ोर होना हो सकता है।

    हितों के टकराव को प्रबंधित करने के तंत्र और कार्यढाँचे:

    • संपत्ति घोषणा की आवश्यकता: सरकारी अधिकारियों और उनके निकट संबंधी या परिवार के सदस्यों द्वारा संपत्ति, देनदारियों एवं हितों की अनिवार्य घोषणा।
      • संभावित टकरावों का शीघ्र पता लगाने में सहायता करता है और सार्वजनिक सेवा में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।
    • नैतिकता दिशानिर्देशों को अपनाना: लोक सेवकों के लिये स्पष्ट और संहिताबद्ध नैतिकता दिशानिर्देशों एवं आचार संहिताओं को अपनाना।
      • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने मूल्य-आधारित शासन के लिये आचरण नियमों से अलग एक आचार संहिता को संस्थागत बनाने की अनुशंसा की।
    • स्वतंत्र आयोग की स्थापना: केंद्र और राज्य स्तर पर स्वतंत्र सतर्कता और नैतिकता आयोगों की स्थापना।
      • CVC जैसी एजेंसियों को हितों के टकराव से जुड़े नैतिक उल्लंघनों की निगरानी के लिये सशक्त बनाया जाना चाहिये।
    • निष्कासन और रोटेशन को सुदृढ़ बनाना: संवेदनशील या संघर्ष-प्रवण भूमिकाओं में निष्कासन मानदंडों और रोटेशन नीतियों को सुदृढ़ बनाना।
      • अधिकारियों को उन निर्णयों से तटस्थ रहना चाहिये जहाँ उनके या उनके परिजनों के निहित स्वार्थ हों।
    • मुखबिर संरक्षण प्रावधान: अनैतिक प्रभावों और भ्रष्ट आचरणों की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिये मुखबिर संरक्षण कानून।
      • मुखबिर संरक्षण अधिनियम, 2014 अनैतिक आचरण को उजागर करने वालों को सुरक्षा प्रदान करता है।
    • नैतिकता प्रशिक्षण का संस्थागतकरण: लोक सेवा क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों में नैतिकता प्रशिक्षण और संवेदीकरण मॉड्यूल को संस्थागत बनाना।
      • लोक सेवकों को नैतिक दुविधाओं का अभिनिर्धारण करने और नैतिक स्पष्टता एवं सत्यनिष्ठा के साथ कार्य करने का अधिकार देता है।
    • डिजिटल निगरानी कार्यान्वयन: सार्वजनिक खरीद और सेवा वितरण प्रक्रियाओं में वास्तविक काल की डिजिटल निगरानी एवं लेखापरीक्षा प्रक्रियाएँ।
      • GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) जैसे उपकरण मानवीय विवेकाधिकार और संबंध-आधारित पूर्वाग्रह की संभावना को कम करते हैं।

    निष्कर्ष:

    प्रशासन में पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिये हितों के टकराव का प्रबंधन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। कानूनी सुरक्षा उपायों, नैतिक शिक्षा और संस्थागत तंत्रों का समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि निजी संबंध सार्वजनिक कर्त्तव्य से समझौता न करें, जिससे शासन में नागरिकों का विश्वास मज़बूत होता है।

close
Share Page
images-2
images-2