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28 Jul 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
सैद्धांतिक प्रश्न
दिवस 37: “नैतिकता से रहित तकनीक, उत्तरदायित्वहीन शक्ति में परिवर्तित हो जाती है।”
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के नैतिक पक्षों का परीक्षण कीजिये और ऐसे संस्थागत सुरक्षा उपायों का सुझाव दीजिये जो DPI को संवैधानिक नैतिकता तथा मानवीय मूल्यों के अनुरूप बनाते हों। (250 शब्द)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- उद्धरण और डिजिटल प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से DPI में नैतिकता की भूमिका की व्याख्या करके शुरुआत कीजिये।
- DPI के डिज़ाइन, परिनियोजन और उपयोग से उत्पन्न नैतिक चिंताओं का परीक्षण कीजिये और संस्थागत सुरक्षा उपायों का सुझाव दीजिये।
- उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
यह कथन चेतावनी देता है कि यदि तकनीकी प्रगति नैतिकता द्वारा निर्देशित नहीं है, तो यह शक्ति के गैर-ज़िम्मेदाराना उपयोग को जन्म दे सकती है। आधार, UPI और डिजिलॉकर जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं (DPI) के संदर्भ में, चुनौती संवैधानिक नैतिकता, जवाबदेही एवं मानवीय मूल्यों को डिजिटल शासन में समाहित करने की है।
मुख्य भाग:
- DPI में नैतिक चिंताएँ: आधार प्रणाली और डिजिटल इंडिया पहल जैसे DPI ने सार्वजनिक सेवाओं में क्रांति ला दी है, लेकिन निजता, डेटा सुरक्षा एवं निगरानी को लेकर चिंताएँ भी उत्पन्न की हैं।
- उदाहरण के लिये, आधार का कई सेवाओं से जुड़ाव निजी संस्थाओं द्वारा बड़े पैमाने पर निगरानी और व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग की आशंकाओं को जन्म देता है।
- सुरक्षा में सेंध, जैसे कथित आधार डेटा लीक, DPI की कमज़ोरियों को उजागर करता है, जिसके व्यापक सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।
- निजता पर प्रभाव: जब व्यक्तिगत जानकारी पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना एकत्र की जाती है, तो नैतिक चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
- जैसा कि आधार मामले में देखा गया है, डेटा संग्रह में सूचित सहमति का अभाव निजता के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।
- सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2017 के निर्णय, जिसने निजता के अधिकार को मूल अधिकार माना, ने नागरिकों के डेटा की सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
- नैतिक तकनीक व्यक्तिगत डेटा के प्रबंधन में पारदर्शिता और उपयोगकर्त्ता स्वायत्तता को अनिवार्य बनाती है।
- जैसा कि आधार मामले में देखा गया है, डेटा संग्रह में सूचित सहमति का अभाव निजता के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।
- अपवर्जन और पहुँच: जहाँ एक ओर DPI का उद्देश्य दक्षता में सुधार करना है, वहीं दूसरी ओर अगर वे सीमांत समूहों के लिये सुलभ नहीं हैं, तो उनके बहिष्कृत होने का भी जोखिम है।
- उदाहरण के लिये, ग्रामीण आबादी, वरिष्ठ जन और डिजिटल साक्षरता से वंचित लोग डिजिटल सरकारी योजनाओं में पिछड़ सकते हैं।
- समावेशिता एक मुख्य मूल्य होना चाहिये, यह सुनिश्चित करते हुए कि DPI डिजिटल विभाजन को कायम न रखें, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुँच को बढ़ावा दें।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: DPI में जनता का विश्वास उनके डिज़ाइन, कार्यान्वयन और निगरानी में पारदर्शिता पर आधारित है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा जैसी तकनीकों का उपयोग अस्पष्ट एवं जाँच-पड़ताल में कठिन हो सकता है, जिससे निर्णय लेने में पूर्वाग्रह की संभावना बढ़ जाती है।
- इसलिये, एल्गोरिदम और डेटा-आधारित निर्णय ऑडिट योग्य और जवाबदेह होने चाहिये।
- आधार मामले ने इस बात पर प्रकाश डाला कि डेटा का ज़िम्मेदारी से उपयोग सुनिश्चित करने के लिये जवाबदेही तंत्र को बुनियादी कार्यढाँचे में शामिल किया जाना चाहिये।
- DPI में नैतिक शासन: DPI को संवैधानिक नैतिकता के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिये, जो मानवीय गरिमा, न्याय एवं गैर-भेदभाव पर ज़ोर देते हैं।
- DPI को मानवीय मूल्यों के अनुरूप होना चाहिये, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे न्याय और समान अधिकारों को बढ़ावा दें।
- उदाहरण के लिये, ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म को सभी के लिये, विशेष रूप से डिजिटल रूप से वंचित लोगों के लिये, सुलभ सेवाएँ प्रदान करके सामाजिक समानता के सिद्धांतों का पालन करना चाहिये।
- संस्थागत सुरक्षा उपाय:
- डेटा सुरक्षा कानून: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 जैसे मज़बूत डेटा सुरक्षा कार्यढाँचों को नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिये, जिससे डेटा संग्रह पारदर्शी, जवाबदेह एवं सहमतिपूर्ण हो।
- स्वतंत्र निगरानी: भारतीय डेटा संरक्षण प्राधिकरण (DPAI) जैसी स्वतंत्र संस्थाओं को नैतिक मानकों और संवैधानिक अधिकारों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये DPI संचालन की कुशलतापूर्वक निगरानी करनी चाहिये।
- नैतिकता समितियाँ और लेखा परीक्षाएँ: प्रत्येक DPI परियोजना का नियमित नैतिक लेखा परीक्षा और प्रभाव आकलन किया जाना चाहिये, जिसमें यह मूल्यांकन किया जाना चाहिये कि यह मानवाधिकारों, समानता एवं सार्वजनिक विश्वास का कितना पालन करती है।
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम: नागरिकों को DPI का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम बनाने के लिये राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता पहलों को लागू किया जाना चाहिये, जिससे अपवर्जन का जोखिम कम हो।
- मुखबिर संरक्षण: मुखबिर संरक्षण के लिये मज़बूत प्रणालियाँ स्थापित की जानी चाहिये ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि DPI के उपयोग या तैनाती में अनैतिक प्रथाओं की बिना किसी प्रतिशोध के डर के रिपोर्ट की जा सके।
निष्कर्ष:
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का नैतिक उपयोग सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक है। इसके लिये डेटा संरक्षण कानून, स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था एवं डिजिटल साक्षरता जैसी संस्थागत व्यवस्थाएँ अत्यंत आवश्यक हैं ताकि DPI का उपयोग संविधानिक नैतिकता एवं मानवीय मूल्यों के अनुरूप हो सके तथा यह निजता या निष्पक्षता से समझौता किये बिना जनहित में काम कर सके।