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06 Aug 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
सैद्धांतिक प्रश्न
दिवस 45: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की कल्पना सहभागी लोकतंत्र के एक साधन के रूप में की गई थी। पिछले दशक में इसके प्रभाव को निर्धारित करने वाले राजनीतिक, प्रशासनिक और तकनीकी कारणों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये। (150 शब्द)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- RTI अधिनियम में निहित लोकतांत्रिक और नैतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए उत्तर की शुरुआत कीजिये।
- मुख्य भाग में, आलोचनात्मक रूप से परीक्षण कीजिये कि किस प्रकार राजनीतिक, नौकरशाही और तकनीकी कारकों ने इसके प्रभाव को बढ़ाया या कमज़ोर किया है।
- उपयुक्त निष्कर्ष लिखिये।
परिचय:
वर्ष 2005 में पारित सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कार्य-पद्धति में पारदर्शिता सुनिश्चित करके सहभागी लोकतंत्र का सुदृढ़ीकरण करना था। हालाँकि, विगत एक दशक में राजनीतिक, नौकरशाही तंत्र और तकनीकी कारकों ने इसकी प्रभावशीलता को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्य भाग:
- राजनीतिक कारक: RTI अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को सशक्तीकरण करना था, लेकिन राजनीतिक प्रतिरोध के कारण अनेक मामलों में इसकी क्षमता पूर्ण रूप से सीमित रही है। यदि पारदर्शिता राजनेताओं के हितों के लिये खतरा बनती है, तो वे इसमें बाधा डाल सकते हैं, जिससे विधि का प्रभावी से रूप कार्यान्वन किये जाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रभावित होती है।
- उदाहरण: लोकपाल विधेयक के लिये राजनीतिक समर्थन के अभाव के कारण एक ऐसे व्यापक जवाबदेही तंत्र के निर्माण में बाधाएँ उत्पन्न हुई हैं, जो सूचना का अधिकार अधिनियम का पूरक हो।
- नौकरशाही तंत्र संबंधी कारक: RTI अधिनियम के प्रति नौकरशाही तंत्र का प्रतिरोध इसकी सीमित सफलता का प्रमुख कारक है। अनेक सरकारी अधिकारी RTI को अपने कार्य में हस्तक्षेप मानते हैं, जिसके कारण प्रत्युत्तर देने में विलंब होता है और कई बार छूट का दुरुपयोग भी होता है।
- उदाहरण: सूचना प्रदान करने में विलंब और RTI अधिनियम की धारा 8 के तहत छूट का बारंबार उपयोग, विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश संबंधों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में, विवाद के विषय रहे हैं।
- तकनीकी कारक: प्रौद्योगिकी में प्रगति से सूचना का अभिगम सरल हो गया है, लेकिन डिजिटलीकरण और डेटा सुरक्षा में चुनौतियाँ बनी हुई हैं। हालाँकि कुछ राज्यों ने ऑनलाइन RTI दाखिल करने की प्रणालियों में सुधार किया है फिर भी विशेष रूप से उपांतिकीकृत समुदायों के लिये डिजिटल साक्षरता एक बाधा बनी हुई है।
- उदाहरण: दिल्ली और महाराष्ट्र ने ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा प्रदान की है, जिससे RTI आवेदनों को सुव्यवस्थित किया गया है, लेकिन अनेक दूरवर्ती इलाकों में अभी भी अनुपयुक्त इंटरनेट बुनियादी ढाँचे के कारण डिजिटल रूप से जानकारी प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- व्यवहार में प्रभावशीलता: चुनौतियों के बावजूद, RTI अधिनियम का पारदर्शिता को बढ़ावा देने में सकारात्मक प्रभाव रहा है। इससे नागरिकों को लोक सेवाओं, विकास परियोजनाओं और सरकारी व्यय जैसे क्षेत्रों में जवाबदेही और सुधार की मांग करने का अधिकार प्राप्त हुआ है।
- उदाहरण: कार्यकर्त्ताओं और नागरिकों ने भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिये RTI अधिनियम का उपयोग किया है, जिसके परिणामस्वरूप 2G स्पेक्ट्रम घोटाले और CBI भ्रष्टाचार मामलों जैसी महत्त्वपूर्ण जाँच की गई।
निष्कर्ष:
RTI अधिनियम ने पारदर्शिता और सहभागी लोकतंत्र को बढ़ावा देने में प्रगति की है, लेकिन राजनीतिक, नौकरशाही तंत्र संबंधी और तकनीकी चुनौतियों ने इसकी प्रभावशीलता को सीमित कर दिया है। उत्तरदायित्वपूर्ण शासन सुनिश्चित करने में अधिनियम की पूर्ण क्षमता को उपयोग में लाने के लिये इन बाधाओं का समाधान करना महत्त्वपूर्ण है।