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Mains Marathon

  • 06 Aug 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    दिवस 45: “निष्पक्षता यह सुनिश्चित करती है कि सत्ता एक 'विश्वास' बनी रहे, कोई 'विशेष अधिकार' नहीं।” भारत की शासन-व्यवस्था के संदर्भ में इस कथन की विवेचना कीजिये। (150 शब्द)

    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • सत्यनिष्ठा को परिभाषित करते हुए और यह स्पष्ट करते हुए कि यह नीतिपरक शासन और जनता के विश्वास से किस प्रकार संबंधित है, उत्तर की शुरुआत कीजिये।
    • मुख्य भाग में, प्रासंगिक तर्कों और उदाहरणों का उपयोग करते हुए, यह परीक्षण कीजिये सत्यनिष्ठा किस प्रकार भारत में लोक शक्ति का कोई हकदारी नहीं, बल्कि एक उत्तरदायित्व बने रहना सुनिश्चित करती है।
    • उपयुक्त निष्कर्ष लिखिये।

    परिचय:

    "सत्यनिष्ठा यह सुनिश्चित करती है कि सत्ता एक विशेषाधिकार न होकर एक विश्वास बनी रहे" यह कथन शासन में सत्यनिष्ठा और उत्तरदायित्व की आवश्यकता को रेखांकित करता है। भारत में, यह अवधारणा सत्ता का उपयोग व्यक्तिगत या पक्षपातपूर्ण लाभ के बजाय जन कल्याण के लिये सुनिश्चित करने की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

    मुख्य भाग

    • शासन व्यवस्था में सत्यनिष्ठा: सत्यनिष्ठा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, निष्पक्षता और नीतिपरक आचरण की गुणता को दर्शाती है। यह सत्तारूढ़ व्यक्तियों के निर्णयन में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करता है।
      • सत्यनिष्ठा यह सुनिश्चित करती है कि सत्ता का प्रयोग लोक हितों के अनुरूप हो, न कि व्यक्तिगत या निजी लाभ के लिये।
    • लोक न्यास के रूप में सत्ता: भारत में, लोकतांत्रिक शासन सत्ता को एक विशेषाधिकार के बजाय एक लोक न्यास के रूप में स्थापित करता है। निर्वाचित अधिकारी और लोक सेवक नागरिकों के प्रति उत्तरदायी होते हैं और सामूहिक हित में कार्य करना उनके लिये अनिवार्य है।
      • सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम नागरिकों को सरकारी सूचना का अभिगम सुनिश्चित करते हुए इस उत्तरदायित्व को बढ़ाता करता है।
    • कार्य में सत्यनिष्ठा: जब सत्यनिष्ठा कायम रहती है, तो शासन पारदर्शी और समावेशी होता है। भारत में 2G स्पेक्ट्रम घोटाले से यह उजागर हुआ किस प्रकार सत्यनिष्ठा के अभाव में भ्रष्टाचार और सत्ता का दुरुपयोग हुआ, जिससे गंभीर रूप से जनता का विश्वास प्रभावित हुआ।
      • प्रस्तावित न्यायिक मानक और जवाबदेही विधेयक न्यायिक नियुक्तियों और प्रक्रियाओं में नैतिक आचरण सुनिश्चित करके न्यायपालिका में सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देने का एक उदाहरण है।
    • सत्यनिष्ठा के लिये संस्थागत तंत्र: भारत ने सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देने के लिये विभिन्न जवाबदेहिता तंत्रों का क्रियान्वन किया है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), लोकपाल और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी एजेंसियाँ लोक सेवकों की सत्यनिष्ठा की निगरानी करती हैं।
      • ये संस्थाएँ यह सुनिश्चित करने में मदद करती हैं कि सत्ता एक विश्वास बनी रहे, न कि स्वार्थ का साधन।
    • नीतिपरक नेतृत्व: सत्यनिष्ठा, सुशासन के लिये आवश्यक नीतिपरक नेतृत्व को बढ़ावा देती है। उदाहरण के लिये, MGNREGA योजना के अंतर्गत ग्रामीण नागरिकों को आजीविका प्रदान करने के लिये सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग शामिल है और जन कल्याण के लिये सत्ता के नैतिक उपयोग पर आधारित है।

    निष्कर्ष:

    सत्यनिष्ठा यह सुनिश्चित करती है कि सत्ता एक लोक न्यास बनी रहे, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सुदृढ़ीकरण करती है, नैतिक नेतृत्व सुनिश्चित करती है और सरकारी कार्यों और नीतियों में जनता का विश्वास बढ़ाती है।

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