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31 Jul 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
केस स्टडीज़
दिवस 40: अभय कुमार एक IPS अधिकारी हैं जिन्हें हाल ही में तीन राज्यों की सीमा पर स्थित एक ज़िले में पुलिस अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है। यह क्षेत्र पहले नक्सली उग्रवाद और युवाओं में बढ़ती कट्टरता के लिये जाना जाता रहा है। हाल के वर्षों में निरंतर विकासात्मक प्रयासों और समुदाय-आधारित अभियानों के कारण हिंसक घटनाओं में कमी आयी है।
हालाँकि, अब खुफिया रिपोर्टें संकेत दे रही हैं कि नक्सली समूहों और कट्टरपंथी संगठनों द्वारा भूमिगत भर्ती की गतिविधियाँ फिर से शुरू हो रही हैं। इसके लिये वे डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों की सहायता ले रहे हैं।
हाल ही में एक 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र की गिरफ़्तारी से प्रशासन हैरान है। उसके पास कट्टरपंथ प्रेरित साहित्य मिला है, वह एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन समूहों से जुड़ा था और उस पर एक सरकारी बुनियादी अवसंरचना परियोजना को नुकसान पहुँचाने की योजना का आरोप है। पूछताछ में पता चला कि वह बेरोज़गारी और व्यवस्थागत असमानताओं से निराश था तथा ऐसे विचारधारा से प्रेरित कंटेंट के प्रभाव में आ गया था।
अभय की टीम पर सख्त रुख अपनाने का दबाव है, जिसमें अधिक युवाओं की गिरफ़्तारी और आक्रामक निगरानी के ज़रिये दूसरों को डराने का सुझाव दिया जा रहा है। लेकिन अभय को आशंका है कि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है, युवा और अधिक कट्टरपंथी विचारधाराओं की ओर बढ़ सकते हैं तथा सामाजिक अलगाव बढ़ सकता है। नागरिक समाज समूह भी पुलिस के दमन और प्रोफाइलिंग के खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं।
A. वर्तमान स्थिति में अभय के समक्ष कौन-सी नैतिक दुविधाएँ हैं?
B. उसके समक्ष कौन-से विकल्प उपलब्ध हैं और प्रत्येक के क्या परिणाम होंगे?
C. आप किस प्रकार की कार्रवाईयों का सुझाव देंगे? अपने उत्तर को नैतिक तर्कों द्वारा स्पष्ट कीजिये।
D. सुभेद्य क्षेत्रों में युवाओं के कट्टरपंथ के मूल कारणों को दूर करने के लिये दीर्घकालिक रणनीतियों का सुझाव दीजिये।उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- सुरक्षा बनाम नागरिक स्वतंत्रता तथा सख्त कार्रवाई बनाम सामाजिक बहिष्करण जैसे परस्पर विरोधी मूल्यों पर गहन विचार प्रस्तुत कीजिये।
- नैतिक सिद्धांतों, लोक कल्याण और विधिक कार्यढाँचे के संदर्भ में प्रत्येक विकल्प के संभावित परिणामों का मूल्यांकन कीजिये।
- ऐसा समाधान प्रस्तुत कीजिये जो नैतिक दर्शन पर आधारित हो, जिसमें सहानुभूति, न्याय तथा मानवीय गरिमा के प्रति सम्मान को प्राथमिकता दी जाये, साथ ही जो दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा दे।
परिचय:
IPS अधिकारी, अभय कुमार को एक ऐसे ज़िले में एक संवेदनशील मुद्दे को संभालने का काम सौंपा गया है जो नक्सली विद्रोह और बढ़ते युवा कट्टरपंथ के लिये जाना जाता है। कट्टरपंथ की खुफिया रिपोर्टों का सामना करते हुए, अभय को कानून प्रवर्तन, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और अंतर्निहित मुद्दों के समाधान के बीच संतुलन बनाना होगा।
हितधारक:
हितधारक
भूमिका/हित
अभय कुमार
IPS अधिकारी, नैतिक कानून-प्रवर्तन सुनिश्चित करते हुए विधि और व्यवस्था बनाए रखने के लिये ज़िम्मेदार।
नक्सली और कट्टरपंथी समूह
अपनी विचारधाराओं को आगे बढ़ाने के लिये भर्ती और प्रचार में संलग्न।
19 वर्षीय छात्र
भ्रम और बेरोज़गारी से प्रेरित होकर तोड़फोड़ की योजना बनाने का आरोप।
नागरिक समाज समूह
नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा और अत्यधिक कानून-प्रवर्तन के प्रति सावधानी बरतने की अनुशंसा करते हैं।
स्थानीय युवा
कट्टरपंथ के प्रति संवेदनशील, जो प्रणालीगत असमानता और बेरोज़गारी का सामना कर रहे हैं।
समुदाय
चरमपंथी विचारधाराओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित।
पुलिस बल
लेकिन उसे दक्षता और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाने वाले समूह, जो सख्त कार्रवाई करने के दबाव में हैं।
मुख्य भाग:
A. अभय के समक्ष नैतिक दुविधाएँ:
- सुरक्षा बनाम नागरिक स्वतंत्रता: कट्टरपंथ (आक्रामक निगरानी, गिरफ्तारी) से निपटने के लिये एक कठोर दृष्टिकोण अपनाने और उन युवाओं के नागरिक अधिकारों का सम्मान करने के बीच की दुविधा, जिन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया जा सकता है या जिनकी प्रोफाइल बनाई जा सकती है।
- रोकथाम बनाम अलगाव: कठोर रणनीति का इस्तेमाल घटनाओं को रोक सकता है, लेकिन युवाओं को अलग-थलग कर सकता है, जिससे कट्टरपंथ के मूल कारण और भी गंभीर हो सकते हैं।
- सामुदायिक सहभागिता बनाम पुलिस प्राधिकरण: समुदाय का विश्वास बनाए रखते हुए प्रभावी कानून प्रवर्तन सुनिश्चित करना तथा अत्यधिक राज्य नियंत्रण या प्रोफाइलिंग से बचना, जो प्रतिकूल परिणाम दे सकता है।
B. अभय के लिये उपलब्ध विकल्प और परिणाम:
- विकल्प 1: आक्रामक निगरानी और गिरफ़्तारियाँ
- परिणाम: यह दृष्टिकोण तात्कालिक खतरों को कम कर सकता है, लेकिन युवाओं के अलगाव और कट्टरपंथ को और बढ़ा सकता है, विशेषकर अगर कई व्यक्तियों को गलत तरीके से निशाना बनाया जाता है।
- इससे समुदाय एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच विश्वास की कमी और बढ़ सकती है, जिससे दीर्घकालिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है।
- परिणाम: यह दृष्टिकोण तात्कालिक खतरों को कम कर सकता है, लेकिन युवाओं के अलगाव और कट्टरपंथ को और बढ़ा सकता है, विशेषकर अगर कई व्यक्तियों को गलत तरीके से निशाना बनाया जाता है।
- विकल्प 2: संवाद और पुनर्वास कार्यक्रमों में शामिल हों
- परिणाम: हालाँकि यह दृष्टिकोण विश्वास को बढ़ावा दे सकता है और कट्टरपंथ को कम कर सकता है, लेकिन राजनीतिक एवं वरिष्ठ अधिकारी इसे कमज़ोर या अप्रभावी मान सकते हैं।
- इसके लिये आउटरीच और पुनर्वास के लिये महत्त्वपूर्ण संसाधनों की आवश्यकता होगी, लेकिन यह समुदाय निर्माण के माध्यम से कट्टरपंथ को रोकने का एक दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है।
- परिणाम: हालाँकि यह दृष्टिकोण विश्वास को बढ़ावा दे सकता है और कट्टरपंथ को कम कर सकता है, लेकिन राजनीतिक एवं वरिष्ठ अधिकारी इसे कमज़ोर या अप्रभावी मान सकते हैं।
- विकल्प 3: संतुलित दृष्टिकोण (सामुदायिक सहभागिता के साथ निगरानी)
- परिणाम: एक संतुलित दृष्टिकोण जो खुफिया जानकारी जुटाने पर केंद्रित है, साथ ही सामुदायिक आउटरीच में सुधार करता है और शिक्षा एवं रोज़गार के अवसर प्रदान करता है।
- इससे युवाओं को अलग-थलग किये बिना कट्टरपंथ को रोका जा सकता है, लेकिन इसे लागू करने में समय लगेगा और पुलिस विभाग में राजनीतिक ताकतों एवं कट्टरपंथी गुटों, दोनों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
- परिणाम: एक संतुलित दृष्टिकोण जो खुफिया जानकारी जुटाने पर केंद्रित है, साथ ही सामुदायिक आउटरीच में सुधार करता है और शिक्षा एवं रोज़गार के अवसर प्रदान करता है।
C. सुझाई गई कार्यवाही:
- विकल्प 3 की अनुशंसा की जानी चाहिये: जिसमें एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना शामिल है। अभय को खुफिया जानकारी पर आधारित कार्रवाइयों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये, सामूहिक गिरफ्तारियों का सहारा लिये बिना वास्तविक खतरों को लक्षित करना चाहिये।
- साथ ही, उन्हें सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों की अनुशंसा करनी चाहिये, युवाओं को परामर्श, शिक्षा और रोज़गार के अवसर प्रदान करने चाहिये।
- यह दृष्टिकोण न्याय, निष्पक्षता और मानवीय गरिमा के नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप है। कट्टरपंथ के मूल कारणों का निवारण करके और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करके, अभय नागरिक स्वतंत्रता का त्याग किये बिना दीर्घकालिक शांति और स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं।
- यह पुलिस में विश्वास भी बढ़ाएगा और उग्रवाद का मुकाबला करने के लिये समुदाय के सहयोगात्मक प्रयासों को बढ़ावा देगा।
D. कट्टरपंथ से निपटने के लिये दीर्घकालिक रणनीतियाँ:
- शिक्षा और रोज़गार: युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं के विकल्प प्रदान करने के लिये कौशल विकास कार्यक्रम और रोज़गार सृजन की शुरुआत करनी चाहिये।
- सामुदायिक पहुँच: चरमपंथी दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिये संवाद, युवा सहभागिता कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से मज़बूत सामुदायिक संबंध बनाना चाहिये।
- कट्टरपंथ-विरोधी कार्यक्रम: चरमपंथी विचारधाराओं के शिकार हुए व्यक्तियों के लिये परामर्श और पुनर्वास कार्यक्रम स्थापित किये जाने चाहिये, जिससे उन्हें समाज में पुनः एकीकृत होने में सहायता मिले।
- पुलिसिंग में पारदर्शिता: प्रोफाइलिंग को रोकने तथा नागरिक स्वतंत्रता का सम्मान सुनिश्चित करने के लिये पुलिस कार्रवाई में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिये, जिससे कानून प्रवर्तन और जनता के बीच संबंध मज़बूत हों।
निष्कर्ष:
जॉन स्टुअर्ट मिल के सिद्धांत के अनुसार “किसी सभ्य समाज के सदस्य पर उसकी इच्छा के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग केवल तब न्यायसंगत है जब दूसरों को क्षति पहुँचने से रोका जाना हो” का पालन करते हुए अभय को दायित्वपूर्ण व्यवहार करना चाहिये, जिससे उसकी कार्यप्रणाली संतुलित, न्यायसंगत और व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान करने वाली हो, साथ ही सुरक्षा की आवश्यकता की भी पूर्ति करती हो।