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01 Aug 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
केस स्टडीज़
दिवस 41-
आप एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक देश में नियुक्त वरिष्ठ भारतीय राजनयिक हैं। हाल ही में, भारत मेज़बान देश के साथ एक महत्त्वपूर्ण रक्षा सहयोग समझौते पर वार्ता कर रहा है, जिससे भारत के क्षेत्रीय प्रभाव और महत्त्वपूर्ण तकनीक तक पहुँच में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यह वार्ता अब अंतिम चरण में है।
इसी दौरान, एक विदेशी मीडिया संस्थान ने एक गोपनीय आंतरिक रिपोर्ट लीक की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उस मेज़बान देश की कुछ रक्षा कंपनियों ने अतीत में अन्य देशों से जुड़े सौदों में अज्ञात अधिकारियों को रिश्वत दी थी। हालाँकि ये आरोप असत्यापित हैं और वर्तमान समझौते से सीधे संबंधित नहीं हैं, परंतु आपके दूतावास के एक कर्मचारी ने आपको गुप्त रूप से सूचित किया है कि वर्तमान समझौते में शामिल कंपनियों में से एक इसी तरह की पृष्ठभूमि को लेकर भारत में अनौपचारिक जाँच चल रही है।
आपकी सरकार क्षेत्र में एक प्रतिद्वंद्वी शक्ति के बढ़ते प्रभाव के प्रतिकार के रूप में इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिये उत्सुक है। हालाँकि, भारत में नागरिक समाज समूह हथियारों की खरीद में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चिंताएँ जता रहे हैं।
साथ ही, एक रक्षा विश्लेषक आपसे निजी तौर पर संपर्क करता है और संकेत देता है कि अगर आप फर्म की विश्वसनीयता पर और सवाल उठाए बिना सौदे की ‘सुचारू प्रगति सुनिश्चित’ करते हैं, तो सेवानिवृत्ति के बाद आपको परामर्श के अवसर मिल सकते हैं।
अब आपको विदेश मंत्रालय को अपनी अंतिम रिपोर्ट भेजनी है, जो दिल्ली में निर्णय प्रक्रिया को बहुत प्रभावित कर सकती है।
- राष्ट्रीय रणनीतिक हितों और सत्यनिष्ठा व पारदर्शिता के बीच संतुलन स्थापित करने में आपको किन नैतिक दुविधाओं का सामना करना पड़ता है?
- वे आरोप जो कानूनी रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं, किंतु इस सौदे की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं, आपको उन आरोपों से कैसे निपटना चाहिये?
- व्यक्तिगत लाभ का संकेत (जैसे: सेवानिवृत्ति के बाद परामर्श कार्य) अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में नैतिक निर्णय-निर्माण को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है? कौन-से सुरक्षा उपाय ऐसे समझौतों को रोक सकते हैं? ( 250 शब्द)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- संदर्भ स्थापित करने के लिये स्थिति का संक्षिप्त परिचय दीजिये।
- इसमें शामिल नैतिक दुविधाओं का अभिनिर्धारण कीजिये।
- आपको उन आरोपों से कैसे निपटना चाहिये, वर्णन कीजिये।
- अंतर्राष्ट्रीय वार्ताओं में नैतिक निर्णय लेने पर व्यक्तिगत प्रलोभनों के प्रभाव पर चर्चा कीजिये।
- नैतिक समझौते को रोकने के लिये सुरक्षा उपायों का सुझाव दीजिये।
- किसी नैतिक विचारक या नैतिक सिद्धांत के उद्धरण के साथ उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक के रूप में, मुझे विदेशों में भारत के सामरिक हितों की रक्षा का दायित्व सौंपा गया है। वर्तमान स्थिति में, एक सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण देश के साथ एक अहम रक्षा समझौते को अंतिम रूप दिये जाने की प्रक्रिया चल रही है। हालाँकि, इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोपों, पारदर्शिता को लेकर नागरिक समाज की चिंताओं और व्यक्तिगत लाभों से जुड़ी बातों के कारण नैतिक दुविधाएँ उत्पन्न हो रही हैं। इस स्थिति में राष्ट्रीय हितों की पूर्ति और व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा, सार्वजनिक उत्तरदायित्व तथा पेशेवर नैतिकता के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती है।
मुख्य भाग:
A. सामरिक हितों और सत्यनिष्ठा के बीच संतुलन बनाने में नैतिक दुविधाएँ
- ईमानदारी बनाम सुविधा: सरकार एक प्रतिद्वंद्वी शक्ति के प्रभाव का मुकाबला करने के लिये समझौते के शीघ्र समापन की अपेक्षा करती है। हालाँकि, भ्रष्टाचार की चिंताओं के बावजूद आगे बढ़ना उक्त वार्ता के नैतिक आधारों से समझौता कर सकता है तथा संस्थागत विश्वसनीयता को कमज़ोर कर सकता है।
- पारदर्शिता बनाम कूटनीतिक गोपनीयता: नागरिक समाज रक्षा खरीद में पारदर्शिता की माँग कर रहा है। लीक हुई रिपोर्ट और अंदरूनी सूत्रों की सूचना के साथ, दुविधा यह है कि गोपनीयता भंग किये बिना या असत्यापित दावों पर भरोसा किये बिना मंत्रालय को कितनी जानकारी दी जाए।
- राष्ट्रीय हित बनाम कानून का शासन: यदि भारत किसी ऐसे फर्मों के साथ समझौता करता है जिस पर संदेह है, तो इससे अल्पकालिक रणनीतिक लक्ष्य तो पूरे हो सकते हैं, परंतु सुशासन और नैतिक खरीद प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता कमज़ोर हो जायेगी।
- व्यावसायिक कर्त्तव्य बनाम व्यक्तिगत लाभ: सेवानिवृत्ति के बाद सलाहकार पद का निजी प्रस्ताव हितों के टकराव का गंभीर मामला है। ऐसे किसी प्रस्ताव को स्वीकार करना या उस पर विचार करना भी नैतिक दृष्टि से अनुचित है और सिविल सेवा आचरण के मानकों का उल्लंघन है।
B. असत्यापित आरोपों से निपटना
- हालाँकि आरोप असत्यापित हैं और वर्तमान सौदे/समझौते से सीधे जुड़े नहीं हैं, फिर भी उचित जाँच-पड़ताल आवश्यक है।
- मुझे अपने अंतिम मूल्यांकन में इन चिंताओं को विदेश मंत्रालय (MEA) को पूरी पारदर्शिता के साथ, तथ्यों और संदेह के बीच स्पष्ट अंतर करते हुए, रिपोर्ट करना होगा।
- मुझे पूरी प्रक्रिया को मनमाने ढंग से बाधित किये बिना, भारत में संबंधित एजेंसियों (जैसे: CBI या रक्षा मंत्रालय का खरीद प्रकोष्ठ) द्वारा आगे के सत्यापन की सिफारिश करनी होगी।
- ऐसी संतुलित नीति से न केवल संस्थागत प्रक्रियाओं का सम्मान होता है, बल्कि जल्दबाज़ी में लिये गये निर्णयों से भी बचाव होता है, जिससे नैतिक मूल्यों और रणनीतिक गति दोनों को बनाए रखा जा सकता है।
C. नैतिक निर्णय लेने पर व्यक्तिगत प्रलोभनों का प्रभाव
- सेवानिवृत्ति के बाद लाभ का निजी रूप से दिया गया सुझाव लेन-देन (Quid pro Quo) का एक स्पष्ट उदाहरण है, जो पेशेवर निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।
- ऐसे प्रलोभनों को स्वीकार करना या नज़रअंदाज़ करना निर्णय लेने की निष्पक्षता को कमज़ोर करता है और आचरण नियमों तथा भ्रष्टाचार-विरोधी कानूनों का उल्लंघन करता है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में एक खतरनाक उदाहरण स्थापित करता है तथा भारत की विश्वसनीयता को क्षति पहुँचाता है।
- मुझे इस प्रस्ताव को दृढ़तापूर्वक अस्वीकार कर देना चाहिये और यदि आवश्यक हो, तो भविष्य में इस प्रकार की अनैतिक पैरवी को रोकने हेतु उचित आंतरिक प्रक्रियाओं के माध्यम से इसकी रिपोर्ट भी करनी चाहिये।
D. नैतिक समझौता रोकने के लिये सुरक्षा उपाय
- पूर्व-समझौता सतर्कता (Pre-contractual Due Diligence): संवेदनशील सौदों में शामिल सभी विदेशी फर्मों की अनिवार्य नैतिक पृष्ठभूमि जाँच स्थापित की जानी चाहिये।
- शांत अवधि विनियम (Cooling-off Period Regulations): वरिष्ठ राजनयिकों को सेवानिवृत्ति के बाद हाल ही में हुई वार्ताओं में शामिल फर्मों में शामिल होने से रोकने वाले नियमों को सुदृढ़ किया जाना चाहिये।
- हितों के टकराव की अनिवार्य घोषणा (Mandatory Conflict of Interest Disclosures): राजनयिकों को ऐसी किसी भी वार्ता या प्रस्ताव की घोषणा करनी चाहिये जिससे पक्षपात की धारणा उत्पन्न हो सकती है।
- राजनयिकों के लिये नैतिकता प्रशिक्षण (Ethics Training for Diplomats): अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में लोक सेवा मूल्यों, सत्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार के जोखिमों पर नियमित कार्यशालाएँ आयोजित की जानी चाहिये ताकि अधिकारियों को इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।
- मुखबिर संरक्षण और माध्यम (Whistleblower Protection and Channels): दूतावास के कर्मचारियों के लिये आंतरिक स्तर पर अनैतिक गतिविधियों की रिपोर्ट करने हेतु सुरक्षित और भरोसेमंद चैनल उपलब्ध होने चाहिये।
निष्कर्ष:
रणनीतिक हितों और नैतिकता, सार्वजनिक जवाबदेही तथा विधि के शासन के बीच संतुलन बनाये रखना एक नैतिक कूटनीति के लिये अनिवार्य है। प्रक्रियात्मक निष्पक्षता सुनिश्चित करना, निजी लाभ को अस्वीकार करना और पारदर्शी संस्थाओं को बढ़ावा देना, ये सभी राष्ट्र की साख एवं नैतिक वैधता को बनाये रखते हैं।
जैसा कि माइकल वॉल्ज़र ने कहा है, "राज्य हित के नाम पर जो कुछ किया जा सकता है, उसकी भी नैतिक सीमाएँ होती हैं।"
यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसे अंतर्राष्ट्रीय वार्ताओं में प्रत्येक विकल्प में शामिल किया जाना चाहिये।