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क्रिप्टोकरेंसी

  • 09 Mar 2020
  • 17 min read

संदर्भ

उच्चतम न्यायालय ने 4 मार्च, 2020 को क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) में निवेश और व्यापार पर भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया है। उच्चतम न्यायालय ने RBI के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने के RBI के निर्णय को बेहद सख्त बताया। उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश के बाद भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग की उम्मीदे की जा सकती है।

मुख्य बिंदु:

  • सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला RBI द्वारा क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग को प्रतिबंधित करने हेतु 6 अप्रैल, 2018 को जारी परिपत्र (Circular) के विरुद्ध भारतीय इंटरनेट और मोबाइल संघ (Internet and Mobile Association of India-IAMAI) की याचिका की सुनाई के बाद आया है।
  • ध्यातव्य है कि अप्रैल 2018 के आदेश में RBI ने अपने द्वारा विनियमित सभी बैंकों और अन्य वित्तीय इकाइयों को तीन माह के अंदर क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार से स्वयं को अलग करने के निर्देश दिये थे।
  • सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए RBI के प्रतिनिधियों ने न्यायालय को सूचित किया कि RBI क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा (Currency) नहीं मानता है।

सर्वोच्च न्यायालय का आदेश:

  • सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, वर्चुअल करेंसी के व्यापार पर RBI का प्रतिबंध तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि-
    1. RBI वर्चुअल करेंसी के व्यापार के तरीके में किसी खतरे या गलती को रेखांकित नहीं कर सका है।
    2. भारत में वर्चुअल करेंसी या क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी पक्ष के मतभेद को भी रेखांकित किया।
  • ध्यातव्य है कि क्रिप्टोकरेंसी के विनियम संबंधी कानून के निर्धारण के लिये बनी अंतर-मंत्रालयी समिति (Inter Ministerial Committees) ने वर्ष 2018 की अपनी रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार की मंज़ूरी दी थी। परंतु वर्ष 2019 में इसी समिति ने निजी क्षेत्र द्वारा जारी क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध का सुझाव दिया था।

क्रिप्टोकरेंसी पर केंद्र सरकार की राय:

  • 16 जुलाई, 2019 को संसद में क्रिप्टोकरेंसी के संदर्भ में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि देश में क्रिप्टोकरेंसी पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी संबंधी मामलों के लिये देश में कोई विशेष कानून नहीं है बल्कि ऐसे मामलों में RBI, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग के मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई होगी।

  • क्रिप्टोकरेंसी संबंधी मामलों में पुलिस IPC की धाराओं के तहत कार्रवाई कर सकती है।

क्रिप्टोकरेंसी पर अंतर-मंत्रालयी समिति के सुझाव :

  • देश में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि को देखते हुए इसके विनियमन के लिये नवंबर 2017 में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया।
  • समिति के सुझावों के आधार पर जुलाई 2019 में वित्त मंत्रालय द्वारा क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक (Draft Banning of Cryptocurrency & Regulation of Official Digital Currency Bill) 2019 का मसौदा प्रस्तुत किया गया।
  • इस मसौदे के अनुसार, देश में प्राइवेट सेक्टर (निजी क्षेत्र) द्वारा जारी सभी प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार प्रतिबंधित होगा।
  • मसौदे के अनुसार, देश में क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार करने पर 10 वर्ष तक की सज़ा और जुर्माना/आर्थिक दंड हो सकता है।
  • आर्थिक दंड के रूप में अपराधी द्वारा अर्जित लाभ या वित्तीय गड़बड़ी से हुई क्षति का तीन गुना (25 करोड़ रुपए तक) जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • हालाँकि समिति ने क्रिप्टोकरेंसी में शामिल तकनीकी के महत्त्व को रेखांकित करते हुए RBI को भविष्य में अपनी डिजिटल करेंसी जारी करने का सुझाव दिया था।

क्या है क्रिप्टोकरेंसी?

क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल करेंसी (मुद्रा) होती है, जिसमें लेन-देन संबंधी सभी जानकारियों को कूटबद्ध (Encrypt) तरीके से विकेंद्रित डेटाबेस (Decentrelised Database) में सुरक्षित रखा जाता है। हालाँकि अभी तक ऐसी मुद्रा को किसी देश के केंद्रीय बैंक की मान्यता नहीं प्राप्त है, जिसके कारण इनकी वैधता या भविष्य को लेकर भय बना रहता है।

वर्तमान में विश्व भर में 1500 से अधिक क्रिप्टोकरेंसी प्रचलित हैं। पिछले दिनों सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक द्वारा घोषित लिब्रा के अतिरिक्त बिटकॉइन, एथरियम (Ethereum) आदि क्रिप्टोकरेंसी के कुछ उदाहरण हैं।

  • क्रिप्टोकरेंसी के आविष्कार का मुख्य उद्देश्य वित्तीय लेन-देन में बैंकों या अन्य बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना था।
  • सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया में लेन-देन के विवरण बैंकों द्वारा सत्यापित किया जाता है जबकि क्रिप्टोकरेंसी में किये गए विनिमय को ब्लॉकचेन तकनीकी के माध्यम से कई देशों में फैले विकेन्द्रित डेटाबेस द्वारा सत्यापित किया जाता है।

क्या है ब्लॉकचेन तकनीक?

  • ब्लॉकचेन एक प्रकार का विकेंद्रीकृत बही-खाता (Distributed Ledger) होता है, जिसमें विनिमय से संबंधित जानकारी को कूटबद्ध तरीके से एक ब्लॉक के रूप में सुरक्षित किया जाता है।
  • ब्लॉकचेन में दर्ज प्रत्येक आँकड़े (ब्लॉक) का अपना एक विशिष्ट इलेक्ट्राॅनिक हस्ताक्षर होता है, जिसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही प्रत्येक ब्लॉक में पिछले ब्लॉक का इलेक्ट्राॅनिक हस्ताक्षर भी दर्ज होता है जिससे इन्हें आसानी से एक शृंखला में रखा जा सकता है।
  • ब्लॉकचेन में एक बार किसी भी लेन-देन के दर्ज होने पर इसे न तो वहाँ से हटाया जा सकता है और न ही इसमें संशोधन किया जा सकता है।
  • ब्लॉकचेन विनिमय की संपूर्ण जानकारी को एक स्थान पर सुरक्षित करने के बजाय हज़ारों (या लाखों) कंप्यूटरों में संरक्षित किया जाता है।
  • किसी भी नए लेन-देन को डेटाबेस से जुड़े सभी कंप्यूटरों (ब्लॉकचेन तकनीक में इन्हें नोड्स के नाम से जाना जाता है) द्वारा सत्यापित किया जाता है।

RBI द्वारा क्रिप्टोकरेंसी के विरोध का कारण:

  • मुद्रा के रूप में: क्रिप्टोकरेंसी को विश्व के किसी भी देश या केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा के रूप में वैधानिकता नहीं प्राप्त है। क्रिप्टोकरेंसी की विश्वसनीयता और किसी वित्तीय निकाय के समर्थन के अभाव में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
  • विनिमय वस्तु (Commodity) के रूप में: शेयर बाज़ार में किसी भी व्यवसाय इकाई के शेयर की कीमतों का निर्धारण उसके कारोबार, बाज़ार में उसकी मांग आदि के आधार पर किया जाता है, परंतु क्रिप्टोकरेंसी में पारदर्शिता के अभाव और इसकी कीमतों की अस्थिरता को देखते हुए कई विशेषज्ञों ने क्रिप्टोकरेंसी के विनिमय के संदर्भ में आशंकाएँ जाहिर की हैं।

क्रिप्टोकरेंसी के लाभ:

  • क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन के लिए बैंक या किसी अन्य बिचौलिये की भूमिका की आवश्यकता नहीं होती है, अतः इस माध्यम से बहुत ही कम खर्च में लेन-देन किया जा सकता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी में व्यापार के लिये किसी भी प्रकार के प्रपत्र (पहचान-पत्र आदि) की आवश्यकता नहीं होती है, अतः कोई भी व्यक्ति इस प्रणाली के माध्यम से वित्तीय क्षेत्र से जुड़ सकता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी का सबसे बड़ा लाभ इसकी गोपनीयता है, किसी प्रपत्र की अनिवार्यता के अभाव में लेन-देन के दौरान लोगों की निजी-जानकारी सुरक्षित रहती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग बिना कोई अतिरिक्त शुल्क दिये विश्व में किसी भी देश में किया जा सकता है। हालाँकि क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा के रूप में किसी भी देश द्वारा वैधानिकता प्रदान नहीं की गई है।

क्रिप्टोकरेंसी के दुष्परिणाम:

  • क्रिप्टोकरेंसी को किसी देश अथवा केंद्रीय बैंक की मान्यता नहीं प्राप्त होती जिससे इसके मूल्य की अस्थिरता का भय बना रहता है। उदाहरण के लिये दिसंबर 2017 में बिटकॉइन की कीमत 19 हजार अमेरिकी डॉलर से अधिक थी, जबकि दिसंबर 2018 में इसकी कीमत घटकर 3200 अमेरिकी डॉलर रह गई।
  • क्रिप्टोकरेंसी की गोपनीयता के कारण आतंकवादी या अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में इसके प्रयोग का भय बना रहता है।
  • प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर सरकार की मौद्रिक नीतियों का प्रभाव नहीं पड़ता, ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग को बढ़ावा देना देश की अर्थव्यवस्था के लिये नुकसानदायक हो सकता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन के व्यवस्थित संचालन के लिये लाखों की संख्या में बड़े-बड़े कंप्यूटरों का उपयोग किया जाता है, जो ऊर्जा अपव्यय का एक बड़ा कारण है। उदाहरण के लिये जुलाई 2019 में जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ़ म्यूनिख (Technical University of Munich- TUM) के शोधकर्त्ताओं ने बिटकॉइन प्रणाली के कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) के बारे में चिंताजनक आंकड़े जारी किये थे।
  • वर्तमान में जब विश्व के कई देश बहु-राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किये जा रहे कर अपवंचन (Tax Evasion) को रोकने के लिये प्रयासरत हैं तो ऐसे में विनियमन की किसी समायोजित नीति के अभाव में क्रिप्टोकरेंसी को अवैध मुद्रा के स्टेटस से बाहर रखना, कर अपवंचन रोकने के प्रयासों को और अधिक जटिल बना देगा।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य:

  • न्यायालय के आदेश के बाद देश में तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों, संबंधित नियामकों और अन्य हितधारकों के बीच क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श की पहल को बढ़ावा मिलेगा।
  • हालाँकि देश में क्रिप्टोकरेंसी की अनुमति देने और इसके विनियम हेतु नीति निर्माण में सरकार की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण होगी। ध्यातव्य है कि जुलाई 2019 में प्रस्तुत क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक, 2019 के मसौदे में सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की थी।
  • क्रिप्टोकरेंसी पर चर्चा करते हुए इसके दो पहलुओं-‘निजी क्षेत्र द्वारा जारी मुद्रा (Private Currency)’ तथा इसमें उपयोग की जाने वाली तकनीकी ‘ब्लॉकचेन’ और विकेंद्रीकृत बही-खता तकनीकी (Distributed Ledger Technology-DLT) जैसे पक्षों को अलग-अलग समझना बहुत ही आवश्यक है।
  • क्रिप्टोकरेंसी के अध्ययन के लिये गठित समिति ने जहाँ किसी प्राइवेट करेंसी का विरोध किया है, वहीं समिति ने RBI तथा सरकार को ‘ब्लॉकचेन’ व DLT के प्रति सकारात्मक रवैया रखने तथा भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रयोग की संभावना को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने की सिफारिश की है।
    • उदाहरण के लिये दक्षिण भारत के कुछ राज्यों (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल आदि) में सरकार के विभिन्न विभागों में सुरक्षित रूप से आँकड़ों (Data) को एकत्र एवं संरक्षित रखने के लिये ‘ब्लॉकचेन’ पर कई प्रयोग किये जा रहे हैं तथा ‘ब्लॉकचेन’ में तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देने के लिये केरल ब्लॉकचेन अकादमी (Kerala Blockchain Academy) की स्थापना जैसे प्रयास किये जा रहे हैं।

निष्कर्ष:

यद्यपि क्रिप्टोकरेंसी व्यापार, निवेश, तकनीकी और अन्य विभिन्न क्षेत्रों में तेज़ और कम खर्च वाली भविष्य की विनिमय प्रणाली की अवधारणा प्रस्तुत करती है। परंतु वर्तमान में क्रिप्टोकरेंसी के संदर्भ में अनेक समस्याओं (जैसे-गोपनीयता, मूल्य अस्थिरता और इसके विनियमन की किसी नीति का अभाव) को देखते हुए देश में किसी निजी मुद्रा (Private Currency) को अनुमति देना एक बड़ी चुनौती होगी। अतः भविष्य की ज़रूरतों और इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि क्रिप्टोकरेंसी के संदर्भ में सरकार, डिजिटल मुद्रा के विशेषज्ञों और सभी हितधारकों के बीच समन्वय, को बढ़ाया जाए जिससे इस क्षेत्र के बारे में जन-जागरूकता को बढ़ाया जा सके। साथ ही भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए क्रिप्टोकरेंसी के विनियमन के लिये एक मज़बूत एवं पारदर्शी तंत्र का विकास किया जा सके।

अभ्यास प्रश्न: हाल के वर्षों में वैश्विक बाज़ार में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए भारतीय आर्थिक क्षेत्र के संदर्भ में क्रिप्टोकरेंसी के महत्त्व और इससे जुड़ी चुनौतियों की समीक्षा कीजिये।

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