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थ्वाइट्स ग्लेशियर

  • 11 Feb 2026
  • 14 min read

स्रोत: द हिंदू

हालिया अध्ययनों से पश्चिमी अंटार्कटिका स्थित थ्वाइट्स ग्लेशियर के तीव्र क्षीणन और पश्चगमन प्रवृत्ति सामने आई है, जिससे दीर्घकालिक वैश्विक समुद्र-स्तर वृद्धि को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।

थ्वाइट्स ग्लेशियर

  • स्थिति एवं आकार: इसे सामान्यतः ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ कहा जाता है। यह लगभग 120 किमी. चौड़ा तीव्रगामी हिम-पिंड है और लगभग 1.9 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है, जिससे यह अंटार्कटिका के सबसे बड़े और महत्त्वपूर्ण ग्लेशियरों में से एक बनता है।
  • समुद्र-स्तर जोखिम: यदि यह पूर्णतः ध्वस्त हो जाए, तो इसमें संचित हिम वैश्विक समुद्र-स्तर को 0.5 मीटर से अधिक बढ़ा सकती है। साथ ही, इसका वर्तमान पिघलन ही वार्षिक वैश्विक समुद्र-स्तर वृद्धि में लगभग 4% का योगदान कर रहा है।
    • पिछले तीन दशकों में इस ग्लेशियर से हिम प्रवाह (Ice Discharge) लगभग दोगुना हो चुका है और वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार अगले 200-900 वर्षों में इसके बड़े पैमाने पर ध्वस्त होने की संभावना व्यक्त की है।
  • भौगोलिक संवेदनशीलता: यह ग्लेशियर उस बेस रॉक पर स्थित है, जो भीतर की ओर समुद्र स्तर से नीचे की ओर ढलान रखती है, जिससे गर्म महासागरीय जल इसके तैरते आइस शेल्फ के नीचे प्रवाहित होकर इसे आधार से पिघलाता है और उसकी संरचनात्मक स्थिरता को प्रभावित कर देता है।
  • आइस शेल्फ की भूमिका: आइस शेल्फ ग्लेशियर के महासागर में बहाव को नियंत्रित करने वाले एक संरक्षक की भूमिका निभाता है; जब यह क्षीण या खंडित हो जाता है, तो ग्लेशियर की गति तेज़ हो जाती है और यह अधिक मात्रा में बर्फ को संकुचित या क्षीणित करने लगता है।
  • वैश्विक प्रभाव: इसके अस्थिर होने से तटीय क्षेत्रों में बाढ़, अपरदन और तूफानी लहरों की तीव्रता बढ़ सकती है, जिससे विश्व भर के कम ऊँचाई वाले शहरों, द्वीपों और बंदरगाहों को खतरा उत्पन्न हो सकता है।

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