प्रारंभिक परीक्षा
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
- 06 Jan 2026
- 50 min read
प्रधानमंत्री के अनुसार, सोमनाथ मंदिर का एक हज़ार वर्षों का अस्तित्व भारत की अदम्य भावना का प्रतीक है।
- वर्तमान में राष्ट्र अपनी अटूट श्रद्धा और सांस्कृतिक संकल्प के 1000 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' (1026–2026) मना रहा है।
सोमनाथ मंदिर से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?
- परिचय: गुजरात तट पर प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर 12 पवित्र शिव ज्योतिर्लिंगों में से पहला ज्योतिर्लिंग है, जैसा कि शिव पुराण और द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् में वर्णित है।
- मंदिर का उल्लेख स्कंदपुराण, श्रीमद्भागवत, शिवपुराण तथा ऋग्वेद जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
- यह वह निजधाम प्रस्थान लीला-स्थल भी है, जहाँ से भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अंतिम यात्रा प्रारंभ की थी।
- इसे अत्यंत प्राचीन तीर्थधाम के रूप में पहचाना गया है, जिसकी महिमा वैदिक साहित्य में गंगा, यमुना और सरस्वती के समान बताई गई है।
- निर्माण: परंपरा के अनुसार, इसे अलग-अलग चरणों में बनाया गया था - पहले सोमराज (चंद्र देव) द्वारा सोने से, फिर रावण द्वारा चांदी से और बाद में भगवान कृष्ण द्वारा लकड़ी से।
- सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम (या भीम प्रथम) ने 1026 ईस्वी में महमूद गज़नवी द्वारा मंदिर के विध्वंस के बाद इसका पत्थर से पुनर्निर्माण कराया।
- भौगोलिक महत्त्व: यह मंदिर उस स्थान पर निर्मित है जहाँ कपिला, हिरण और सरस्वती नदियाँ अरब सागर से मिलती हैं।
- अबाधित समुद्र मार्ग (तीर्थस्तंभ) दक्षिणी ध्रुव के लिये एक अविच्छिन्न समुद्री मार्ग को दर्शाता है, यहाँ से निकटतम भूभाग लगभग 9,936 किमी. दूर स्थित है, जो प्राचीन भारतीय भौगोलिक ज्ञान को प्रतिबिंबित करता है।
- स्थापत्य की विशेषताएँ: इसे कैलास महामेरु प्रसाद शैली में निर्मित किया गया है। संरचना में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप शामिल हैं। इसका शिखर 155 फीट ऊँचा है।
- विनाश एवं पुनर्निर्माण चक्र: 1026 ई. में महमूद गज़नवी द्वारा पहला आक्रमण किया गया, जिसका उल्लेख फारसी विद्वान अल-बरूनी ने किया है।
- मंदिर को 1026, 1297, 1394 और 1706 ई. (औरंगज़ेब के शासनकाल में) सहित कई बार लूटा गया और नष्ट किया गया। वर्ष 2026 पहले आक्रमण के 1,000 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है, जो एक महत्त्वपूर्ण सभ्यतागत पड़ाव को चिह्नित करता है।
- वर्तमान (7वाँ) मंदिर स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय पुनरुत्थान के प्रतीक के रूप में पुनर्निर्मित किया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल ने वर्ष 1947 में पुनर्निर्माण की पहल की। प्राण-प्रतिष्ठा राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 11 मई, 1951 को संपन्न हुई। पुनर्निर्माण को के.एम. मुंशी ("सोमनाथ: द श्राइन इटरनल" के लेखक) ने समर्थन दिया।
- सांस्कृतिक एवं बौद्धिक महत्त्व: 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद ने सोमनाथ का दर्शन किया और इसे भारत की राष्ट्रीय जीवनधारा का प्रतीक बताया, जो बार-बार नष्ट होकर भी पुनः जन्म लेती रही है।
- विभिन्न परंपराओं के संतों द्वारा पूज्य, जिनमें जैन आचार्य हेमचंद्राचार्य भी शामिल हैं।
- महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा प्रतिकूल राजनीतिक परिस्थितियों में भी आनुष्ठानिक निरंतरता बनाए रखी गई।
- सोमनाथ कट्टरता पर आस्था, विनाश पर सृजन और भारतीय सभ्यता की शाश्वतता का प्रतीक है। यह संदेश भगवद्गीता के उस विचार को प्रतिध्वनित करता है कि आत्मा अविनाशी है — न उसे नष्ट किया जा सकता है, न उसका अंत होता है।
कैलास महामेरु प्रसाद शैली
- परिचय: यह हिंदू मंदिर स्थापत्य की एक विशिष्ट शैली को संदर्भित करता है, जो मुख्यतः चालुक्य (या सोलंकी) परंपरा से संबद्ध है। यह शैली विशेष रूप से पश्चिमी भारत में, खासकर गुजरात में प्रमुख रूप से विकसित हुई।
- आदर्श और प्रतीकात्मकता: कैलास महामेरु प्रसाद शब्द मंदिर की उस भव्य संरचना का आह्वान करता है, जो कैलास पर्वत (शिव का निवास) और मेरु पर्वत (हिंदू ब्रह्मांडीय कल्पना का ब्रह्मांडीय पर्वत) का प्रतीक है तथा ऊँचे, भव्य शिखर (Spire) और सूक्ष्म व जटिल शिल्पकला पर विशेष बल देता है।
- प्रमुख स्थापत्य विशेषताएँ: यह उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला का नागर शैली
- उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की नागर शैली के अंतर्गत आता है किंतु इसमें चालुक्य/सोलंकी काल के क्षेत्रीय तत्त्वों का समावेश भी है, जिसे प्रायः मारू-गुर्जर स्थापत्य के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है।
- विशेषताएँ: इसमें ऊँचा शिखर (सोमनाथ में लगभग 50 मीटर), सुस्पष्ट एवं अलंकृत नक्काशी, गर्भगृह (Sanctum), सभामंडप तथा नृत्यमंडप शामिल हैं।
- यह शैली गुजरात के पारंपरिक शिल्पकारों, जिन्हें सोमपुरा सालाट कहा जाता है, के उच्च स्तरीय स्थापत्य एवं शिल्प-कौशल का प्रदर्शन करती है।
12 ज्योतिर्लिंग और उनका स्थान
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ज्योतिर्लिंग का नाम |
नगर/स्थान |
राज्य |
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सोमनाथ |
प्रभास पाटन |
गुजरात |
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मल्लिकार्जुन |
श्रीशैलम |
आंध्र प्रदेश |
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महाकालेश्वर |
उज्जैन |
मध्य प्रदेश |
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ओंकारेश्वर |
मांधाता द्वीप |
मध्य प्रदेश |
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केदारनाथ |
केदारनाथ |
उत्तराखंड |
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भीमाशंकर |
पुणे (खेड़) |
महाराष्ट्र |
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काशी विश्वनाथ |
वाराणसी |
उत्तर प्रदेश |
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त्र्यंबकेश्वर |
त्र्यंबक |
महाराष्ट्र |
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बैद्यनाथ |
देवघर |
झारखंड |
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नागेश्वर |
द्वारका |
गुजरात |
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रामेश्वरम |
रामेश्वरम |
तमिलनाडु |
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घृष्णेश्वर |
एलोरा |
महाराष्ट्र |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सोमनाथ के लिये वर्ष 1026 ई. का ऐतिहासिक महत्त्व क्या है?
यह वर्ष महमूद गज़नवी द्वारा मंदिर पर किये गए पहले बड़े आक्रमण और विध्वंस को दर्शाता है, जिसकी सहस्राब्दी बाद सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (1026–2026) के रूप में स्मृति की जाती है।
2. स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का नेतृत्व किसने किया?
सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में पुनर्निर्माण की पहल की; 1951 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न की गई।
3. सोमनाथ में अबाधित समुद्र मार्ग क्या है?
यह समुद्र की ओर उन्मुख एक अक्ष (तीर्थस्तंभ) है, जो दक्षिणी ध्रुव तक निर्बाध समुद्री मार्ग (~9,936 किमी.) को दर्शाता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न: हाल ही में प्रधानमंत्री ने वेरावल में सोमनाथ मंदिर के निकट नए सर्किट हाउस का उद्घाटन किया। सोमनाथ मंदिर के बारे में निम्नलिखित कथनों में कौन-से सही हैं? (2022)
- सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग देव-मंदिरों में से एक है।
- अल-बरूनी ने सोमनाथ मंदिर का वर्णन किया है।
- सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा (आज के मंदिर की स्थापना) राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन द्वारा की गई थी।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)

