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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 23 जुलाई, 2022

  • 23 Jul 2022
  • 6 min read

राष्ट्रीय प्रसारण दिवस 

प्रतिवर्ष 23 जुलाई को देश भर में राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1927 में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) ने बॉम्बे स्टेशन से रेडियो प्रसारण शुरू किया था। भारत में रेडियो प्रसारण सेवाएंँ वर्ष 1923 में ब्रिटिश शासन के दौरान रेडियो क्लब ऑफ बॉम्बे की पहल के तहत शुरू हुईं थीं। वर्ष 1930 में ब्रिटिश सरकार ने रेडियो प्रसारण को अपने हाथ में ले लिया और उसने भारतीय राज्य प्रसारण सेवा (ISBS) शुरू की। IBC, जो कि एक निजी संस्था थी, को ब्रिटिश सरकार द्वारा देश में दो रेडियो स्टेशन संचालित करने की अनुमति दी गई थी। मई 1932 में IBC को स्थायी रूप से भारतीय राज्य प्रसारण सेवा (ISBS) के रूप में बदल दिया गया। बाद में 8 जून, 1936 को भारतीय राज्य प्रसारण सेवा (ISBS) को ऑल इंडिया रेडियो (AIR) में परिवर्तित कर दिया गया तथा वर्ष 1957 में इसे आकाशवाणी नाम दिया गया। प्रसार भारती भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक प्रसारण एजेंसी है और इसे संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था। वर्तमान में ऑल इंडिया रेडियो की सेवा में देश भर में स्थित 414 स्टेशन शामिल हैं और देश के लगभग 92% क्षेत्र और देश की लगभग 99.19% आबादी तक इसकी पहुंँच है। आकाशवाणी पर 23 भाषाओं एवं 146 बोलियों में प्रसारण किया जाता है, प्रसारित भाषाओं के संदर्भ में सामाजिक-आर्थिक तथा सांस्कृतिक विविधता के मामले में यह दुनिया के सबसे बड़े प्रसारण संगठनों में से एक है। 

देश का पहला हर घर जल ज़िला 

मध्य  प्रदेश का बुरहानपुर देश का पहला हर घर जल ज़िला बन गया है। बुरहानपुर के सभी 254 गांँवों में लोगों को नल से पीने का साफ जल मिल रहा है। 15 अगस्त, 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत के समय ज़िले में सिर्फ 36.5 प्रतिशत घरों में नल से जल उपलब्ध था। कोविड महामारी सहित विभिन्न बाधाओँ और चुनौतियों के बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों, जल समिति और ज़िले के अधिकारियों के लगातार प्रयासों से मात्र 34 महीनों में ज़िले के सभी 1,01,905 घरों में नल से जल उपलब्ध कराया गया है। वर्ष 2019 में लॉन्च इस मिशन के तहत वर्ष 2024 तक ‘कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन’ (FHTC) के माध्यम से प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पानी की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है। यह मिशन ‘जल शक्ति मंत्रालय’ के अंतर्गत आता है तथा मौजूदा जल आपूर्ति प्रणालियों और पानी के कनेक्शन की कार्यक्षमता सुनिश्चित करता है; पानी की गुणवत्ता की निगरानी एवं परीक्षण के साथ-साथ सतत् कृषि को भी बढ़ावा देता है। यह संरक्षित जल के संयुक्त उपयोग; पेयजल स्रोत में वृद्धि, पेयजल आपूर्ति प्रणाली, धूसर जल उपचार और इसके पुन: उपयोग को भी सुनिश्चित करता है।  

चीतों के लिये भारत-नामीबिया समझौता 

भारत और नामीबिया ने भारत में चीतों को फिर से लाने के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर 20 जुलाई, 2022 को हस्ताक्षर किये। 8 चीतों (4 नर और 4 मादा) के अगस्त 2022 में भारत पहुंँचने की संभावना है। उन्हें मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में  लाया जाएगा। समझौते का उदेश्य भारत में चीतों के संरक्षण एवं बहाली को बढ़ावा देना है, जहांँ वे अब विलुप्त प्रजातियांँ हैं। भारत-नामीबिया समझौता ज्ञापन के एक हिस्से के रूप में दोनों देश जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण शासन, प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरणीय प्रभाव आकलन सहित अन्य क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। भारत ने प्रतिवर्ष 8 से 10 चीतों को देश में लाने की योजना बनाई है। अगले पांँच वर्षों में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अन्य अफ्रीकी देशों से कुल 50 चीतों को भारत में स्थानांतरित किया जाएगा। चीता बड़ी बिल्ली प्रजातियों की सबसे पुरानी प्रजातियों में से एक है, जिनके पूर्वजों की उत्पत्ति को पाँच मिलियन से अधिक वर्षों से मियोसीन युग में देखा गया। चीता दुनिया का सबसे तेज़ दौड़ने वाला भूमि स्तनपायी भी है जो अफ्रीका एवं एशिया में पाया जाता है। IUCN की रेड लिस्ट में अफ्रीकी चीता ‘सुभेद्य’ (Vulnerable) तथा एशियाई चीता ‘अति संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में है 

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