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झोड़िया समुदाय और सौरा (सोरा) भाषा

  • 06 Feb 2026
  • 14 min read

स्रोत: पीआईबी 

हाल ही में, ओडिशा के झोड़िया समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में सम्मिलित करने और 'सौरा'  भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग चर्चा में आई। केंद्र सरकार ने लोकसभा को सूचित किया कि भारत के महापंजीयक कार्यालय (ORGI) ने इस मांग का समर्थन नहीं किया है और इसे पुन: राज्य सरकार को प्रेषित किया है।

झोड़िया समुदाय

  • परिचय: झोड़िया (झोड़िया परोजा) समुदाय मुख्य रूप से ओडिशा के कोरापुट, रायगढ़ और कालाहांडी ज़िलों के कुछ भागों में निवास करता है। पूर्व में इन्हें 'परोजा' जनजाति के पर्याय के रूप में मान्यता प्राप्त थी, हालाँकि वर्ष 1997 तक इन्हें अनुसूचित जनजाति के लाभ प्राप्त होते थे।
  • यह समुदाय सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा है, जो भौगोलिक रूप से पृथक्/दुर्गम क्षेत्रों में निवास करता है, इनकी आजीविका मुख्यतः निर्वाह-उन्मुख कृषि तथा वन उपज पर निर्भर है। शिक्षा एवं आर्थिक अवसरों की गंभीर कमी के कारण ये सामाजिक पूर्वाग्रहों एवं अभावों का सामना कर रहे हैं।

सौरा भाषा

  • सौरा भाषा सौरा जनजाति द्वारा बोली जाती है। यह ऑस्ट्रो-एशियाई (मुंडा) भाषा परिवार से संबंधित है और इसे सोरा, सवरा या सौरा के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसकी अपनी एक विशिष्ट लिपि है, जिसे 'सोरंग सोमपेंग' कहा जाता है। इसका विकास वर्ष 1936 में मंगेई गोमांगो द्वारा किया गया था। यह लिपि समुदाय के लिये गहन सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व रखती है।
  • यह भाषा आठवीं अनुसूची में सम्मिलित नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी आधिकारिक मान्यता, संस्थागत समर्थन तथा संरक्षण के प्रयास सीमित रह जाते हैं।
    • सरकार ने स्पष्ट किया है कि भाषाओं को शामिल करने के लिये कोई निश्चित मानदंड अथवा समय-सीमा निर्धारित नहीं है, क्योंकि इस संबंध में पाहवा समिति (वर्ष 1996) तथा सीताकांत मोहापात्र समिति (वर्ष 2003) द्वारा ऐसे मानदंड निर्धारित करने के पूर्व में किये गए प्रयास अनिर्णायक रहे थे।

और पढ़ें: भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची

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