रैपिड फायर
भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक
- 03 Feb 2026
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भारत के प्रधानमंत्री की इज़राइल यात्रा की तैयारियों के बीच, भारत ने भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी की और सऊदी अरब के साथ एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा संवाद आयोजित किया, जो पश्चिम एशिया में परिष्कृत कूटनीतिक संतुलन को प्रदर्शित करता है।
पश्चिम एशिया कूटनीति में प्रमुख घटनाक्रम
- सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग: तीसरी भारत–सऊदी अरब सुरक्षा कार्य समूह बैठक रियाद (सऊदी अरब) में आयोजित की गई, जिसमें आतंकवाद वित्तपोषण, साइबर आतंकवाद और अपराध–आतंकवाद संबंधी नेटवर्क के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति हुई।
- यह द्विपक्षीय सुरक्षा संवाद तंत्र है, जिसे वर्ष 2019 में स्थापित उनके सामरिक साझेदारी परिषद (SPC) के तहत बनाया गया। यह SPC की पॉलिटिकल, कांसुलर और सुरक्षा सहयोग समिति के अधीन कार्य करता है।
- अरब देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन: इसके बाद दूसरी भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें पलस्तीन के विदेश मंत्री सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- भारत ने गाज़ा में शांति बहाल करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन व्यक्त किया, जिसमें शर्म-एल-शेख शांति शिखर सम्मेलन (2025) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 2803 का उल्लेख किया गया, जिसने गाज़ा के लिये अंतरिम प्रशासन और अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल का समर्थन किया।
- हालाँकि भारत ने गाज़ा के लिये शांति बोर्ड में शामिल होने के अमेरिकी निमंत्रण पर अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिसका कार्य इज़राइल और हमास के बीच संघर्षविराम बनाए रखना और गाज़ा का पुनर्निर्माण सुनिश्चित करना है।
- भारत ने पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता को उजागर किया, जिसमें लिबिया, सूडान, सीरिया, लेबनान और यमन शामिल हैं, और सागरीय सुरक्षा तथा लेबनान में अपने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन को लेकर चिंताएँ व्यक्त की हैं।
- ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क: इसी समय भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने तेहरान का दौरा किया और ईरानी सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठकें कीं, जबकि क्षेत्रीय तनाव संभावित अमेरिकी–इज़राइली हमले को लेकर बढ़ रहा था।
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