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पृथ्वी की गति का गुरुत्वीय नियंत्रण

  • 11 Feb 2026
  • 12 min read

स्रोत: द हिंदू

एक वैज्ञानिक विवेचन बताता है कि गुरुत्वाकर्षण किस प्रकार पृथ्वी की गति को नियंत्रित करता है तथा ग्रहों की गति और अभिकेंद्रीय बल (Centripetal Force) की प्रमुख अवधारणाओं पर पुनर्विचार करता है।

  • बंधनकारी बल: गुरुत्वाकर्षण एक मूलभूत बंधनकारी बल (Fundamental Binding Force) के रूप में कार्य करता है, जो पृथ्वी के अंतरिक्ष में निरंतर गति करने के बावजूद मनुष्यों, महासागरों, वायुमंडल और समस्त जीवन को उससे आबद्ध रखता है।
  • अभिकेंद्रीय क्रिया: वस्तुओं को नीचे आकर्षित करने के अतिरिक्त गुरुत्वाकर्षण अभिकेंद्रीय बल के रूप में कार्य करता है, जो चंद्रमा को पृथ्वी की कक्षा में तथा पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करते रहने में बनाए रखता है।
  • ग्रहों की गति: गुरुत्वीय आकर्षण के कारण पृथ्वी प्रत्येक वर्ष सूर्य की परिक्रमा पूर्ण करती है और अपने कक्षीय पथ में लगभग 1 अरब किमी. की यात्रा करती है।
    • पृथ्वी लगभग 1,07,000 किमी. प्रति घंटा की औसत गति से चलती है, जो ग्रहों की गति की गतिशील प्रकृति को दर्शाता है।
  • घर्षण का अभाव: पृथ्वी पर गति के विपरीत, जहाँ घर्षण वस्तुओं को धीमा करता है, ग्रह अंतरिक्ष के लगभग निर्वात में गति करते हैं, जहाँ नगण्य प्रतिरोध होने के कारण बिना अतिरिक्त ऊर्जा के निरंतर गति संभव होती है।
  • ईथर (Aether) का निषेध: मिशेलसन-मॉर्ले प्रयोग (1887) ने ‘ईथर’ नामक एक अदृश्य माध्यम के अस्तित्व को खंडित कर दिया, जिससे यह पुष्टि हुई कि पृथ्वी किसी प्रतिरोधी पदार्थ के बजाय लगभग रिक्त अंतरिक्ष में गति करती है।

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