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FSSAI द्वारा अश्वगंधा का विनियमन

  • 21 Apr 2026
  • 14 min read

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने न्यूट्रास्यूटिकल्स और सप्लीमेंट्स में अश्वगंधा के उपयोग के संबंध में एक एडवाइज़री (परामर्श) जारी किया है।

  • नियामक आधार: खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम, 2016 (अनुसूची IV) के अनुसार, स्वास्थ्य पूरक और संबंधित उत्पादों में उपयोग के लिये केवल पौधों के निर्दिष्ट भागों के उपयोग की ही अनुमति है।
  • परिचय: अश्वगंधा (Withania somnifera) एक औषधीय जड़ी-बूटी है जिसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले के रूप में जाना जाता है। इसे एक एडेप्टोजेन के रूप में वर्गीकृत किया गया है (जो शरीर को तनाव प्रबंधित करने में मदद करता है)। इसके अलावा यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता को भी बढ़ाता है और रक्त शर्करा को कम करता है, साथ ही चिंता तथा अवसाद के लक्षणों से लड़ने में मदद करता है।
    • इसका व्यापक रूप से आयुर्वेदिक दवाओं, न्यूट्रास्यूटिकल्स, हर्बल चाय, प्रोटीन मिश्रणों और वेलनेस उत्पादों में भी उपयोग किया जाता है।
  • पत्तियों पर प्रतिबंध का कारण: निर्देश के अनुसार, अश्वगंधा की केवल जड़ों और उनके अर्क (extracts) के उपयोग की अनुमति है, जबकि पत्तियों और उनके अर्क को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका कारण पत्तियों में विथानोलाइड्स (जैसे कि विथाफेरिन-ए) का उच्च स्तर होना है, जो सुरक्षा संबंधी चिंताएँ उत्पन्न कर सकता है।
    • आयुष मंत्रालय ने भी निर्माताओं को पत्तियों के उपयोग से बचने का निर्देश दिया है और खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs) को निर्धारित सीमाओं और पौधों के अनुमत हिस्सों का पालन करना अनिवार्य होगा।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)

  • FSSAI एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई है। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है तथा इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थित है।

Ashwagandha

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