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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

'ईयर ऑफ अवेयरनेस ऑन साइंस एंड हेल्‍थ’ कार्यक्रम

  • 01 May 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये

'ईयर ऑफ अवेयरनेस ऑन साइंस एंड हेल्‍थ’ कार्यक्रम

मेन्स के लिये

महामारी से निपटने में विज्ञान की भूमिका

चर्चा में क्यों?

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science & Technology-DST) के तहत नेशनल काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन (National Council for Science & Technology Communication-NCSTC) ने COVID-19 पर केंद्रित एक स्वास्थ्य एवं जोखिम संचार कार्यक्रम 'ईयर ऑफ अवेयरनेस ऑन साइंस एंड हेल्‍थ’ (Year of Awareness on Science & Health-YASH) की शुरुआत की है।

प्रमुख बिंदु

  • इस कार्यक्रम के तहत COVID-19 महामारी की चुनौती से निपटने के लिये आपातकालीन तैयारियों और आवश्‍यक कार्यों को संपन्‍न करने हेतु स्‍वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्‍थानों, अनुसंधान और मीडिया संस्थानों को शामिल करने की रणनीतियाँ तैयार की गई हैं।
  • कार्यक्रम के तहत जोखिमों को संप्रेषित करने और जोखिम प्रबंधन के बारे में बताने के लिये प्रामाणिक वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य सूचनाओं के अनुवाद और उपयोग की भी योजना बनाई गई है।
  • ध्यातव्य है कि वर्तमान वैश्विक महामारी के परिदृश्‍य में चारों ओर चिंताएँ और चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं, जिसके कारण वैज्ञानिक नवाचारों की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण हो गई है।

उद्देश्य

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य लोगों की धारणाओं का आकलन करना, सार्वजनिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना और जोखिम से संबंधित पारस्परिक संचार प्रक्रियाओं में भागीदारी को बढ़ावा देना है। 
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य जन संचार गतिविधियों की मदद से सभी स्तरों पर जोखिम को कम करना भी है। 
    • साथ ही कार्यक्रम के तहत सामुदायिक देखभाल के लिये लोगों के मध्य विज्ञान की सामान्य समझ को बढ़ाने और व्यक्तिगत स्वच्छता, सोशल डिस्टेंसिंग, वांछित सामूहिक व्यवहार को बनाए रखने आदि स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों पर ज़ोर दिया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम में जोखिम के भय को कम करना, स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना और जनता तथा समाज के बीच वैज्ञानिक संस्कृति के पोषण हेतु आवश्यक समझ के साथ-साथ विश्वास निर्माण के लिये सूचना प्रसार तंत्र विकसित करना भी शामिल है।
  • यह कार्यक्रम परंपरा एवं स्वदेशी ज्ञान के साथ कार्य करने वाले लक्षित समूहों के बीच जोखिम की समझ को बेहतर करेगा। 
  • यह जोखिम और इससे संबंधित चुनौतियों, समाधानों और इस परिस्थिति से जूझने वाले लोगों में साहस तथा आत्मविश्वास पैदा करने के साथ ही लक्षित समूहों के व्यवहार में परिवर्तन लाएगा। 
  • साथ ही यह सामुदायिक नेताओं, डॉक्टरों, धार्मिक नेताओं के साथ कार्य संबंध को बेहतर करेगा। इसके अलावा यह गलत धारणाओं, गलत विश्वासों को स्पष्ट करने और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा विधिवत प्रमाणित ज्ञान के आधार पर प्रथाओं को पेश करने की क्षमता में सुधार लाएगा और आम लोगों के मध्य समाधान एवं सेवा प्रदाताओं की वैज्ञानिक दक्षता में भरोसा पैदा करेगा।

लाभ

  • यह कार्यक्रम स्‍वास्‍थ्‍य के संबंध में ज़मीनी स्तर पर बेहतरी और प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने के लिये एक व्यापक एवं प्रभावी विज्ञान एवं स्वास्थ्य संचार प्रयास है। 
  • साथ ही यह बड़े पैमाने पर लोगों के जीवन को बचाने और उसे बेहतर बनाने में मदद करेगा। यह लोगों में आत्मविश्वास पैदा करेगा, वैज्ञानिक स्वभाव को बढ़ाएगी और उनके बीच स्वास्थ्य के प्रति सजगता को भी बढ़ावा देगा।
  • इस कार्यक्रम से क्षमता निर्माण करने, सभी हितधारकों को शामिल करने और समुदायों में जागरूकता की भावना विकसित करने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे लोगों को विश्लेषण के योग्य बनाया जा सकेगा, लोगों के व्यवहार में बदलाव आएगा और वे स्‍वास्‍थ्‍य सेवा एवं उससे संबंधित जोखिम के बारे में सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेने में समर्थ होंगे।

स्रोत: पी.आई.बी.

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