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विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस

  • 01 Feb 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

NTDs के बारे में, विश्व स्वास्थ्य संगठन।

मेन्स के लिये:

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों से निपटने हेतु भारत के प्रयास।

चर्चा में क्यों?

प्रत्येक वर्ष 30 जनवरी को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस (NTD) मनाया जाता है। इसे 74वीं विश्व स्वास्थ्य सभा (2021) में घोषित किया गया था।

  • इस दिन को मान्यता देने का प्रस्ताव संयुक्त अरब अमीरात द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इसे प्रतिनिधियों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया। 
  • विश्व स्वास्थ्य सभा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की निर्णय लेने वाली संस्था है।

प्रमुख बिंदु 

  • उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD):
    • NTD संक्रमण का एक समूह है जो अफ्रीका, एशिया और अमेरिका के विकासशील क्षेत्रों में हाशिये पर रहने वाले समुदायों में सबसे सामान्य है। 
    • ये रोग विभिन्न प्रकार के रोगजनकों जैसे-  वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोज़ोआ और परजीवी के कारण होते हैं।
      • NTD विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है, जहाँ लोगों के पास स्वच्छ पानी या मानव अपशिष्ट के निपटान के सुरक्षित तरीकों तक पहुँच नहीं है।
    • आमतौर पर इन बीमारियों के अनुसंधान और उपचार के लिये तपेदिक, एचआईवी-एड्स और मलेरिया जैसी बीमारियों की तुलना में कम धन आवंटित होता है। 
    • NTD के उदाहरण हैं: सर्पदंश का ज़हर, खुजली, जम्हाई, ट्रेकोमा, लीशमैनियासिस और चगास रोग आदि।
  • NTDs पर लंदन उद्घोषणा:
    • इसे NTDs के वैश्विक भार को वहन करने के लिये 30 जनवरी, 2012 को अपनाया गया था।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), विश्व बैंक, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के अधिकारी, प्रमुख वैश्विक दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कई राष्ट्रीय सरकारों के प्रतिनिधियों ने लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन में इन बीमारियों को समाप्त करने का संकल्प लिया।
  • वर्ष 2021-2030 के लिये WHO का नया रोडमैप:
    • प्रक्रिया से लेकर प्रभाव को मापने तक।
    • रोग-विशिष्ट योजना और प्रोग्रामिंग से लेकर सभी क्षेत्रों में सहयोगात्मक कार्य तक।
    • बाह्य रूप से संचालित एजेंडे से लेकर देश के स्वामित्व वाले और सरकार द्वारा वित्तपोषित कार्यक्रमों तक।
  • NTD परिदृश्य:
    • NTDs वैश्विक स्तर पर एक अरब से अधिक लोगों को प्रभावित करते हैं।
      • ये रोग रोकथाम योग्य एवं उपचार योग्य हैं। हालाँकि ये रोग और गरीबी एवं पारिस्थितिक तंत्र के साथ इनके जटिल अंतर्संबंध विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक एवं आर्थिक परिणामों का कारण बने हुए हैं।
    • कुल 20 NTDs हैं, जो दुनिया भर में 1.7 बिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करते हैं।
    • कालाज़ार और लसीका फाइलेरिया जैसे परजीवी रोगों समेत भारत में कम-से-कम 11 ऐसे रोग मौजूद हैं, जिनसे देश भर में लाखों लोग प्रभावित होते हैं, इनमें प्रायः अधिकतर लोग गरीब एवं संवेदनशील वर्ग से हैं।
  • भारतीय परिदृश्य:
    • वर्ष 2021 में कालाज़ार के मामलों की अधिक व्यापकता के साथ-साथ बेहतर निगरानी और परीक्षण की स्थिति देखी गई।
    • वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में इस प्रकार के रोग के 35% कम मामले सामने आए और सभी रिपोर्ट किये गए मामलों का पूर्ण उपचार किया गया।
    • भारत में कालाज़ार रोग खत्म होने की कगार पर है, 99% ‘कालाज़ार स्थानिक ब्लॉकों’ ने अपने-अपने उन्मूलन लक्ष्य हासिल कर लिये हैं।
  • NTDs को समाप्त करने के लिये भारतीय पहल:
    • NDTs के उन्मूलन की दिशा में गहन प्रयासों के हिस्से के रूप में वर्ष 2018 में ‘लिम्फेटिक फाइलेरिया रोग के तीव्र उन्मूलन की कार्य-योजना’ (APELF) शुरू की गई थी।
    • वर्ष 2005 में भारत, बांग्लादेश और नेपाल की सरकारों द्वारा सबसे संवेदनशील आबादी के शीघ्र रोग निदान और उपचार में तेज़ी लाने और रोग निगरानी में सुधार एवं कालाज़ार को नियंत्रित करने के लिये WHO समर्थित एक क्षेत्रीय गठबंधन का गठन किया गया है।
    • भारत पहले ही कई अन्य NDTs को समाप्त कर चुका है, जिसमें गिनी वर्म, ट्रेकोमा और यॉज़ शामिल हैं।
    • जन औषधि प्रशासन (Mass Drug Administration) जैसे निवारक तरीकों को समय-समय पर स्थानिक क्षेत्रों में तैनात किया जाता है, जिसके द्वारा ज़ोखिम वाले समुदायों को फाइलेरिया रोधी (Anti-filaria) दवाएँ मुफ्त प्रदान की जाती हैं।
    • सैंडफ्लाई प्रजनन (Sandfly Breeding) को रोकने के लिये स्थानिक क्षेत्रों में घरेलू स्तर पर अवशिष्ट छिड़काव जैसे वेक्टर जनित रोकथाम उपाय किये जाते हैं।
    • सरकार लिम्फोएडेमा (Lymphoedemaa) और हाइड्रोसील Hydrocele) से प्रभावित लोगों के लिये रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता रोकथाम भी सुनिश्चित करती है।
    • केंद्र और राज्य सरकारों ने कालाज़ार (Kala-Azar) और इसकी अगली कड़ी (ऐसी स्थिति जो पिछली बीमारी या चोट का परिणाम है) से पीड़ित लोगों के लिये वेतन मुआवज़ा योजनाएँ (wage compensation schemes) शुरू की हैं, जिन्हें पोस्ट-कालाज़ार डर्मल लीशमैनियासिस (Post-Kala Azar Dermal Leishmaniasis) के रूप में भी जाना जाता है।

आगे की राह

  • भारत NTDs के खिलाफ लड़ाई में एक वैश्विक राष्ट्र के रूप में उभरने की दिशा में अग्रसर है, लेकिन इस दिशा में सफलता के लिये उचित साहसिक कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
  • गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल, शुद्ध पानी, स्वच्छता के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने और लैंगिक समानता, मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण सुनिश्चित करने के लिये एक एकीकृत दृष्टिकोण इन विविध NTDs को खत्म करने हेतु आवश्यक है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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