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भारत में सर्पदंश से हुई मौत

  • 11 Jul 2020
  • 9 min read

प्रीलिम्स के लिये:

वेनम और एंटी-वेनम्स 

मेन्स के लिये:

सर्पदंश के उपचार हेतु WHO की पहल एवं भारत में सर्पदंश के कारण होने वाली मौतों की स्थिति 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में कनाड़ा स्थित ‘टोरंटो विश्वविद्यालय’ (University of Toronto) के ‘सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च’ (Centre for Global Health Research-CGHR) द्वारा यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom-UK) के सहयोग से भारत में पिछले 2 दशकों (20 वर्षों) में सर्पदंश/सांप के काटने से होने वाली मौतों का अध्ययन किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस अध्ययन के अनुसार, भारत में पिछले 20 वर्षों अर्थात वर्ष 2000 से वर्ष 2019 की अवधि में सर्पदंश से मरने वालों की संख्या 1.2 मिलियन (12 लाख) दर्ज की गई है।
  • ‘भारत में वर्ष 2000 से वर्ष 2019 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों के बारे में एक राष्ट्रीय प्रतिनिधि मृत्यु दर अध्ययन’ (Trends in Snakebite deaths in India from 2000 to 2019 in a Nationally Representative Mortality Study) शीर्षक में बताया गया है कि भारत में अधिकांश मृत्यु ज़हरीले रसेल वाइपरस (Russell's Viper) क्रिटस (kraits) तथा कोबरा (Cobras) साँपों के काटने से होती हैं।

रसेल वाइपर:

  • रसेल वाइपर वाइपरिडे परिवार में विषैले सांप की एक प्रजाति है।
  • इस परिवार जिसमें विश्व के पुराने विषैले वाइपर शामिल हैं।
  • यह प्रजाति एशिया में पूरे भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिणी चीन और ताइवान में पाई जाती है।

क्रेट:

  • इसे भारतीय क्रेट या ब्लू क्रेट के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह भारतीय में पाई जाने वाली विषैले सांप की एक प्रजाति है।

कोबरा:

इसे नागराज भी कहा जाता है। 

  • यह विश्व का सबसे लंबा विषैला सांप है।
  • सांप की यह प्रजाति दक्षिण पूर्व एशिया एवं भारत में पाई जाती जाती है। 
  • यह एशिया के सर्वाधिक खतरनाक सापों में से एक है।
  • भारत में सर्पदंश का क्षेत्रवार विवरण: 
  • अध्ययन में बताया गया है कि इस अवधि (वर्ष 2000-वर्ष 2019 ) के दौरान सर्पदंश से होने वाली वार्षिक मौतों का औसत 58 हज़ार रहा है। 
  • देश के आठ राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के कारण लगभग 70% मौतें देखी गई है, जिनमें शामिल राज्य हैं-
    • बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश (तेलंगाना सहित), राजस्थान तथा गुजरात राज्यों के ग्रामीण क्षेत्र।
  • अध्ययन के अनुसार, सर्पदंश के कारण आधे से अधिक मौतें जून से सितंबर माह में मानसून की अवधि के दौरान हुई हैं।
  • सर्पदंश से सर्वाधिक मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में हुई हैं जो 97% हैं।
  • पुरुषों में सर्पदंश के कारण मृत्यु का प्रतिशत 59% है जो महिलाओं की तुलना में 41% अधिक है।
  • सर्पदंश के कारण मरने वालों की सर्वाधिक संख्या 15-29 वर्ष के बीच के लोगों की रही है जो 25% है।
  • सर्पदंश के कारण वार्षिक आधार पर सर्वाधिक मृत्यु वाले राज्य: 
    • उत्तर प्रदेश-8,700 हज़ार 
    • आंध्र प्रदेश-5,200 हज़ार 
    • बिहार-4,500 हज़ार 

Snack

भारत में सर्पदंश के उपचार में समस्या:

  • खराब प्रशिक्षित डॉक्टर तथा एंटी- वेनम की कमी का होना।
  • एंटी- वेनम के निर्माण के लिये वन विभाग की अनुमति की आवश्यकता जो कि कई चरणों की लंबी प्रक्रिया है।
  • एंटी-वेनम के निर्माण/परीक्षण के लिये घोड़ों की आवश्यकता होती है, जिसके लिये एक बड़ी जगह की आवश्यक होती है। निजी कंपनियों के लिये यह एक खर्चीली प्रक्रिया है।

सर्पदंश से सुरक्षा हेतु उपाय:

  • सर्पदंश के सर्वाधिक मामले ग्रामीण क्षेत्रों में आते हैं जिनमें कृषक समुदाय शामिल हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे क्षेत्रों को लक्षित करना एवं सुरक्षा के संदर्भ में सरल तरीकों से लोगों को शिक्षित करना जैसे- रबर के जूते, दस्ताने, मच्छरदानी और रिचार्जेबल मशालों (या मोबाइल फोन फ्लैशलाइट) का उपयोग कर सर्पदंश के जोखिम को कम किया जा सकता है।
  • लोगों को विषैले सर्पों की प्रजातियों के बारे में बताना तथा सांप के काटने के कारण मानव स्वास्थ पर पड़ने वाले हानिकारक एवं जानलेवा प्रभावों के बारे में लोगों को जानकारी देना।
  • Indiansnakes.org वेबसाइट पर सांपों के निवास स्थान का विवरण, भौगोलिक वितरण एवं स्पष्ट तस्वीरें उपलब्ध होती हैं जिसे एंड्रॉइड फोन के माध्यम से डाउनलोड करके ज़हरीले साँपों के बारे में जाना जा सकता है।

इस दिशा में विश्व स्वास्थ्य संघठन का प्रयास:

  • ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (World Health Organization- WHO) सर्पदंश को एक सर्वोच्च प्राथमिकता वाली उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी (Neglected Tropical Disease- NTD) के रूप में मान्यता प्रदान करता है।
  • ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ द्वारा वर्ष 2030 तक सर्पदंश के कारण होने वाली मौतों की संख्या को आधा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 
  • एंटीवेनम को सुलभ और सस्ती बनाने के लिये WHO की योजना गुणवत्ता एंटीवेनम्स का उत्पादन बढ़ाने की है।
  • एंटीवेनम के लिये स्थायी बाज़ार उपलब्ध कराने के लिये वर्ष 2030 तक एंटीवेनम निर्माण में 25% वृद्धि की आवश्यकता है।
  • WHO द्वारा वैश्विक एंटीवेनम के उत्पादन/स्टॉक के लिये एक पायलट प्रोजेक्ट की योजना बनाई।

वेनम (Venoms) और एंटी-वेनम्स (Anti-Venoms):

  • वेनम:
    • विष/वेनम एक प्रकार का स्राव है। 
    • इसमें एक जानवर द्वारा उत्पादित एक या एक से अधिक विषाक्त पदार्थ शामिल होते हैं।
    • इसका स्राव कशेरुकी और अकशेरुकी दोनों तरह के जानवरों में अपनी रक्षा के दौरान या फिर शिकार करते समय किया जाता है।
    • सांप का विष एक उच्च संशोधित लार है जिसमें ज़ूटॉक्सिन होता है जो शिकार को मारने एवं उसे पचाने में सहायक होता है।
  • एंटी-वेनम्स:
    • एंटीवेनम, विष या विष घटकों के खिलाफ शुद्ध एंटीबॉडी है। 
    • एंटीवेनम का उत्पादन जानवरों द्वारा बनाए गए एंटीबॉडी से किया जाता है। 
    • इसका उपयोग वेनम के असर को समाप्त करने के लिये किया जाता है।

निष्कर्ष: 

भारत में पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम बनाने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है। अतः ऐसे में भारत में विषैले सांप प्रजातियों के वितरण की बेहतर समझ विकसित कर और अधिक उपयुक्त एंटी-वेनम को विकसित किया जा सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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