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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन

  • 31 Jan 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

बाल्टिक सागर और उसके आसपास के देश।

मेन्स के लिये:

रूस-यूक्रेन संकट, नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अमेरिका ने कहा है कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो वह नॉर्ड स्ट्रीम योजना को रोक देगा।

  • हालाँकि जर्मनी के नेतृत्त्व में यूरोपीय देश, नॉर्ड स्ट्रीम पर इसके महत्त्व के कारण प्रतिबंध लगाने हेतु शुरू में अनिच्छुक लग रहे थे, लेकिन अब कहा गया है कि यह प्रतिबंध तालिका से बाहर नहीं है।
  • नॉर्ड स्ट्रीम,  समुद्र के नीचे सबसे लंबी एक निर्यात गैस पाइपलाइन है जो बाल्टिक सागर के रास्ते होकर रूस से यूरोप तक गैस ले जाती है।

Nord-Stream

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • नॉर्ड स्ट्रीम में दो पाइपलाइन हैं, जिनमें से प्रत्येक में दो लाइनें हैं।
      • नॉर्ड स्ट्रीम-1 का कार्य वर्ष 2011 में पूरा हुआ था जो लेनिनग्राद (रूस) में वायबोर्ग से जर्मनी के ग्रिफ़्सवाल्ड के पास लुबमिन तक पहुँचती है।
      • नॉर्ड स्ट्रीम-2 जो लेनिनग्राद में उस्त-लुगा से होकर लुबमिन तक पहुँचती है, यह सितंबर 2021 में पूरी हुई और इसके चालू होने के बाद इसमें प्रतिवर्ष 55 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस को ले जाने की क्षमता है।
    • दोनों पाइपलाइन एक साथ कम-से-कम 50 वर्षों के लिये कुल 110 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) गैस को यूरोप तक पहुँचा सकती हैं।
    • नॉर्ड स्ट्रीम रूस, फिनलैंड, स्वीडन, डेनमार्क और जर्मनी सहित कई देशों के अनन्य आर्थिक क्षेत्रों (EEZ) एवं रूस, डेनमार्क एवं जर्मनी के क्षेत्रीय जल से होकर गुज़रती है।
    • यह पाइपलाइन जर्मनी में OPAL (बाल्टिक सागर पाइपलाइन) और NEL (उत्तरी यूरोपीय पाइपलाइन) से जुड़ती है जो आगे यूरोपीय ग्रिड से जुड़ती है।
  • पाइपलाइन पर आपत्ति:
    • जर्मनी द्वारा:
      • पर्यावरणविदों के अनुसार, यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कटौती और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के जर्मन प्रयासों के अनुकूल नहीं है।
      • नॉर्ड स्ट्रीम 2 ने अभी तक संचालन शुरू नहीं किया है क्योंकि जर्मनी का कहना है कि यह जर्मन कानून का पालन नहीं करती है और इसकी मंज़ूरी को निलंबित कर दिया है। इस परियोजना को यूरोपीय आयोग की मंज़ूरी का भी इंतजार है।
    • सामरिक आपत्ति:
      • विशेष रूप से यू.एस. की रणनीतिक आपत्ति यह है कि यह यूरोप को रूस पर भी निर्भर बना देगा, जिससे यूरोप में रूस का प्रभाव बढ़ जाएगा।
        • इसके अलावा चिंता यह भी है कि रूस इसे भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
      • यूक्रेन ने आपत्ति की है कि पाइपलाइन के चालू होने के बाद उसे पारगमन शुल्क में लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होगा. 
        • इसके अलावा जब तक रूस में उत्पादित गैस यूक्रेन के माध्यम से पारगमन करती है, रूस के हस्तक्षेप करने और यूक्रेन में अस्थिरता पैदा करने की संभावना नहीं है और यूरोप इसकी सुरक्षा में व्यस्त रहेगा।
      • पोलैंड और बेलारूस जैसे देश भी पारगमन शुल्क से वंचित हो सकते हैं और इसलिये पाइपलाइन का विरोध करते हैं क्योंकि यह उनके माध्यम से चलने वाली मौजूदा पाइपलाइनों को बाईपास कर देगा।
  • यूरोप और रूस के लिये महत्त्व:
    • यूरोप:
      • यूरोप को प्रतिवर्ष 100 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) से अधिक प्राकृतिक गैस की आवश्यकता होती है और इसकी लगभग 40% गैस रूस से आती है।
      • पिछले कुछ वर्षों में घरेलू गैस उत्पादन में कमी के कारण यूरोप गैस के आयात पर और अधिक निर्भर हो गया है। रूसी गैस पर निर्भरता कम करना मुश्किल है, क्योंकि यूरोप के पास इसका कोई प्रतिस्थापन उपलब्ध नहीं है।
      • कई यूरोपीय व्यवसायों का ‘नॉर्ड स्ट्रीम-2’ में काफी बड़ा निवेश है और इन व्यवसायों से सरकारों पर काफी दबाव है। अंत में, रूस से गैस में कमी पहले से ही उच्च गैस की कीमतों में और अधिक वृद्धि करेगी तथा यह घरेलू स्तर पर काफी प्रतिकूल हो सकता है।
    • रूस:
      • रूस, जिसके पास दुनिया में सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार मौजूद है, की कुल बजट प्राप्ति का लगभग 40% हिस्सा गैस एवं तेल की बिक्री से आता है।
      • इस लिहाज़ से ‘नॉर्ड स्ट्रीम-2’ काफी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह पारगमन देशों के माध्यम से गैस भेजने से संबंधित जोखिमों को समाप्त करता है, पारगमन शुल्क को हटाकर परिचालन लागत में कटौती करता है और अपने सबसे महत्त्वपूर्ण यूरोपीय ग्राहक, जर्मनी तक सीधी पहुँच प्रदान करता है।
      • यह विश्वसनीयता का निर्माण करके रूस पर यूरोप की निर्भरता को और अधिक बढ़ाता है।

स्रोत: द हिंदू

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