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आर्कटिक में पर्माफ्रॉस्ट का विगलन और औद्योगिक संदूषण

  • 17 May 2023
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

आर्कटिक में पर्माफ्रॉस्ट का विगलन, औद्योगिक संदूषण, नासा, पर्माफ्रॉस्ट, खनन, जलवायु परिवर्तन

मेन्स के लिये:

आर्कटिक में पर्माफ्रॉस्ट का विगलन और औद्योगिक संदूषण

चर्चा में क्यों?

एक नए अध्ययन के अनुसार, "पर्माफ्रॉस्ट का विगलन ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक संदूषण वाले हज़ारों स्थलों में पर्यावरणीय खतरा उत्पन्न कर सकता है", साथ ही पर्माफ्रॉस्ट के विगलन से आर्कटिक क्षेत्र में विषाक्त पदार्थों का प्रसार हो सकता है।

पर्माफ्रॉस्ट:

  • पर्माफ्रॉस्ट अथवा स्थायी तुषार भूमि वह क्षेत्र है जो कम-से-कम लगातार दो वर्षों से शून्य डिग्री सेल्सियस (32 डिग्री F) से कम तापमान पर जमी हुई अवस्था में है।
  • ये स्थायी रूप से जमे हुए मैदान अक्सर आर्कटिक क्षेत्रों जैसे- ग्रीनलैंड, अलास्का (संयुक्त राज्य अमेरिका), कनाडा, रूस और पूर्वी यूरोप में पाए जाते हैं।
  • नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के अनुसार, पर्माफ्रॉस्ट "मृदा, चट्टानों और रेत के संयोजन से बने हैं जो बर्फ द्वारा एक साथ संयोजित होते हैं। पर्माफ्रॉस्ट में मृदा और बर्फ वर्ष भर जमी रहती है।
  • हालाँकि यहाँ भूमि हमेशा जमी रहती है, जबकि पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्र हमेशा बर्फ से ढके नहीं होते हैं।

प्रमुख बिंदु 

  • क्षेत्र में दूषित स्थल: 
    • पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्र में 4,500 औद्योगिक संचालनों के चलते 13,000 से 20,000 दूषित स्थलों के निर्माण की आशंका है।
    • अब तक लगभग 1,000 ज्ञात औद्योगिक स्थल और 2,200-4,800 तक ज्ञात दूषित स्थल पहले से ही पर्माफ्रॉस्ट के विगलन के कारण अस्थिर होने के जोखिम में हैं।
  • आर्कटिक में औद्योगिक अपशिष्ट:
    • इस क्षेत्र में ज्ञात औद्योगिक अपशिष्ट के प्रकारों में ड्रिलिंग व खनन अपशिष्ट, मृदा व तरल पदार्थ जैसे दूषित पदार्थ, खदान अपशिष्ट डंपिंग साइट्स, भारी धातु, फैला हुआ तरल ईंधन और रेडियोधर्मी अपशिष्ट शामिल हैं।
  • तेज़ी से पिघलना और औद्योगिक साइट को अस्थिर करना:
    •  जलवायु परिवर्तन के कारण शेष ग्रह की तुलना में आर्कटिक लगभग चार गुना तेज़ी से गर्म हो रहा है और इसलिये पर्माफ्रॉस्ट तेज़ी से पिघल रहा है, जो न केवल औद्योगिक स्थलों बल्कि दूषित क्षेत्रों को भी अस्थिर कर सकता है।
      • इस शताब्दी के अंत तक लगभग 2,100 औद्योगिक स्थलों और 5,600-10,000 तक दूषित स्थलों पर अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है।
  • ऐसी साइट्स के निर्माण का कारण:
    • कभी सतत् स्थिर और भरोसेमंद माना जाने वाला आर्कटिक क्षेत्र वास्तव में एक निर्जन और अछूते क्षेत्र से बहुत दूर है।  
      •  यह तेल क्षेत्रों व पाइपलाइन, खदानों और सैन्य ठिकानों जैसी अनगिनत औद्योगिक सुविधाओं से युक्त है।
    • इन औद्योगिक स्थलों से निकलने वाले ज़हरीले कचरे को पर्माफ्रॉस्ट में इस उम्मीद के साथ दफनाया गया था कि यह अनिश्चित काल तक ढका रहेगा और सारा बुनियादी ढाँचा उसी पर खड़ा किया गया है।
      •  अब ग्रह लगातार गर्म हो रहा है जिससे खतरा मंडरा रहा है।
    • शीत युद्ध के दौरान आर्कटिक क्षेत्र ने विकास में वृद्धि का अनुभव किया तथा यह संसाधन निष्कर्षण और सैन्य संचालन का केंद्र बन गया। 
      • नतीजतन, औद्योगिक और ज़हरीले कचरा पर्माफ्रॉस्ट पर या उसके अंदर जमा हो गया और इसे हटाने के लिये कोई उपाय नहीं किये गए।

पर्माफ्रॉस्ट के विगलन के प्रभाव: 

  • इसके सबसे खतरनाक परिणामों में से एक ग्रीनहाउस गैसों (GHG) का वायुमंडल में मुक्त होना है। 
    • नासा की वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “अकेले आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट में लगभग 1,700 बिलियन मीट्रिक टन कार्बन है, जिसमें मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड शामिल हैं। यह 2019 में जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन के रूप में जारी कार्बन की मात्रा का लगभग 51 गुना है।
  • पर्माफ्रॉस्ट में जमे हुए पौधे में निहित पदार्थ सड़ता नहीं है, लेकिन जब पर्माफ्रॉस्ट पिघलता है, तो मृत पौधों की सामग्री के भीतर के रोगाणु पदार्थ को तोड़ना शुरू कर देते हैं और कार्बन को वायुमंडल में छोड़ते हैं।
    • कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से हज़ारों निष्क्रिय वायरस और बैक्टीरिया बाहर निकल आएंगे।
    • इनमें से कुछ "नए या प्राचीन वायरस हो सकते हैं जिनके खिलाफ मनुष्यों में प्रतिरक्षा और इलाज की कमी है या ऐसी बीमारियाँ जिन्हें समाज ने चेचक या ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) के रूप में समाप्त कर दिया है।"

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, पिछले वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. ‘मीथेन हाइड्रेट’ के निक्षेपों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (2019) 

  1. भूमंडलीय तापन के कारण इन निक्षेपों से मीथेन गैस का निर्मुक्त होना प्रेरित हो सकता है। 
  2. ‘मीथेन हाइड्रेट’ के विशाल निक्षेप उत्तरी ध्रुवीय टुंड्रा में तथा समुद्र अधस्तल के नीचे पाए जाते हैं।  
  3. वायुमंडल में मीथेन एक या दो दशक के बाद कार्बन डाइऑक्साइड में ऑक्सीकृत हो जाती है। 

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2 
(b) केवल 2 और 3 
(c) केवल 1 और 3 
(d) 1, 2 और 3 

उत्तर: (d) 

व्याख्या: 

  • ‘मीथेन हाइड्रेट’ बर्फ की एक जालीनुमा पिंजड़े जैसी संरचना है, जिसमें मीथेन अणु बंद होते हैं। यह एक ऐसी "बर्फ" है जो केवल स्वाभाविक रूप से उपसतह में जमा होती है जहाँ तापमान और दबाव की स्थिति इसके गठन के लिये अनुकूल होती है।
  • आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट के नीचे मीथेन हाइड्रेट तलछट और तलछटी चट्टान इकाइयों के निर्माण तथा स्थिरता के लिये उपयुक्त तापमान एवं दबाव की स्थिति वाले क्षेत्रों में महाद्वीपीय मार्जिन के साथ तलछटी जमा; अंतर्देशीय झीलों और समुद्र के गहरे पानी के तलछट व अंटार्कटिक बर्फ आदि शामिल है। अत: कथन 2 सही है।
  • मीथेन हाइड्रेट्स जो एक संवेदनशील तलछट है, तापमान में वृद्धि या दबाव में कमी के साथ तेज़ी से पृथक हो सकते हैं। इस पृथक्करण से मुक्त मीथेन और पानी को प्राप्त किया जाता है जिसे ग्लोबल वार्मिंग द्वारा रोका जा सकता है। अत: कथन 1 सही है।
  • मीथेन वायुमंडल से लगभग 9 से 12 वर्ष की अवधि में ऑक्सीकृत हो जाती है जहाँ यह कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित होती है। अत: कथन 3 सही है।
  • अतः विकल्प (D) सही उत्तर है।

मेन्स:

प्रश्न. आर्कटिक की बर्फ और अंटार्कटिक के ग्लेशियरों के पिघलने से पृथ्वी पर मौसम के पैटर्न और मानव गतिविधियों पर अलग-अलग प्रभाव कैसे पड़ता है? व्याख्या कीजिये। (2021)

स्रोत:इंडियन एक्सप्रेस

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