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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल

  • 01 May 2023
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सतत् विमानन ईंधन (SAF), यूनाइटेड स्टेट्स फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन क्लियरिंग हाउस, ASTM D4054 प्रमाणन, ASTM इंटरनेशनल, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO), वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम्स क्लीन स्काई फॉर टुमॉरो इनिशिएटिव।

मेन्स के लिये:

शुद्ध शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को प्राप्त करने में सतत् विमानन ईंधन (SAF) का महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR) की एक प्रयोगशाला, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (Indian Institute of Petroleum- IIP) ने बोइंग, इंडिगो, स्पाइसजेट और तीन टाटा एयरलाइंस- एयर इंडिया, विस्तारा और एयरएशिया इंडिया के साथ सतत् विमानन ईंधन के उत्पादन के लिये साझेदारी की है।

सतत् विमानन ईंधन/सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल:

  • परिचय:
    • इसे बायो-जेट फ्यूल भी कहा जाता है, इसके उत्पादन राष्ट्रीय स्तर पर विकसित तकनीकों का उपयोग करके किया जाता है जिसमें खाना पकाने के तेल और उच्च तेल वाले पौधों के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है।
    • ASTM इंटरनेशनल द्वारा ASTM D4054 प्रमाणीकरण के लिये आवश्यक मानकों को पूरा करने हेतु संस्थानों द्वारा उत्पादित इस ईंधन के नमूनों का संयुक्त राष्ट्र फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन क्लीयरिंग हाउस में सख्त परीक्षण किया जा रहा है।
  • उत्पादन का स्रोत:
    • CSIR-IIP ने गैर-खाद्य और खाद्य तेलों के साथ-साथ खाना पकाने के लिये उपयोग में लाए जाने वाले तेल जैसे विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करके ईंधन तैयार किया है।
    • उन्होंने पाम स्टीयरिन, सैपियम ऑयल, पाम फैटी एसिड डिस्टिलेट्स, शैवाल तेल, करंजा और जेट्रोफा सहित विभिन्न स्रोतों का इस्तेमाल किया।
  • भारत में सतत् विमानन ईंधनउत्पादन के लाभ:
    • भारत में SAF के उत्पादन और उपयोग को बढ़ाने से GHG उत्सर्जन को कम करने, वायु गुणवत्ता में सुधार, ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार सृजित करने तथा संधारणीय विकास को बढ़ावा देने सहित कई लाभ मिल सकते हैं।
    • यह विमानन उद्योग को अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में योगदान करने में भी मदद कर सकता है।
    • विमानन के लिये जैव ईंधन को नियमित जेट ईंधन के साथ मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। पारंपरिक ईंधन की तुलना में इसमें सल्फर की मात्रा कम होती है जो वायु प्रदूषण को कम कर सकता है और शुद्ध शून्य उत्सर्जन को प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य में योगदान दे सकता है।
    • विमानन हेतु जैव ईंधन को नियमित जेट ईंधन के साथ मिलाकर एक साथ उपयोग किया जा सकता है। पारंपरिक ईंधन की तुलना में इसमें सल्फर की मात्रा कम होती है, जो वायु प्रदूषण को कम कर सकता है एवं नेट ज़ीरो (शुद्ध शून्य) उत्सर्जन प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य का समर्थन कर सकता है।

ASTM प्रमाणन:

  • ASTM इंटरनेशनल, जिसे पहले अमेरिकन सोसाइटी फॉर टेस्टिंग एंड मैटेरियल्स के नाम से जाना जाता था, एक वैश्विक संगठन है जो उत्पादों, सामग्रियों एवं प्रणालियों की एक विस्तृत शृंखला हेतु तकनीकी मानकों को विकसित तथा प्रकाशित करता है।
  • ASTM मानकों का उपयोग उद्योग, सरकारों और अन्य संगठनों द्वारा उत्पादों एवं प्रक्रियाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा तथा विश्वसनीयता सुनिश्चित करने हेतु किया जाता है।
  • ASTM प्रमाणन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी उत्पाद या सामग्री का परीक्षण और प्रासंगिक ASTM मानकों के खिलाफ मूल्यांकन किया जाता है।
  • प्रमाणन का उपयोग यह प्रदर्शित करने हेतु किया जा सकता है कि कोई उत्पाद या सामग्री कुछ आवश्यकताओं को पूरा करती है, जैसे- प्रदर्शन विनिर्देश, सुरक्षा मानक या पर्यावरण नियम आदि।

विश्व में SAF को बढ़ावा देने हेतु पहल:

  • CORSIA प्रोग्राम: अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (International Civil Aviation Organization- ICAO) ने विमानन उत्सर्जन को उजागर करने हेतु कार्बन ऑफसेटिंग एंड रिडक्शन स्कीम फॉर इंटरनेशनल एविएशन (CORSIA) की स्थापना की है।
    • CORSIA एयरलाइनों को वर्ष 2020 के स्तर से ऊपर किसी भी उत्सर्जन को ऑफसेट करने की आवश्यकता है और यह प्राथमिक रूप से उत्सर्जन को कम करने हेतु SAF के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
  • क्लीन स्काई फॉर टुमारो पहल: विश्व आर्थिक मंच ने क्लीन स्काई फॉर टुमारो पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य SAF के उत्पादन और उपयोग में तेज़ी लाना है।
    • यह पहल SAF उत्पादन को विकसित करने और बढ़ाने में सहयोग करने हेतु विमानन, ईंधन एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के हितधारकों को एक साथ लाती है।
  • SAF सम्मिश्रण लक्ष्य:
    • यूरोपीय संघ ने विमानन से GHG उत्सर्जन को कम करने हेतु स्थायी विमानन ईंधन हेतु सम्मिश्रण लक्ष्य स्थापित किये हैं जिसका उद्देश्य समय के साथ विमानन ईंधन में SAF के उपयोग को बढ़ाना है।
    • वर्ष 2025 से गैसोलीन और मिट्टी तेल से बने पारंपरिक जेट ईंधन के साथ SAF का सम्मिश्रण 2 प्रतिशत से शुरू होगा।
      • वर्ष 2050 में 63 प्रतिशत SAF सम्मिश्रण तक पहुँचने के लक्ष्य के साथ सम्मिश्रण लक्ष्य प्रत्येक पाँच साल में बढ़ेगा।
  • सस्टेनेबल स्काइज़ एक्ट और SAF उत्पादन प्रोत्साहन:
    • संयुक्त राज्य अमेरिका में सतत् विमानन ईंधन (SAF) के उपयोग और उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिये अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने मई 2021 में सस्टेनेबल स्काइज़ एक्ट पेश किया।
    • सस्टेनेबल स्काइज़ एक्ट अमेरिका में SAF-उत्पादक सुविधाओं की संख्या बढ़ाने के लिये पाँच वर्षों में 1 बिलियन डॉलर का अनुदान प्रदान करता है।
  • नोट: ईंधन के कुछ अन्य स्थायी स्रोत जिन पर भारत काम कर रहा है, में शामिल हैं:

SAF से जुड़ी चुनौतियाँ:

  • उच्च लागत: SAF के उत्पादन की लागत वर्तमान में पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में अधिक है, जिससे एयरलाइनों के लिये SAF उत्पादन और उपयोग में निवेश करना आर्थिक रूप से कम व्यवहार्य हो जाता है।
  • संसाधन उपलब्धता: SAF के उत्पादन, भंडारण और वितरण के लिये सीमित बुनियादी ढाँचा है, जिससे SAF के उत्पादन एवं आपूर्ति को बढ़ाना मुश्किल हो जाता है।
  • फीडस्टॉक उपलब्धता: SAF उत्पादन के लिये फीडस्टॉक की उपलब्धता सीमित है और खाद्य तथा कृषि क्षेत्रों जैसे अन्य उद्योगों के बीच संसाधनों के लिये प्रतिस्पर्द्धा है।
  • प्रमाणन: SAF के लिये प्रमाणन प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है तथा SAF उत्पादन के लिये विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त मानकों की कमी है।
  • जन जागरूकता: सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और SAF के लाभों की समझ बढ़ाने तथा नीति निर्माताओं एवं निवेशकों से अधिक समर्थन को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

आगे की राह

  • निवेश में वृद्धि: सरकारों, एयरलाइंस और निवेशकों को लागत कम करने तथा उपलब्धता बढ़ाने के लिये SAF उत्पादन एवं बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। इसमें R&D के वित्तपोषण के साथ-साथ नई सुविधाओं का निर्माण करना और SAF के उत्पादन हेतु मौजूदा सुविधाओं को जारी रखना शामिल है।
  • समर्थन नीति और नियामक ढाँचे: सरकारें SAF के उपयोग को प्रोत्साहित करने वाली नीति और नियामक ढाँचे को लागू कर सकती हैं, जैसे- कर प्रोत्साहन, सब्सिडी और SAF के एक निश्चित प्रतिशत का उपयोग करने के लिये एयरलाइनों हेतु आदेश।
  • सहयोग को प्रोत्साहित करना: एयरलाइंस, ईंधन उत्पादकों और अनुसंधान संस्थानों सहित हितधारकों के बीच सहयोग से अधिक एकीकृत और कुशल SAF आपूर्ति शृंखला बनाने में मदद मिल सकती है।
  • जन जागरूकता को बढ़ावा देना: यह SAF के लाभों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता और टिकाऊ विमानन की आवश्यकता की मांग बढ़ाने तथा नीति निर्माताओं एवं निवेशकों को अधिक समर्थन के लिये प्रोत्साहित कर सकता है।
  • नए फीडस्टॉक स्रोत विकसित करना: SAF उत्पादन के लिये नए फीडस्टॉक स्रोत विकसित करने हेतु अनुसंधान में निवेश, जैसे- नगरपालिका ठोस अपशिष्ट और कृषि अपशिष्ट, फीडस्टॉक उपलब्धता बढ़ाने तथा अन्य उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्द्धा को कम करने में मदद कर सकता है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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