दृष्टि ज्यूडिशियरी का पहला फाउंडेशन बैच 11 मार्च से शुरू अभी रजिस्टर करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक शीर्ष वैश्विक विमानन बाज़ार बनना

  • 22 Mar 2023
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये:

CAPA इंडिया एविएशन समिट, राष्ट्रीय नागर विमानन नीति (NCAP) 2016, उड़ान योजना।  

मेन्स के लिये:

भारत के विमानन क्षेत्र की स्थिति, विमानन क्षेत्र से संबंधित हालिया सरकारी पहल।  

चर्चा में क्यों?  

दशक के अंत तक भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व का अग्रणी विमानन बाज़ार बनने की ओर अग्रसर है।

  • भारत में नागरिक उड्डयन सचिव ने CAPA इंडिया एविएशन समिट के दौरान आबादी के लिये  हवाई संपर्क के विस्तार संबंधी देश की योजनाओं की घोषणा की।

भारत के विमानन क्षेत्र की स्थिति:  

  • परिचय:  
    • भारत का नागरिक विमानन क्षेत्र विश्व स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ते विमानन बाज़ारों में से एक है और 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिये एक प्रमुख विकास इंजन साबित होगा।
      • भारत वर्तमान में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक उड्डयन बाज़ार है।
    • विगत 6 वर्षों में भारत का घरेलू यात्री यातायात लगभग 14.5% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से एवं लगभग 6.5% अंतर्राष्ट्रीय यात्री वृद्धि की दर से बढ़ा है।
    • भारत का घरेलू यात्री यातायात वित्त वर्ष 2023-24 में 16 करोड़ और 2029-30 तक 35 करोड़ तक बढ़ने का अनुमान है। 
  • विमानन क्षेत्र से संबंधित सरकार की पहल: 
    • भारत सरकार का लक्ष्य हवाई यात्रा के लिये अंतर्राष्ट्रीय केंद्रों के रूप में 6 प्रमुख महानगरीय शहरों को स्थापित करना है। 
    • राष्ट्रीय नागर विमानन नीति (NCAP) 2016 
    • UDAN योजना 
  • चुनौतियाँ: 
    • उच्च परिचालन लागत: भारतीय विमानन क्षेत्र के लिये प्रमुख चुनौतियों में से एक उच्च परिचालन लागत है। यह कई कारकों के कारण है जैसे कि ईंधन की उच्च कीमतें, हवाई अड्डे के शुल्क एवं कर।
      • जेट ईंधन की कीमतों में वृद्धि एयरलाइनों के लिये एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यह लागत आमतौर पर कुल परिचालन लागत का 20% से 25% तक होती है।
    • बुनियादी ढाँचे की कमी: हवाई अड्डे की सीमित क्षमता, आधुनिक हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली की कमी और अपर्याप्त ग्राउंड हैंडलिंग सुविधाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण भारतीय विमानन क्षेत्र को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
    • नियामक ढाँचा: यह भारतीय विमानन क्षेत्र के लिये एक अन्य चुनौती है।
      • यह काफी विनियमित क्षेत्र है और एयरलाइनों को विभिन्न प्रकार के नियमों तथा विनियमों का पालन करना पड़ता है, जो जटिल एवं अधिक समय की खपत वाले हो सकते हैं

निष्कर्ष:

विमानन क्षेत्र में विकास के लिये भारत की महत्वाकांक्षी योजनाएँ देश की अर्थव्यवस्था और लोगों के लिये महत्त्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं। हालाँकि कई चुनौतियाँ भी हैं, फिर भी अपने विमानन बुनियादी ढाँचे का विस्तार करने तथा अपनी विनिर्माण क्षमताओं को विकसित करने की भारत की प्रतिबद्धता इस दशक के अंत तक वैश्विक विमानन बाज़ार में एक प्रमुख अभिकर्त्ता बनने के संदर्भ में अच्छी स्थिति में है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के अधीन संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से भारत में विमानपत्तनों के विकास का परीक्षण कीजिये। इस संबंध में प्राधिकरणों के समक्ष कौन-सी चुनौतियाँ हैं? (मुख्य परीक्षा, 2017)

प्रश्न. अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन नियम सभी देशों को अपने भूभाग के ऊपर के आकाशी क्षेत्र (एयरस्पेस) पर पूर्ण और अनन्य प्रभुता प्रदान करते हैं। आप ‘आकाशी क्षेत्र’ से क्या समझते हैं? इस आकाशी क्षेत्र के ऊपर के आकाश के लिये इन नियमों के क्या निहितार्थ हैं? इससे प्रसूत चुनौतियों पर चर्चा कीजिये और खतरे को नियंत्रित करने के तरीके सुझाइये। (मुख्य परीक्षा, 2014) 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2