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भारतीय अर्थव्यवस्था

तीव्र आर्थिक रिकवरी

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  • 02 Sep 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये

सकल घरेलू उत्पाद, वी-शेप्ड आर्थिक रिकवरी, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय

मेन्स के लिये

हालिया अथिक रिकवरी के निहितार्थ और कारण

चर्चा में क्यों?

‘राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय’ के हालिया आँकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून 2021 तिमाही के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था में 20.1% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई।

  • पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान ‘सकल घरेलू उत्पाद’ (GDP) में 24.4% का संकुचन दर्ज किया गया था, ज्ञात हो कि यह वह समय था जब कोविड-19 महामारी के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की वजह से लगभग सभी आर्थिक गतिविधियों को रोक दिया गया था।

प्रमुख बिंदु

  • आर्थिक रिकवरी के विषय में 
    • कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर, जो कि अप्रैल-मई 2021 में अपने चरम स्तर पर थी, के बावजूद पहली तिमाही के दौरान आर्थिक वृद्धि देखने को मिली है।
    • हालाँकि यह तीव्र वृद्धि मुख्य तौर पर वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में संकुचन (-24.4%) के कारण हुई है।
    • यह तीव्र वृद्धि बीते वर्ष सरकार द्वारा की गई वी-शेप्ड रिकवरी की भविष्यवाणी की पुष्टि करती है।
    • इस अभूतपूर्व आर्थिक सुधार के बावजूद इस वर्ष पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर अभी भी पूर्व-कोविड वर्ष 2019-20 के दौरान इसी अवधि की जीडीपी वृद्धि दर से 9.2% कम है।
    • अन्य क्षेत्रों के अलावा विनिर्माण (49.63%) और निर्माण (68.3%) क्षेत्र ने अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
      • हालाँकि सेवा क्षेत्र अभी भी लगातार पिछड़ रहा है।
    • 'कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन’ और 'बिजली, गैस, पानी की आपूर्ति तथा अन्य उपयोगी सेवाओं' से संबंधित क्षेत्र पूर्व-कोविड वर्ष 2019-20 के स्तर से ऊपर आए हैं।
  • वी-शेप्ड आर्थिक रिकवरी 
    • वी-शेप्ड आर्थिक रिकवरी एक तीव्र आर्थिक गिरावट के बाद आर्थिक प्रदर्शन में त्वरित एवं निरंतर वसूली को दर्शाती है।
    • इस तरह की रिकवरी आमतौर पर उपभोक्ता मांग एवं व्यावसायिक निवेश के तेज़ी से पुन: समायोजन के कारण आर्थिक गतिविधि में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव से प्रेरित होती है। 
  • NSO के बारे में:
    • यह सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत सांख्यिकीय सेवा अधिनियम 1980 के तहत सरकार की केंद्रीय सांख्यिकीय एजेंसी है।
    • यह सरकार और अन्य उपयोगकर्त्ताओं की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये सांख्यिकीय सूचना सेवाएँ प्रदान करने की व्यवस्था के विकास हेतु ज़िम्मेदार है, ताकि इसके आधार पर नीति, योजना, निगरानी और प्रबंधन हेतु निर्णय लिये जा सकें।

Shape of recovery

  • NSO द्वारा जारी रिपोर्ट और सूचकांक:
  • अर्थव्यवस्था का कुल उत्पादन मापक:
    • एक अर्थव्यवस्था में कुल उत्पादन को दो तरीकों से मापा जा सकता है:
      • कुल मांग का मापन: सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
      • कुल आपूर्ति मापन: सकल मूल्यवर्द्धित (GVA)
    • GDP के बारे में:
      • यह अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है, जिन्हें अंतिम उपयोगकर्त्ता द्वारा खरीदा जाता है और एक निश्चित अवधि में किसी देश में उत्पादन किया जाता है।
      • जीडीपी के आँकड़े बताते हैं कि किसी भी अर्थव्यवस्था में आर्थिक विकास के चार इंजनों की क्या स्थिति है। ये चार इंजन हैं:
        • निजी अंतिम उपभोग व्यय (C)
        • निवेश ( I)
        • सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (G)
        • शुद्ध निर्यात” (NX) (निर्यात-आयात)
      • GDP = C + I + G + NX
    • GVA क्या है?
      • यह दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न उत्पादक क्षेत्रों (जैसे कृषि, बिजली आदि) में कितना मूल्य जोड़ा गया (धन के संदर्भ में)।
      • यह बताता है कि कौन से विशिष्ट क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और कौन से मूल्यवर्द्धन हेतु संघर्ष कर रहे हैं।
    • GDP और GVA के मध्य अंतर:
      • कुल मांग या कुल आपूर्ति को मापने की तुलना में कुल उत्पादन समान होना चाहिये।
      • हालाँकि हर अर्थव्यवस्था में एक सरकार होती है, जो कर लगाती है और सब्सिडी भी प्रदान करती है।
      •  GDP को GAV से प्राप्त डेटा और विभिन्न उत्पादों पर लगने वाले करों को जोड़कर  तथा सभी उत्पादों पर मिलने वाली सब्सिडी को घटाकर प्राप्त किया जाता है। 
      • दूसरे शब्दों में GDP = (GVA) + (सरकार द्वारा अर्जित कर) - (सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी)।
      • इन दो निरपेक्ष मूल्यों के बीच का अंतर सरकार द्वारा निभाई गई भूमिका के बारे में बताता है। 
        • अगर सरकार सब्सिडी पर खर्च की तुलना में करों से अधिक राजस्व अर्जित करती है, तो सकल घरेलू उत्पाद GVA से अधिक होगा।
        • दूसरी ओर, यदि सरकार अपने कर राजस्व से अधिक सब्सिडी प्रदान करती है, तो GVA का पूर्ण स्तर सकल घरेलू उत्पाद के पूर्ण स्तर से अधिक होगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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