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भारतीय अर्थव्यवस्था

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में संकुचन

  • 12 Sep 2020
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक

मेन्स के लिये

भारत के विकास के बारे में गणना करने हेतु IIP का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी हालिया आँकड़ों के अनुसार, विनिर्माण, खनन, पूंजीगत वस्तुओं और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के उत्पादन में गिरावट के कारण जुलाई माह में लगातार पाँचवीं बार औद्योगिक उत्पादन में 10.4 प्रतिशत का संकुचन हुआ है।

प्रमुख बिंदु

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आँकड़े बताते हैं कि अप्रैल-जुलाई की अवधि में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में बीते वर्ष इसी अवधि की तुलना में संचयी रूप से 29.2 प्रतिशत का संकुचन हुआ, जबकि वर्ष 2019 की अप्रैल-जून तिमाही में इसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। 
  • बीते वर्ष अकेले जुलाई माह में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 4.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
  • उपभोक्ता गैर-टिकाऊ (Consumer Non-Durables) वस्तुओं को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों जैसे- विनिर्माण, खनन, प्राथमिक वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं आदि पर कोरोना वायरस महामारी और उसके कारण लागू किये गए लॉकडाउन का प्रभाव देखने को मिला है, जबकि केवल उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि देखने को  मिली। 

कारण

  • सरकार द्वारा कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के प्रसार को रोकने के लिये लागू किये गए देशव्यापी लॉकडाउन के मद्देनज़र मार्च, 2020 के अंत से ही बड़ी संख्या में औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान और संस्थान सही ढंग से संचालित नहीं हो पा रहे हैं।
  • संचालित न होने के कारण सीधा प्रभाव इन संस्थानों और प्रतिष्ठान के उत्पादन पर पड़ा है। 
  • हालाँकि देशव्यापी लॉकडाउन की समाप्ति के बाद से औद्योगिक गतिविधियाँ अब पुनः शुरू हो रही हैं, किंतु हालिया आँकड़ों से पता चलता है कि मई और जून माह में देखी गई तेज़ रिकवरी अब कुछ हद तक सपाट होती जा रही है, इसका मुख्य कारण विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा स्थानीय स्तर पर लागू किये गए लॉकडाउन हो सकते हैं। इन्ही बाधाओं के कारण आर्थिक गतिविधियों की क्रमिक रिकवरी संभव नहीं हो पा रही है।

निहितार्थ

  • औद्योगिक उत्पादन में हो रही गिरावट जुलाई माह के अन्य सभी संकेतकों जैसे रोज़गार और विनिर्माण आदि के अनुरूप ही है।
    • आईएचएस मार्किट इंडिया (IHS Markit India) द्वारा जारी मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, जुलाई 2020 में विनिर्माण क्षेत्र के ‘क्रय प्रबंधक सूचकांक’ (Purchasing Manager's Index- PMI) में गिरावट दर्ज की गई थी। जुलाई 2020 में  क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) 46 अंक पर पहुँच गया था, जबकि जून माह में यह 47.2 अंक पर था।
    • ध्यातव्य है कि इस सूचकांक में 50 से अधिक अंक विस्तार का संकेत देते हैं, जबकि 50 से कम अंक संकुचन का संकेत देते हैं।
  • अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने की प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है, क्योंकि जुलाई और अगस्त माह में भी सभी आर्थिक संकेतक सपाट ही दिखाई दे रहे हैं।
  • वितीय वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही के पहले माह यानी जुलाई में औद्योगिक उत्पादन में हो रहा संकुचन, वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) संबंधी आँकड़ों को भी प्रभावित करेगा।
    • ध्यातव्य है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में देश की GDP में 23.9 प्रतिशत का संकुचन दर्ज किया गया है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक

  • यह सूचकांक अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि खनिज खनन, बिजली, विनिर्माण आदि के विकास का विवरण प्रस्तुत करता है।
  • इसके अंतर्गत किसी समीक्षाधीन अवधि, आमतौर पर कोई विशिष्ट माह, के दौरान औद्योगिक उत्पादन और क्षेत्र विशिष्ट के प्रदर्शन को मापा जाता है।
  • इसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), द्वारा मासिक रूप से संकलित और प्रकाशित किया जाता है।
  • इसे अर्थव्यवस्था के विनिर्माण क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक संकेतक माना जाता है।
  • जिस माह के लिये इस सूचकांक की गणना की जा रही है उसकी समाप्ति के बाद सूचकांक संबंधी डेटा के प्रकाशन में छह सप्ताह का अंतराल होता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस




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