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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

सऊदी अरब के विदेश मंत्री की यात्रा

  • 21 Sep 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सऊदी अरब की भौगोलिक स्थिति, अल-मोहद अल-हिंदी अभ्यास

मेन्स के लिये:

भारत-सऊदी अरब संबंध का महत्त्व और संबंधित चुनौतियाँ 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री से मुलाकात की।

Saudi-Arabia

प्रमुख बिंदु 

  • वार्ता के बारे में:
    • बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: दोनों ने संयुक्त राष्ट्र, G-20 और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) जैसे बहुपक्षीय मंचों में द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की।
      • भारत GCC का सदस्य नहीं है।
    • सामरिक भागीदारी परिषद समझौते का कार्यान्वयन (2019 में हस्ताक्षरित):
      • रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर समन्वय के लिये भारत-सऊदी रणनीतिक साझेदारी परिषद का गठन किया गया था।
        • परिषद का नेतृत्व प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मो. हम्माद करेंगे और हर दो साल में इसकी बैठक होगी।
      • ब्रिटेन, फ्राँस और चीन के बाद भारत चौथा देश है जिसके साथ सऊदी अरब ने इस तरह की रणनीतिक साझेदारी की है।
      • सऊदी अरब 2010 में रियाद घोषणा पर हस्ताक्षर करने के बाद से भारत का रणनीतिक भागीदार रहा है।
    • अफगानिस्तान और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान: सऊदी अरब, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के साथ तालिबान शासन का प्रमुख समर्थक था, तालिबान ने अमेरिका के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सैनिकों द्वारा हटाए जाने तक वर्ष 1996 से 2001 के मध्य काबुल पर शासन किया था।
    • साझेदारी को मज़बूत करना: इस दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, संस्कृति, कांसुलर मुद्दों, स्वास्थ्य देखभाल और मानव संसाधन में उनकी साझेदारी को मज़बूत करने के लिये आगे के कदमों पर चर्चा की गई।
  • भारत-सऊदी अरब संबंध:
    • कच्चा तेल आपूर्तिकर्त्ता: सऊदी अरब वर्तमान में भारत को कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है (इराक शीर्ष आपूर्तिकर्त्ता है)।
      • सऊदी अरब कर्नाटक के पादुर में सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) के निर्माण में भूमिका निभाने का इच्छुक है।
      • सऊदी अरामको, संयुक्त अरब अमीरात के एडनोक और भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा महाराष्ट्र के रायगढ़ में दुनिया की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी की स्थापना के लिये अध्ययन किया जा रहा है
    • द्विपक्षीय व्यापार: सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार (चीन, अमेरिका और जापान के बाद) है। वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान द्विपक्षीय व्यापार 33.07 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था।
      • इसी अवधि के दौरान सऊदी अरब से भारत का आयात 26.84 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया और सऊदी अरब को निर्यात 6.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 12.18% की वृद्धि दर्ज की गई है।
    • भारतीय प्रवासी: सऊदी अरब में 2.6 मिलियन भारतीय प्रवासी समुदाय सऊदी का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है और उनकी विशेषज्ञता, अनुशासन की भावना, कानून का पालन करने और शांतिप्रिय प्रकृति के कारण 'सबसे पसंदीदा समुदाय' है।
    • सांस्कृतिक संबंध: हज यात्रा भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय संबंधों का एक अन्य महत्त्वपूर्ण घटक है।
    • नौसेना अभ्यास: हाल ही में भारत और सऊदी अरब ने अल-मोहद अल-हिंदी अभ्यास नामक अपना पहला नौसेना संयुक्त अभ्यास शुरू किया।

आगे की राह 

  • भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापार संतुलन सऊदी अरब के पक्ष में अधिक है और भारत का निर्यात मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र तक ही सीमित है। व्यापार को अपने पक्ष में संतुलित करने के लिये भारत को अपने उत्पाद आधार को बढ़ाने की आवश्यकता है।
    • द्विपक्षीय सहयोग के अगले चरण के लिये संभावित क्षेत्र बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा, कौशल और आईटी हो सकते हैं।
  • इसके अलावा भारत को सऊदी अरब को अफगानिस्तान में तालिबान को नियंत्रित करने के लिये पाकिस्तान पर अपने प्रभाव का प्रयोग करने के लिये राजी करना चाहिये।
    • दोनों अर्थव्यवस्थाओं का संयुक्त सहयोगात्मक प्रयास दक्षिण-पश्चिम एशिया उप-क्षेत्र को रूपांतरित कर देगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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