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राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति

  • 12 Nov 2020
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति, शैक्षणिक क्रेडिट बैंक, प्रयोगात्मक शिक्षा,  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, ग्रामीण उद्यमिता जागरूकता विकास योजना

मेन्स के लिये: 

पहली राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति

चर्चा में क्यों?

पहली राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति फसल विज्ञान, मत्स्य पालन, पशु चिकित्सा और डेयरी प्रशिक्षण और अनुसंधान पर केंद्रित 74 विश्वविद्यालयों के लिये कई प्रवेश और निकास विकल्पों के साथ शैक्षणिक ऋण बैंकों और डिग्री कार्यक्रमों को प्रभाव में ला रही है।

मुख्य बिंदु:

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy-NEP), 2020 के जारी होने के बाद, राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति तैयार करने की प्रक्रिया लगभग दो महीने पहले शुरू की गई थी।
  • इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री ने कृषि शिक्षा को माध्यमिक विद्यालय स्तर तक ले जाने के लिये कहा था, NEP, 2020 में इस संबंध में आवश्यक सुधार किये गए हैं।

कृषि शिक्षा नीति को NEP, 2020 के साथ जोड़ा जाना है:

  • शैक्षणिक क्रेडिट बैंक (Academic Credit Banks):
    • यह बैंक बहु प्रवेश और बहु निकास के सिद्धांत पर कार्य करेगा। इसके साथ ही यह विद्यार्थी को कभी भी, कहीं भी और किसी भी स्तर पर पढ़ाई की स्वतंत्रता देगा।
    • यह बैंक राष्ट्रीय शैक्षणिक संग्रह स्थान (National Academic Depository) के साथ मिलकर कार्य करेगा।
    • यहाँ पर विद्यार्थी अपने क्रेडिट को जमा और ज़रूरत पड़ने पर उनको हस्तांतरित या भुना भी सकेंगे।
    • NAC बैंक में खाता खुलवाना अनिवार्य नहीं होगा। यह पूरी तरह से विद्यार्थी के ऊपर निर्भर है कि वह खाता खुलवाए या नहीं।
  • प्रयोगात्मक शिक्षा (Experiential Education):
    • भारत में, कृषि शिक्षा अपने समय से पहले ही आगे है जिसे पहले से ही NEP में समाहित किया गया है। NEP में प्रायोगिक शिक्षा का उल्लेख है जबकि कृषि शिक्षा में वर्ष 2016 से ही यह अनिवार्य है।
      • प्रायोगिक शिक्षा, एक शिक्षण दर्शन है जो बहुआयामी कार्यप्रणाली को सूचित करता है जिसमें शिक्षक ज्ञान को बढ़ाने, कौशल विकसित करने, मूल्यों को स्पष्ट करने और अपने समुदायों में योगदान करने की लोगों की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य शामिल हैं।
      • ग्रामीण उद्यमिता जागरूकता विकास योजना (Rural Entrepreneurship Awareness Development Yojana-  READY) कार्यक्रम में सभी छात्रों को छह महीने की इंटर्नशिप करने की आवश्यकता होती है, जो आमतौर पर अपने चौथे वर्ष में प्रशिक्षण, ग्रामीण जागरूकता, उद्योग के अनुभव, अनुसंधान विशेषज्ञता और उद्यमिता कौशल हासिल करने के लिये की जाती है।
    • एक बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि अगर हम बहु प्रवेश-निकास प्रणाली को लागू करते हैं तो प्रायोगिक ज्ञान सभी छात्रों के लिये कैसे सुनिश्चित करेंगे।
      • प्रवेश और निकास का विकल्प छात्रों को डिप्लोमा अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है, जिस समय उन्हें अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने और एक पूर्ण कॉलेज की डिग्री अर्जित करने में सक्षम होने का विकल्प दिया जाता है।

मुद्दे:

  • बहुविषयकता की चुनौती (Challenge of Multidisciplinarity):
    • कृषि विश्वविद्यालयों को भूमि अनुदान पैटर्न पर तैयार किया गया है, जिसमें अनुसंधान और विस्तार तथा गहरे सामुदायिक संपर्क पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो इस दर्शन से प्रेरित है कि किसानों को उनकी समस्याओं के समग्र समाधान की आवश्यकता है।
    • हालाँकि, हाल के वर्षों में, बागवानी, पशु चिकित्सा विज्ञान और मत्स्य विज्ञान में कई क्षेत्र के विशिष्ट विश्वविद्यालय (Domain Specific Universities) सामने आए हैं। इन हालत में मानविकी और सामाजिक विज्ञान को शामिल करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से संबंध:
    • कृषि शिक्षा राज्य सूची का विषय है, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research- कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय) देश भर में शिक्षा की गुणवत्ता के लिये ज़िम्मेदार है और उम्मीद करता है कि NEP द्वारा प्रस्तावित उच्च शिक्षा विनियमन (Higher Education Regulation) की नई प्रणाली के तहत एक मानक-व्यवस्था (Standards-Setting) जारी रहने की उम्मीद है।

स्रोत:द हिंदू

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