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एमपीलैड कार्यक्रम

  • 18 Mar 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में गोवा की ग्राम पंचायतों में ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ (Members of Parliament Local Area Development Scheme- MPLADS) की धनराशि वितरित की गई है ।

  • वर्तमान में MPLADS फंड योजना ( कोविड-19 महामारी के कारण) जिसके अंतर्गत महामारी से पूर्व निर्धारित धनराशि का आवंटन किया जाना था, निलंबित है। 

प्रमुख बिंदु:

MPLAD के बारे में:

  • MPLAD एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसकी घोषणा दिसंबर 1993 में की गई थी।
  • प्रारंभ में इसका क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) के अंतर्गत किया गया जिसे अक्तूबर 1994 में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) को स्थानांतरित कर दिया गया।

कार्य पद्धति: 

  • MPLADS के तहत संसद सदस्यों (Member of Parliaments- MPs) को  प्रत्येक वर्ष 2.5 करोड़ रुपए की दो किश्तों में 5 करोड़ रुपए की राशि वितरित की जाती है। MPLADS के तहत आवंटित राशि नॉन-लैप्सेबल (Non-Lapsable) होती है।  
  • लोकसभा सांसदों से इस राशि को अपने लोकसभा क्षेत्रों में ज़िला प्राधिकरण परियोजनाओं (district authorities projects) में व्यय करने की सिफारिश की जाती है, जबकि राज्यसभा संसदों द्वारा इस राशि का उपयोग उस राज्य क्षेत्र में किया जाता है जहाँ से वे चुने गए हैं।  
  • राज्यसभा और लोकसभा के मनोनीत सदस्य देश में कहीं भी कार्य करने की सिफारिश कर सकते हैं।

MPLADS

प्राथमिक परियोजनाएँ:

  • इन परियोजनाओं में पीने के पानी की सुविधा, प्राथमिक शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य स्वच्छता और सड़कों आदि का निर्माण किया जाना शामिल है।
  • जून 2016 से MPLAD फंड का उपयोग स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan), सुगम्य भारत अभियान (Sugamya Bharat Abhiyan), वर्षा जल संचयन के माध्यम से जल संरक्षण और संसद आदर्श ग्राम योजना (Sansad Aadarsh Gram Yojana) आदि योजनाओं के कार्यान्वयन में भी किया जाता है।

आलोचना:

  • कार्यान्वयन में चूक: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor-General of India- CAG) द्वारा खर्च की गई राशि के वित्तीय कुप्रबंधन और  कृत्रिम मुद्रास्फीति के उदाहरणों को चिह्नित किया गया है
  • वैधानिक समर्थन नहीं: इस योजना को किसी भी सांविधिक कानून द्वारा विनियमित नहीं किया जाता है, बल्कि इसका क्रियान्वयन तत्कालीन सरकार की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है।
  • निगरानी और विनियमन: यह  योजना विकास में भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु शुरू की गई थी लेकिन भागीदारी के स्तर को मापने के लिये कोई संकेतक उपलब्ध नहीं है।
  • संघवाद का उल्लंघन: MPLADS स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के क्षेत्र का अतिक्रमण करता है जो संविधान के भाग IX और IX-A का उल्लंघन है।
  • शक्तियों के पृथक्करण सिद्धांत से टकराव: संसद सदस्यों का कार्यकारी कार्यों (Executive Functions) में हस्तक्षेप बढ़ रहा है।

संवैधानिकता पर बहस:

  • संविधान की कार्यप्रणाली की समीक्षा हेतु राष्ट्रीय आयोग, 2002: आयोग द्वारा MPLADS योजना को इस आधार पर तत्काल बंद करने की सिफारिश की गई कि यह केंद्र और राज्य के मध्य संघवाद और शक्तियों के वितरण के मामले में तर्कसंगत नहीं है। 
  • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्ट "शासन में नीतिशास्त्र", 2005: रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना शक्तियों के पृथक्करण की धारणा को गंभीरता से प्रभावित करती है, क्योंकि इसके तहत विधायिका प्रत्यक्ष तौर पर कार्यकारी शक्तियाँ और भूमिका ग्रहण कर लेती है।
  • वर्ष 2010 में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: सर्वोच्च न्यायालय के पांँच-न्यायाधीशों वाली पीठ ने फैसला सुनाया है कि शक्तियों के पृथक्करण की अवधारणा का उल्लंघन नहीं हुआ क्योंकि इस मामले में एक सांसद की भूमिका अनुशंसात्मक है और वास्तविक कार्य पंचायतों तथा नगरपालिकाओं द्वारा किया जाता है जो कि कार्यपालिका के  अंग है 

स्रोत: पी.आई.बी

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