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मौद्रिक नीति रिपोर्ट: भारतीय रिज़र्व बैंक

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  • 10 Aug 2021
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

मौद्रिक नीति रिपोर्ट, मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रयुक्त प्रमुख शब्दावलियाँ, मौद्रिक नीति समिति

मेन्स के लिये:

मौद्रिक नीति समीक्षा का उद्देश्य

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2021 के महीने के लिये मौद्रिक नीति रिपोर्ट (Monetary Policy Report- MPR) जारी की है।

  • इसने लगातार सातवीं बार नीतिगत दर को अपरिवर्तित रखा और केंद्र तथा राज्यों से मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के लिये ईंधन पर कर कम करने की अपील की।

मौद्रिक नीति रिपोर्ट

  • MPR को RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • MPC विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिये RBI अधिनियम, 1934 के तहत एक वैधानिक और संस्थागत ढाँचा है।
  • MPC, 4% के मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये आवश्यक नीति ब्याज दर (रेपो दर) निर्धारित करती है, जिसमें दोनों तरफ 2% अंक होते हैं।
  • RBI का गवर्नर MPC का पदेन अध्यक्ष है।

प्रमुख बिंदु

अपरिवर्तित रेट/दर:

  • रेपो दर - 4%.
  • रिवर्स रेपो दर - 3.35%.
  • सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) - 4.25%.
  • बैंक दर- 4.25%.

GDP आकलन:

  • वर्ष 2021-22 के लिये वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 9.5% पर बरकरार रखी गई है।

मुद्रास्फीति:

  • RBI ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1% से संशोधित कर 5.7% कर दिया है। 

परिवर्तनीय दर प्रतिवर्ती रेपो (Variable Rate Reverse Repos):

  • अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने के लिये RBI ने फिक्स्ड रेट ओवरनाइट रिवर्स रेपो की तुलना में अधिक यील्ड की संभावनाओं के कारण एक परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की।
    • RBI ने चरणबद्ध तरीके से VRRR के तहत राशि को बढ़ाकर 4 लाख करोड़ रुपए करने का फैसला किया है।
  • इसने तनावग्रस्त व्यवसायों को ऋण देने के लिये बैंकों को तरलता सहायता अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2021 कर दिया।

ब्याज़ दर:

  • मुद्रास्फीति का ऊँचा स्तर और अर्थव्यवस्था में देरी से सुधार ने पैनल को दरों को स्थिर रखने के लिये प्रेरित किया है। बैंकिंग प्रणाली में ब्याज दरें अगले कुछ महीनों में स्थिर रहने की आशा है।
    • राज्यों में कोविड की दूसरी लहर और लॉकडाउन के कारण रिकवरी की खराब स्थिति का सामना करना पड़ा

अनुकूल रुख:

  • इसने टिकाऊ आधार पर विकास को पुनर्जीवित करने और बनाए रखने के लिये आवश्यक लंबे समय तक एक समायोजन रुख को जारी रखने का फैसला किया और अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के प्रभाव को कम करना जारी रखा, जबकि यह भी सुनिश्चित किया कि मुद्रास्फीति आगे बढ़ने वाले लक्ष्य के भीतर बनी रहे।
    • एक उदार रुख का अर्थ है कि एक केंद्रीय बैंक ज़रूरत पड़ने पर वित्तीय प्रणाली में पैसा लगाने के लिये दरों में कटौती करेगा।

रिकवरी के लिये आशावाद:

  • लचीली मांग:
    • संक्रमण की दूसरी लहर के बाद त्वरित टीकाकरण से घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार देखा गया।
  • आर्थिक पैकेज:
    • हालाँकि निवेश की मांग अभी भी कमज़ोर है, क्षमता उपयोग में सुधार, इस्पात की बढ़ती खपत, पूंजीगत वस्तुओं के उच्च आयात, अनुकूल मौद्रिक और वित्तीय स्थिति तथा केंद्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेजों से लंबे समय से प्रतीक्षित पुनरुद्धार कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
  • उच्च आवृत्ति संकेतक:
    • उच्च आवृत्ति संकेतक (बिजली की खपत, रात्रि प्रकाश की तीव्रता और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड उत्सर्जन) सुझाव देते हैं कि उपभोग (निजी और सरकारी दोनों), निवेश और बाहरी मांग सभी आकर्षण का केंद्र हैं।

चिंताएँ:

  • मुद्रास्फीति प्रबंधन एक गंभीर चुनौती पेश कर सकता है जब ईंधन की ऊँची कीमत पास-थ्रू होने लगती है तो इस प्रकार के मुद्रास्फीति परिवर्तन के परिभाषित रूप से  अस्थायी होने की संभावना नहीं होती।

सुझाव:

  • कर में कमी द्वारा : 
    • कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर होने से केंद्र और राज्यों द्वारा पंप की कीमतों के अप्रत्यक्ष कर घटक की एक अंशांकित कमी, लागत दबाव को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती है। 
  • आर्थिक प्रोत्साहन: 
    • आर्थिक गतिविधियों पर तेज़ी के बावजूद यह महत्त्वपूर्ण है कि सरकार द्वारा उपभोग पर ज़ोर देने के लिये प्रोत्साहन प्रदान किया जाए। इस तरह के उपायों के लिये इस समय यह उपयुक्त होगा क्योंकि फेस्टिवल सीज़न शुरू होने वाला है।
  • नीति उपयोग: 
    • राजकोषीय, मौद्रिक और क्षेत्रीय नीति उत्तोलक के माध्यम से प्रारंभिक और लंबित बहाली को पोषित करने की आवश्यकता है। 

महत्त्वपूर्ण मामले

रेपो और रिवर्स रेपो दर:

  • रेपो दर वह दर है जिस पर किसी देश का केंद्रीय बैंक (भारत के मामले में भारतीय रिज़र्व बैंक) किसी भी तरह की धनराशि की कमी होने पर वाणिज्यिक बैंकों को धन देता है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक प्रतिभूति खरीदता है।
  • रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर RBI देश के भीतर वाणिज्यिक बैंकों से धन उधार लेता है।

बैंक दर:

  • यह वाणिज्यिक बैंकों को निधियों को उधार देने के लिये RBI द्वारा प्रभारित दर है।

सीमांत स्थायी दर (MSF):

  • MSF ऐसी स्थिति में अनुसूचित बैंकों के लिये आपातकालीन स्थिति में RBI से ओवरनाइट ऋण लेने की सुविधा है जब अंतर-बैंक तरलता पूरी तरह से कम हो जाती है।
  • अंतर-बैंक ऋण के तहत बैंक निर्दिष्ट अवधि के लिये एक-दूसरे को धन उधार देते हैं।

मुद्रास्फीति:

  • मुद्रास्फीति का तात्पर्य दैनिक या आम उपयोग की अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि से है, जैसे कि भोजन, कपड़े, आवास, मनोरंजन, परिवहन, उपभोक्ता स्टेपल इत्यादि।
  • मुद्रास्फीति समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की बास्केट में औसत मूल्य परिवर्तन को मापती है।
  • मुद्रास्फीति किसी देश की मुद्रा की एक इकाई की क्रय शक्ति में कमी का संकेत है। इससे अंततः आर्थिक विकास में मंदी आ सकती है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक:

  • यह खुदरा खरीदार के दृष्टिकोण से मूल्य परिवर्तन को मापता है। यह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किया जाता है।
  • CPI खाद्य, चिकित्सा देखभाल, शिक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में अंतर की गणना करता है, जिन्हें भारतीय उपभोक्ता द्वारा उपभोग के लिये खरीदा जाता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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