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जैवविविधता और पर्यावरण

अटलांटिक मेरिडिनल ओवरटर्निंग करंट

  • 10 Aug 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये 

अटलांटिक मेरिडिनल ओवरटर्निंग करंट, कोरिओलिस प्रभाव, अंटार्कटिक सर्कम्पोलर करंट , अल नीनो

मेन्स के लिये 

अटलांटिक मेरिडिनल ओवरटर्निंग करंट कम होते प्रभाव का परिणाम

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जारी IPCC की रिपोर्ट के अनुसार, अटलांटिक मेरिडिनल ओवरटर्निंग करंट (AMOC) अपनी स्थिरता खो रहा है और 21वीं सदी में इसके कम होने की संभावना है।

  • महासागर में  हवा, ज्वार, पृथ्वी के घूर्णन (कोरिओलिस प्रभाव), सूर्य (सौर ऊर्जा) और जल घनत्व अंतर एक अंतःस्थापित धारा या परिसंचरण द्वारा संचालित प्रणाली है।

प्रमुख बिंदु

AMOC के बारे में:

  • यह महासागरीय धाराओं की एक बड़ी प्रणाली है।
  • यह महासागरीय कन्वेयर बेल्ट या थर्मोहैलाइन सर्कुलेशन (THC) की अटलांटिक शाखा है और दुनिया भर की महासागरीय घाटियों में ऊष्मा तथा पोषक तत्त्व वितरित करती है।

AMOC के कार्य:

  • AMOC उष्ण कटिबंध से उत्तरी गोलार्द्ध की ओर गर्म सतही जल ले जाता है, जहाँ  यह ठंडा होकर समाहित हो जाता है।
  • यह फिर उष्णकटिबंधीय और उसके बाद दक्षिण अटलांटिक में नीचे की धारा के रूप में वापस आता है। वहाँ से इसे अंटार्कटिक सर्कम्पोलर करंट के माध्यम से सभी महासागरीय घाटियों में वितरित किया जाता है।
    • अंटार्कटिक सर्कम्पोलर धारा (Antarctic Circumpolar Current) दक्षिणी महासागर की सबसे महत्त्वपूर्ण धारा है, यह एकमात्र धारा है जो पृथ्वी के चारों ओर बहती है ।

AMOC की गिरावट के निहितार्थ:

  • AMOC और गल्फ स्ट्रीम के कमज़ोर पड़ने से यूरोप को भीषण ठंड का सामना करना होगा।
    • गल्फ स्ट्रीम (गर्म धारा), AMOC का एक हिस्सा, यह उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट के साथ-साथ यूरोप की जलवायु के लिये एक ज़िम्मेदार कारक है।
  • AMOC के कमज़ोर होने से उत्तरी गोलार्द्ध ठंडा हो जाएगा तथा यूरोप में वर्षा कम होगी।
  • इसका प्रभाव अल नीनो पर भी पड़ सकता है।
    • अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से तापन की स्थिति को दर्शाता है।
  • यह दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में भी मानसून को स्थानांतरित कर सकता है।

कारण

  • जलवायु मॉडल ने लंबे समय से भविष्यवाणी की है कि ग्लोबल वार्मिंग दुनिया की प्रमुख महासागर प्रणालियों के कमज़ोर होने का कारण बन सकता है।
  • ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर के पिघलने से ताज़े पानी का प्रवाह।
    • जुलाई 2021 में शोधकर्त्ताओं ने देखा कि आर्कटिक की बर्फ का एक हिस्सा जिसे "लास्ट आइस एरिया" कहा जाता है, भी पिघल गया है।
    • पिघलने वाली बर्फ से निर्मित ताज़ा जल दूसरे जल की लवणता और घनत्व को कम करता है।
    • अब पानी पहले की तरह बहने में असमर्थ है और AMOC प्रवाह को कमज़ोर करता है।
  • यह हिंद महासागर में भी AMOC को धीमा करने में मदद कर सकता है।
  • बढ़ती वर्षा और नदी अपवाह।

AMOC का महत्त्व:

  • यह दुनिया भर में गर्मी के पुनर्वितरण और मौसम के पैटर्न को नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चिंताएँ:

  • AMOC की गिरावट केवल एक उतार-चढ़ाव या बढ़ते तापमान के साथ एक रैखिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है एक महत्त्वपूर्ण सीमा तक पहुँचना जिसके आगे संचलन प्रणाली बाधित हो सकती है।

 महासागरीय धाराएँ:

परिचय:

  • महासागरीय धाराएँ समुद्र की सतह पर और गहरे पानी में 300 मीटर से नीचे स्थित होती हैं। ये जल को क्षैतिज और लंबवत रूप से स्थानांतरित कर सकती हैं तथा स्थानीय एवं वैश्विक दोनों पैमानों पर उत्पन्न हो सकती हैं।

सतही धाराएँ:

  • महासागर में सतही धाराएँ वैश्विक पवन प्रणालियों द्वारा संचालित होती हैं जो सूर्य की  ऊर्जा द्वारा संचालित होती हैं। सतही धाराओं का पैटर्न, वायु की दिशा, पृथ्वी के घूर्णन से कोरिओलिस बलों और भू-आकृतियों की स्थिति से निर्धारित होता है।
  • सतही वायु से चलने वाली धाराएँ भू-आकृतियों के साथ ऊपर की ओर उठती धाराएँ उत्पन्न करती हैं, जिससे गहरे पानी की धाराएँ बनती हैं।
    • अपवेलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें गहरा, ठंडा पानी सतह की ओर ऊपर उठता है।
  • अमेरिका के पूर्वी तट के साथ गल्फ स्ट्रीम भूमध्यरेखीय क्षेत्र से उत्तरी अटलांटिक महासागर तक गर्म पानी ले जाती है, जिससे दक्षिण-पूर्वी तट अपेक्षाकृत गर्म रहता है।
    • अमेरिका के पश्चिमी तट के साथ कैलिफ़ोर्निया धारा ध्रुवीय क्षेत्र से दक्षिण की ओर ठंडा जल ले जाती है, जिससे पश्चिमी तट, पूर्वी तट की तुलना में अपेक्षाकृत ठंडा रहता है।
  • घूर्णन (Gyre), एक विशाल गोलाकार प्रणाली है जो समुद्र की धाराओं से बनी होती है जो सर्पिल होती है।
    • जैसे अटलांटिक महासागर में गल्फ स्ट्रीम-नॉर्थ अटलांटिक-नॉर्वे करंट और प्रशांत महासागर में कुरोशियो-नॉर्थ पैसिफिक धारा।

Current-Wave

गहरे पानी की धाराएँ:

  • तापमान (थर्मो) और लवणता (हलाइन) भिन्नताओं के कारण पानी के द्रव्यमान में घनत्व अंतर के कारण भी धाराएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिसे थर्मोहेलिन परिसंचरण के रूप में जाना जाता है।
  • ये धाराएँ अपने साथ पोषक तत्त्व, ऑक्सीजन और ऊष्मा को गहरे समुद्र में पानी के द्रव्यमान में ले जाती हैं।

कन्वेयर बेल्ट:

  • समुद्र के पानी में घनत्व अंतर वैश्विक स्तर पर परिसंचरण प्रणाली में योगदान देता है जिसे वैश्विक कन्वेयर बेल्ट भी कहा जाता है। इसमें सतह और गहरे समुद्र की धाराएँ शामिल हैं जो 1,000 वर्ष के चक्र में दुनिया का चक्कर लगाती हैं।
  • वैश्विक कन्वेयर बेल्ट का संचलन एक साथ दो प्रक्रियाओं का परिणाम है: गर्म सतह की धाराएँ कम घने पानी को भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर ले जाती हैं और ठंडी गहरी समुद्री धाराएँ ध्रुवों से दूर भूमध्य रेखा की ओर सघन पानी ले जाती हैं।
  • महासागर की वैश्विक परिसंचरण प्रणाली गर्मी, ऊर्जा के वितरण, मौसम एवं जलवायु को विनियमित करने और पोषक तत्त्वों तथा गैसों के चक्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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