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भारतीय अर्थव्यवस्था

कोरोना की दूसरी लहर के बाद आर्थिक राहत पैकेज

  • 29 Jun 2021
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भारत नेट, डिजिटल इंडिया, राजकोषीय घाटा, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना, उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम 

मेन्स के लिये:

उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम के  पुनरुद्धार से भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव  

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वित्त मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों को राहत प्रदान करने के लिये कई उपायों की घोषणा की।

  • इस राहत पैकेज का उद्देश्य आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिये स्वास्थ्य प्रणालियों को तैयार करना और विकास तथा रोज़गार के लिये प्रोत्साहन प्रदान करना है। हालाँकि भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पैकेज राजकोषीय घाटे में 0.6% की वृद्धि करेगा।
  • कुल 17 उपायों के साथ इस आर्थिक राहत पैकेज में 6,28,993  करोड़ रुपए की राशि की घोषणा की गई है।

ARM

प्रमुख बिंदु:

महामारी से निपटने हेतु आर्थिक राहत:

  • कोरोना प्रभावित क्षेत्रों के लिये ऋण गारंटी योजना:
    • व्यवसायों को 1.1 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त ऋण मिलेगा। इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये 50,000 करोड़ रुप और पर्यटन सहित अन्य क्षेत्रों के लिये 60,000 करोड़ रुपए शामिल हैं।
      • स्वास्थ्य क्षेत्र के घटक का उद्देश्य कम सेवा वाले क्षेत्रों (अर्थात् गैर-महानगरीय क्षेत्रों) को लक्षित करते हुए चिकित्सा बुनियादी ढाँचे को बढ़ाना है।
    • गारंटी कवरेज: विस्तार के लिये 50% और नई परियोजनाओं के लिये 75% का प्रावधान है।
      • आकांक्षी ज़िलों के लिये नई परियोजनाओं और विस्तार दोनों के लिये 75% का गारंटी कवर उपलब्ध होगा।
    • योजना के तहत स्वीकार्य अधिकतम ऋण 100 करोड़ रुपए और गारंटी अवधि 3 वर्ष तक की होगी।
  • आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना:
  • सूक्ष्म वित्त संस्थानों हेतु ऋण गारंटी योजना
    • यह एक नई योजना है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFIs) के नेटवर्क की सेवा प्राप्त करने वाले छोटे-से-छोटे उधारकर्त्ताओं को लाभ पहुँचाना है।
    • इसके तहत लगभग 25 लाख छोटे उधारकर्त्ताओं को 1.25 लाख रुपए तक के ऋण उपलब्ध कराए जाने पर नए या मौजूदा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी या सूक्ष्म वित्त संस्थानों को ऋण देने के लिये अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को गारंटी प्रदान की जाएगी।
  • आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना का विस्तार
    • ‘आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना’ कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से नए रोज़गार के सृजन और रोज़गार के नुकसान की भरपाई के लिये नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करती है।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
    • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के तहत लाभार्थियों को मई-नवंबर 2021 के दौरान प्रतिमाह 5 किलो खाद्यान्न मुफ्त प्रदान किया जाएगा।

सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना:

  •  बच्चों और बाल चिकित्सा देखभाल हेतु नई योजना:
    • तकरीबन 23,220 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी अवसंरचना और मानव संसाधन को मज़बूती प्रदान करने के लिये एक नई योजना की भी घोषणा की गई है।
    • यह बच्चों और बाल चिकित्सा देखभाल पर विशेष ज़ोर देने के साथ अल्पकालिक आपातकालीन तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

वृद्धि एवं रोज़गार

  • 5 लाख पर्यटकों को एक महीने का मुफ्त पर्यटक वीज़ा।
  • डीएपी सहित पीएंडके उर्वरकों के लिये अतिरिक्त सब्सिडी।
  • क्लाइमेट रेसिलिएंट स्पेशल कैरेक्टरिस्टिक वेरायटीज़
    • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने प्रोटीन, आयरन, जिंक, विटामिन-A जैसे उच्च पोषक तत्त्वों वाली बायोफोर्टिफाइड फसल किस्मों को विकसित किया है।
    • ये किस्में रोगों, कीटों, सूखा, लवणता और बाढ़ के प्रति सहिष्णु हैं तथा जल्दी ही परिपक्व होती हैं एवं यांत्रिक कटाई के लिये उपयुक्त हैं।
    • चावल, मटर, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, क्विनोआ, बकव्हीट, विंग्ड बीन, अरहर और ज्वार की 21 ऐसी किस्में राष्ट्र को समर्पित की जाएंगी।
  • उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम का पुनरुद्धार:
    • उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (North Eastern Regional Agricultural Marketing Corporation- NERAMAC) को 77.45 करोड़ रुपए का पुनरुद्धार पैकेज प्रदान किया जाएगा।
    • NERAMAC ने उत्तर-पूर्व की 13 फसलों को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication- GI) के पंजीकरण की सुविधा प्रदान की है।
    • इसने बिचौलियों/एजेंटों को दरकिनार कर किसानों को 10-15 फीसदी अधिक कीमत देने की योजना तैयार की है।
    • इसमें उद्यमियों को इक्विटी वित्त की सुविधा प्रदान करने हेतु जैविक खेती के लिये उत्तर-पूर्वी केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
  • परियोजना निर्यात को बढ़ावा:
    • 5 वर्षों में राष्ट्रीय निर्यात बीमा खाते (National Export Insurance Account- NEIA) में एक अतिरिक्त कोष प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। परियोजना के निर्यात हेतु इस कोष में 33,000 करोड़ रुपए की राशि के लिये हस्ताक्षर किये गए हैं।
      • NEIA ट्रस्ट जोखिम को कम करने के उद्देश्य से मध्यम और दीर्घकालिक (Medium and Long Term- MLT) परियोजना निर्यात को बढ़ावा देता है।
      • यह एक्ज़िम (निर्यात-आयात) बैंक द्वारा कम क्रेडिट-योग्य उधारकर्त्ताओं और सहायक परियोजना निर्यातकों को दिये गए खरीदार के क्रेडिट को कवर प्रदान करता है।
      • यह कम ऋण लेने वाले उधारकर्त्ताओं  को एक्ज़िम बैंक (निर्यात-आयात) के द्वारा दिये गए क्रेडिट को कवर करता है।
  • निर्यात बीमा कवर को बढ़ावा:
    • 5 वर्षों के निर्यात ऋण गारंटी निगम (Export Credit Guarantee Corporation- ECGC) में  इक्विटी डालने का फैसला किया गया है ताकि एक्सपोर्ट इंश्योरेंस कवर को 88,000 करोड़ रुपए से अधिक किया जा सके। 
  • डिज़िटल इंडिया:
    • व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) के आधार पर 16 राज्यों में भारत नेट (Bharat Net) में पीपीपी मॉडल मेको लागू करने हेतु  19,041 करोड़ रुपए अतिरिक्त प्रदान किए जाएंगे।
    • यह सभी ग्राम पंचायतों और गांँवों को कवर करते हुए भारत नेट के विस्तार और उन्नयन को अधिक सक्षम बनाएगा।
  • PLI योजना का विस्तार:
    • बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive- PLI) योजना का कार्यकाल एक वर्ष और अर्थात् वर्ष 2025-26 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
  • सुधार आधारित परिणाम संबद्ध विद्युत वितरण योजना:
  • PPP परियोजना और परिसंपत्ति मुद्रीकरण के लिये नई सुव्यवस्थित प्रक्रिया:
    • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) प्रस्तावों के मूल्यांकन और अनुमोदन के लिये एक नई नीति तैयार की जाएगी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) के माध्यम से कोर इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स का मुद्रीकरण किया जाएगा।
    • नीति का उद्देश्य बुनियादी ढाँचे के निर्माण और प्रबंधन के वित्तपोषण में निजी क्षेत्र की क्षमता को सुविधाजनक बनाने के लिये परियोजनाओं की त्वरित मंज़ूरी सुनिश्चित करना है।

पैकेज का महत्त्व:

  • यह मौद्रिक तरलता को बढ़ाएगा और पर्यटन जैसे रोज़गार-गहन क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने में मदद करेगा।
  • यह आजीविका को बचाने में मदद करेगा और लॉकडाउन के प्रभाव को कम करेगा तथा रोज़गार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
  • यह भविष्य में ऐसी किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के लिये प्रयासों को बढ़ावा देगा।
  • यह कोरोना प्रभावित क्षेत्रों को उन चुनौतियों से उबरने में सक्षम बनाएगा, जिनका वे पिछले डेढ़ वर्ष से सामना कर रहे हैं।
  • छोटे व्यवसायों के लिये प्रदत्त तरलता, अप्रत्यक्ष रूप से उन बड़े उद्योगों को पुनर्जीवित कर सकती है जिनसे वे स्रोत या कच्चा माल प्राप्त करते हैं और बाधित आपूर्ति शृंखलाओं की मरम्मत में मदद करते हैं।

स्रोत:पी.आई.बी 

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