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इंडोनेशिया का पाम ऑयल निर्यात प्रतिबंध और भारत पर इसका प्रभाव

  • 29 Apr 2022
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

इंडोनेशिया का पाम ऑयल निर्यात प्रतिबंध और भारत पर इसका प्रभाव, बायोडीज़ल, खाद्य तेल- तेल पाम पर राष्ट्रीय मिशन

मेन्स के लिये:

कृषि संसाधन, खाद्य सुरक्षा, सरकारी नीतियांँ और हस्तक्षेप

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में इंडोनेशिया जो कि विश्व का सबसे बड़े पाम ऑयल (Palm Oil) उत्पादक, निर्यातक और उपभोक्ता देश है, द्वारा घोषणा की गई है कि वह खाना पकाने के तेल की घरेलू कमी तथा इसकी बढ़ती कीमतों को कम करने हेतु कमोडिटी और इसके कच्चे माल के सभी निर्यातों पर प्रतिबंध लगाएगा।

  • भारत अपनी पाम ऑयल की सालाना ज़रूरत का आधा हिस्सा यानी 8.3 मिलियन टन का आयात इंडोनेशिया से करता है। इस प्रकार इंडोनेशिया द्वारा आरोपित निर्यात प्रतिबंध भारत के हितों को प्रभावित करेगा। 

प्रमुख बिंदु 

पाम ऑयल तथा इसके उपयोग:

  • पाम ऑयल एक खाद्य वनस्पति तेल है जिसे ऑयल पाम फल (Fruit of the Oil Palms) के मेसोकार्प (लाल गूदे) से प्राप्त किया जाता है। 
  • इसका उपयोग खाना पकाने, सौंदर्य प्रसाधन, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, केक, चॉकलेट, स्प्रेड, साबुन, शैम्पू और सफाई उत्पादों से लेकर जैव ईंधन तक हर चीज़ में किया जाता है।
    • बायोडीज़ल (Biodiesel) बनाने में कच्चे पाम ऑयल के इस्तेमाल को 'ग्रीन डीज़ल' करार दिया गया है।
  • इंडोनेशिया और मलेशिया मिलकर वैश्विक पाम ऑयल का लगभग 90% का उत्पादन करते हैं, इसमें भी इंडोनेशिया की हिस्सेदारी अधिक है जिसने वर्ष 2021 में 45 मिलियन टन पाम ऑयल का उत्पादन किया।
  • पाम ऑयल उद्योग आलोचना के दायरे में आ गया है क्योकि इसके निरंतर उत्पादन के कारण वनों की कटाई में वृद्धि हुई है, साथ ही श्रम के शोषणकारी तरीकों के कारण औपनिवेशिक युग जैसी परिस्थिति उत्पन्न हो गई है। 
    • हालांँकि पाम ऑयल को इसलिये भी पसंद किया जाता है क्योंकि यह सस्ता है; सोयाबीन जैसे कुछ अन्य वनस्पति तेल संयंत्रों की तुलना में पाम ऑयल का प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन होता है।

वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं हेतु पाम ऑयल का महत्त्व: 

  • संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, वर्ष 2020 में पाम ऑयल का वैश्विक उत्पादन 73 मिलियन टन (MT) से अधिक होने के साथ ही यह विश्व में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला वनस्पति तेल है।
    • चालू वित्त वर्ष 2022-23 में इसका उत्पादन 77 मीट्रिक टन होने का अनुमान है। 
  • रॉयटर्स के अनुसार, सबसे व्यापक रूप से उपयोग किये जाने वाले चार प्रमुख खाद्य तेलों (पाम, सोयाबीन, रेपसीड (कैनोला) और सूरजमुखी का तेल) की वैश्विक आपूर्ति में पाम ऑयल की हिस्सेदारी  40% है।  
  • वैश्विक रूप से पाम ऑयल की 60% आपूर्ति इंडोनेशिया द्वारा की जाती है।

खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण:

  • भारत पाम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक है। वैकल्पिक वनस्पति तेलों की कम आपूर्ति के कारण मांग बढ़ने से इस वर्ष पाम ऑयल की कीमतों में तेज़ी आई है। 
  • सोयाबीन तेल का दूसरा स्थान है जिसका सबसे अधिक उत्पादन किया जाता है, इसके भी इस साल प्रभावित होने की संभावना है क्योंकि इसके प्रमुख उत्पादक अर्जेंटीना में सोयाबीन उत्पादन हेतु इस बार मौसम अनुकूल नहीं है। 
  • पिछले साल कनाडा में सूखे के कारण कैनोला तेल का उत्पादन प्रभावित हुआ था और सूरजमुखी तेल जिसका 80-90% उत्पादन रूस और यूक्रेन द्वारा किया जाता है, की आपूर्ति जारी संघर्ष के कारण  बुरी तरह प्रभावित हुई है।
  • महामारी से प्रेरित श्रम की कमी तथा महामारी और यूक्रेन संकट से जुड़ी वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति के कारण खाद्य तेल की वैश्विक कीमतों में पिछले साल के अंत से बहुत अधिक वृद्धि हुई है। 

भारत पर प्रभाव:

  • भारत पाम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक है, जो इसके वनस्पति तेल की खपत का 40% हिस्सा है। 
  • भारत अपनी सालाना ज़रूरत का आधा (8.3 मीट्रिक टन) पाम ऑयल इंडोनेशिया से आयात करता है।
  • इससे उन लोगों की संख्या में वृद्धि होगी जो पहले से ही रिकॉर्ड-उच्च थोक मुद्रास्फीति से जूझ रहे हैं।
  • यह महत्त्वपूर्ण है कि पिछले साल केंद्र ने भारत के घरेलू पाम ऑयल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये खाद्य तेल पर राष्ट्रीय मिशन-पाम ऑयल को आरंभ किया। 

आगे की राह 

  • घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना: भारत की खाद्य आवश्यकताओं के लिये  पाम ऑयल  से संबंधित लाभों को देखते हुए, भारतीय किसानों को देश में पाम ऑयल के उत्पादन को बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।
    • इस दिशा में  उठाया गया  खाद्य तेल पर राष्ट्रीय मिशन- पाम ऑयल  एक  सही कदम है।
  • विविधीकरण: भारत को अपनी खरीद के साथ-साथ आवश्यकताओं में भी विविधता लानी चाहिये।
    •  सर्वप्रथम भारत को अन्य देशों से अधिक पाम ऑयल  की खरीद पर ध्यान देना चाहिये।
    • साथ ही साथ  साल, महुआ, जैतून, जटरोफा, नीम, जोजोबा, जंगली खुबानी, अखरोट आदि जैसे वृक्षों से उत्पन्न तिलहन (TBOs) को एक विकल्प के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

स्रोत: द हिन्दू 

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