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नागरिक पंजीकरण प्रणाली में संशोधन

  • 29 Apr 2022
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये:

नागरिक पंजीकरण प्रणाली, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, भारत का महापंजीयक

मेन्स के लिये:

जनसंख्या और संबंधित मुद्दे, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, नागरिक पंजीकरण प्रणाली में संशोधन की आवश्यकता और महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

गृह मंत्रालय की 2020-21 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार न्यूनतम मानव हस्तक्षेप के साथ वास्तविक समय में जन्म और मृत्यु पंजीकरण को सुनिश्चित करने के लिये नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) में सुधार करने की योजना बना रही है। पंजीकरण की यह प्रक्रिया किसी भी स्थान से पूरी की जा सकती है।

  • भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) को जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 3 (3) के तहत सभी राज्यों के जन्म और मृत्यु पंजीकरण कार्यालय के मुख्य रजिस्ट्रार की गतिविधियों के मध्य समन्वय और एकीकरण के लिये कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है।

नागरिक पंजीकरण प्रणाली: 

  • भारत में नागरिक पंजीकरण प्रणाली महत्त्वपूर्ण घटनाओं (जन्म, मृत्यु, प्रसव के दौरान मृत्यु) और उनकी विशेषताओं की निरंतर, स्थायी, अनिवार्य एवं सार्वभौमिक पंजीकरण की एकीकृत प्रक्रिया है।
  • संपूर्ण और अद्यतन सीआरएस के माध्यम से उत्पन्न डेटा सामाजिक-आर्थिक नियोजन के लिये आवश्यक है। 

प्रस्तावित संशोधन: 

  • जन्म और मृत्यु के कारण हुए नए परिवर्तनों को अद्यतन करना: 
    • "जन्म, मृत्यु और प्रवास के कारण हुए परिवर्तनों को शामिल करने के लिये एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) को फिर से अपडेट करने की आवश्यकता है, जिसे पहली बार वर्ष 2010 में जोड़ा गया तथा वर्ष 2015 में आधार, मोबाइल और राशन कार्ड नंबरों के साथ अपडेट किया गया। 
  • सीआरएस के समक्ष विभिन्न चुनौतियाँ: 
  • सीआरएस प्रणाली समयबद्धता, दक्षता और एकरूपता के मामले में चुनौतियों का सामना कर रही है जिसके कारण जन्म एवं मृत्यु कवरेज में देरी के साथ-साथ कमी आई है।  
    • जनता को त्वरित सेवा प्रदान करने में प्रणाली के समक्षआने वाली चुनौतियों का समाधान करने हेतु, भारत सरकार द्वारा आईटी [सूचना प्रौद्योगिकी]  के माध्यम से देश के नागरिक पंजीकरण प्रणाली में परिवर्तनकारी परिवर्तन शुरू करने का निर्णय लिया गया है जिससे न्यूनतम मानव इंटरफेस के साथ वास्तविक समय के आधार पर जन्म और  मृत्यु का पंजीकरण हो सके।
  • स्वचालन और समयबद्ध प्रणाली: 
    • परिवर्तन प्रक्रिया वितरण बिंदुओं को स्वचालित बनाया जाएगा ताकि सेवा वितरण समयबद्ध, एकरूप और विवेकाधीन हो।
    • परिवर्तन धारणीय, मापनीय और स्वतंत्र होंगे।
  • RBD अधिनियम में संशोधन:
    • इसने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (RBD) अधिनियम,1969 में संशोधन का भी प्रस्ताव रखा है ताकि "राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत जन्म और मृत्यु के डेटाबेस को बनाए रखा जा सके।
    • प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, डेटाबेस का उपयोग जनसंख्या रजिस्टर, चुनावी रजिस्टर, आधार, राशन कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस सबंधित डेटाबेस को अपडेट करने के लिये किया जा सकता है।
    • RBD अधिनियम के तहत जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य है तथा मुख्य रजिस्ट्रार को वर्ष के दौरान पंजीकृत जन्म और मृत्यु पर एक सांख्यिकीय रिपोर्ट प्रकाशित करना अनिवार्य है।

आगे की राह

  • शासन को एक टेक्नो-यूटोपियन आइडिया (Techno-Utopian Idea) की आवश्यकता है, जहाँ नागरिकों को कुछ भी मांगने की आवश्यकता नहीं होगी तथा नागरिकों की आवश्यकताओं को सरकार द्वारा पहले ही पूरा किया जा सकेगा।
  • इस टेक्नो-यूटोपियन वास्तविकता की प्राप्ति के लिये, एक एकीकृत जनसंख्या डेटाबेस बनाने की आवश्यकता है जिसका वास्तविक समय में लोगों को ट्रैक करने हेतु प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकेगा।

स्रोत: द हिंदू

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