अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत–कनाडा संबंधों की नई शुरुआत
- 05 Mar 2026
- 104 min read
प्रिलिम्स के लिये: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता, यूरेनियम, G-7 महत्त्वपूर्ण खनिज कार्ययोजना, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन।
मेन्स के लिये: भारत–कनाडा संबंध: अवसर और चुनौतियाँ, भारत की विदेश नीति में ऊर्जा कूटनीति और महत्त्वपूर्ण खनिज, प्रवासी राजनीति और उसका द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत की आधिकारिक यात्रा की, जिसे 2023–24 के कूटनीतिक तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों की नई शुरुआत को एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
- यह यात्रा इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश आर्थिक सहयोग, रक्षा संवाद तथा समग्र साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर पुनः ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
सारांश
- कनाडा के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ने 2023–24 के कूटनीतिक ठहराव के बाद भारत–कनाडा संबंधों की नई शुरुआत का संकेत दिया। प्रमुख परिणामों में CEPA व्यापार वार्त्ताओं का पुनः आरंभ, कैमेको के साथ 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता, महत्त्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग, पहले भारत–कनाडा रक्षा संवाद की शुरुआत तथा नवाचार, अनुसंधान इंटर्नशिप एवं खाद्य प्रौद्योगिकी से जुड़ी पहलें शामिल रहीं।
- भारत-कनाडा के बीच मज़बूत आर्थिक और प्रवासी संबंध (कनाडा में 1.8 मिलियन भारतीय मूल के लोग) हैं तथा दोनों देश वर्ष 2030 तक व्यापार को दोगुना कर 50 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखते हैं। हालाँकि खालिस्तानी उग्रवाद, व्यापारिक बाधाएँ एवं वीज़ा में देरी जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। मज़बूत सुरक्षा सहयोग, शुरुआती व्यापार समझौते व इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा भागीदारी, विश्वास बहाली और इस साझेदारी को गहरा करने में मदद कर सकते हैं।
कनाडा के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के प्रमुख परिणाम क्या रहे?
- CEPA वार्त्ताओं का पुनः प्रारंभ: भारत तथा कनाडा ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) पर वार्त्ता पुनः प्रारंभ करने हेतु टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर हस्ताक्षर किये।
- दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक दोगुना करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
- ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौता: भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग ने कनाडा की कंपनी कैमेको (Cameco) के साथ यूरेनियम ओर कॉन्सन्ट्रेट्स की आपूर्ति हेतु 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर का दीर्घकालिक वाणिज्यिक अनुबंध किया।
- यह समझौता वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के भारत के विकसित भारत विज़न को प्रोत्साहन प्रदान करता है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज एवं स्वच्छ ऊर्जा: महत्त्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित एवं सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं के विकास हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए, जो कि जी-7 समूह के क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान के अनुरूप है।
- कनाडा ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) तथा वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) में औपचारिक रूप से सम्मिलित होने की घोषणा की।
- इसके अतिरिक्त ऊर्जा भंडारण, सौर, पवन तथा बायोमास/जैव ऊर्जा क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान तथा क्षमता निर्माण के लिये भी एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया।
- रक्षा क्षेत्र में सहयोग: दोनों देशों ने रक्षा संबंधी रणनीतिक विषयों पर वार्त्ता हेतु पहली बार भारत–कनाडा रक्षा संवाद की घोषणा की।
- राजनीतिक एवं कूटनीतिक संबंध: राजनीतिक संपर्क को सुदृढ़ करने हेतु भारत–कनाडा संसद मैत्री समूह की स्थापना की गई।
- इसके अतिरिक्त भारत ने इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) में संवाद साझेदार के रूप में कनाडा की सदस्यता के लिये अपना समर्थन औपचारिक रूप से घोषित किया।
- निजी क्षेत्र की सहभागिता: प्राथमिकता वाले उद्योगों में निजी क्षेत्र के सहयोग को सुदृढ़ करने के लिये इंडिया–कनाडा सीईओ फोरम का पुनर्गठन किया गया।
- नवाचार एवं प्रतिभा सहयोग: उभरती प्रौद्योगिकियों तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने हेतु ऑस्ट्रेलिया–कनाडा–भारत टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन पार्टनरशिप (ACITI) के अंतर्गत भारत–कनाडा–ऑस्ट्रेलिया त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए।
- ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) तथा कनाडा की माइटैक्स (Mitacs) के मध्य एक MoU पर हस्ताक्षर किये गए, जिसके अंतर्गत भारतीय विद्यार्थियों को 300 पूर्णतः वित्तपोषित शोध इंटर्नशिप प्रदान की जाएँगी।
- इसके अतिरिक्त नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट, कुंडली (NIFTEM-K) में एक संयुक्त पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना हेतु डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किये गए।
- यह केंद्र उन्नत प्रोटीन निष्कर्षण और फोर्टिफाइड खाद्य उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी को दूर किया जा सके।
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिये यूरेनियम का महत्त्व
- प्राथमिक नाभिकीय ईंधन: विद्युत उत्पादन के लिये परमाणु रिएक्टरों में प्रयुक्त होने वाला मुख्य ईंधन यूरेनियम है।
- भारत की योजना परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्तमान में लगभग 9 गीगावाट से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट करने की है।
- परमाणु ऊर्जा एक विश्वसनीय तथा निम्न-कार्बन ऊर्जा स्रोत प्रदान करती है, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को समर्थन देती है। दीर्घकालिक यूरेनियम अनुबंध आगामी परमाणु रिएक्टरों के लिये स्थिर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
- यूरेनियम आयात की आवश्यकता: भारतीय यूरेनियम अयस्क में 0.02%–0.45% यूरेनियम पाया जाता है, जो वैश्विक औसत 1–2% से काफी कम है। भारत प्रतिवर्ष लगभग 1,500–2,000 टन यूरेनियम का उपभोग करता है।
- परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ वार्षिक मांग बढ़कर लगभग 5,400 टन तक पहुँच सकती है।
- कनाडा की कुछ खानों में अयस्क की गुणवत्ता 15% तक पाई जाती है, जिससे वे कहीं अधिक दक्ष सिद्ध होती हैं।
- अयस्क की कम गुणवत्ता के कारण घरेलू यूरेनियम उत्खनन आयात की तुलना में अधिक महंगा पड़ता है। वर्तमान में भारत की 70% से अधिक यूरेनियम आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी होती है।
- यूरेनियम आयात का विविधीकरण:अंतर्राष्ट्रीय आपूर्तिकर्त्ता: ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये भारत उज़्बेकिस्तान, कज़ाखस्तान, कनाडा तथा रूस सहित अनेक देशों से यूरेनियम आयात कर रहा है।
- रिएक्टर-संबद्ध आपूर्ति व्यवस्था: रूस तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में स्थित रिएक्टरों के लिये यूरेनियम ईंधन की निरंतर आपूर्ति प्रदान करता है।
- नए आपूर्तिकर्त्ताओं की खोज: भारत ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के साथ भविष्य के आपूर्ति समझौतों पर भी विचार कर रहा है।
- सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) अधिनियम, 2025 भारत के परमाणु क्षेत्र में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को सक्षम बनाता है, जिससे अमेरिका सहित वैश्विक भागीदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
- न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) जैसी भारतीय कंपनियाँ दीर्घकालिक ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये विदेशों में यूरेनियम भंडारों में निवेश अथवा उत्खनन की संभावनाओं का अन्वेषण कर रही हैं।
भारत-कनाडा संबंधों का क्या महत्त्व है?
- रणनीतिक साझेदारी: दोनों देशों के मध्य 75 वर्षों से अधिक पुराने कूटनीतिक संबंध हैं, जिन्हें वर्ष 2018 में औपचारिक रूप से “रणनीतिक साझेदारी” में उन्नत किया गया।
- आर्थिक पूरकता: कनाडा का लक्ष्य संयुक्त राज्य अमेरिका के बाज़ार पर अपनी निर्भरता को कम करना है। दूसरी ओर भारत एक विशाल तथा तीव्र गति से बढ़ता हुआ बाज़ार और विशाल कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराता है, जबकि कनाडा उन्नत प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक संसाधन (पोटाश, यूरेनियम, महत्त्वपूर्ण खनिज) तथा पूंजी प्रदान करता है।
- कनाडाई पेंशन फंडों ने सामूहिक रूप से 75 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश भारत में किया है तथा वे भारत को निवेश के लिये एक अनुकूल गंतव्य के रूप में बढ़ते हुए देख रहे हैं।
- वर्ष 2024 में भारत कनाडा का 7वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था, जहाँ द्विपक्षीय व्यापार 30.9 अरब अमेरिकी डॉलर रहा तथा वस्तुओं के व्यापार में भारत ने व्यापार अधिशेष बनाए रखा।
- भारत को कनाडा के प्रमुख निर्यात: सब्ज़ियाँ, खनिज ईंधन एवं तेल, लकड़ी का गूदा, उर्वरक, कागज़ तथा पेपरबोर्ड।
- कनाडा को भारत के प्रमुख निर्यात: औषधियाँ, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, बहुमूल्य रत्न एवं धातुएँ, लौह तथा इस्पात उत्पाद।
- भू-राजनीतिक अभिसरण: दो जीवंत लोकतंत्रों के रूप में दोनों देशों के हित नियम-आधारित, मुक्त तथा खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बनाए रखने में अभिसरित होते हैं।
- कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत को एक महत्त्वपूर्ण साझेदार के रूप में विशेष रूप से पहचाना गया है।
- प्रवासी समुदाय और सॉफ्ट पावर: कनाडा में भारतीय प्रवासी समुदाय की संख्या 18 लाख से अधिक (कुल जनसंख्या का लगभग 4%) है, जो लोगों के बीच तथा आर्थिक संबंधों के लिये एक महत्त्वपूर्ण सेतु का कार्य करती है।
- इसके अतिरिक्त, भारत कनाडा में अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों का सबसे बड़ा स्रोत देश बना हुआ है।
- बहुपक्षीय गठबंधन: दोनों देश संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) सहित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंचों में वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिये मिलकर काम करते हैं।
- सुरक्षा सहयोग: यह सहयोग आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यसमूह (1997) तथा आतंकवाद से निपटने के लिये सहयोगात्मक फ्रेमवर्क (2018) पर आधारित है, जबकि कानूनी सहयोग को प्रत्यर्पण संधि (1987) और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (1994) के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है।
भारत-कनाडा संबंधों में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं तथा इनके निवारण हेतु क्या उपाय किये जा सकते हैं?
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चुनौतियाँ |
भारत–कनाडा संबंधों को सुदृढ़ करने के उपाय |
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खालिस्तानी उग्रवाद: कनाडा की भूमि से संचालित भारत-विरोधी अलगाववादी गतिविधियों तथा भारतीय वाणिज्य दूतावासों एवं प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों पर हुए हमलों को लेकर भारत निरंतर चिंता व्यक्त करता रहा है। |
कठोर सुरक्षा सहयोग: हिंसक उग्रवाद तथा संगठित अपराध से निपटने एवं पारस्परिक विश्वास के पुनर्निर्माण हेतु राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) के मध्य सहमत कार्ययोजना को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। |
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व्यापारिक अवरोध: भारत के कृषि शुल्कों, कनाडा के कठोर स्वास्थ्य एवं स्वच्छता मानकों (सैनिटरी स्टैंडर्ड्स) तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों एवं पेशेवरों की आवागमन सुविधा से संबंधित मतभेद। |
अंतरिम व्यापार समझौता: व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) पर वार्त्ता जारी रहते हुए अपेक्षाकृत कम विवादित क्षेत्रों में व्यापार विस्तार के लिये एक अंतरिम व्यापार समझौता (अर्ली हार्वेस्ट एग्रीमेंट) को आगे बढ़ाया जाए। |
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वीज़ा एवं वाणिज्य दूतावासी विलंब: वर्ष 2023–24 के दौरान उत्पन्न कूटनीतिक संघर्ष के कारण राजनयिक कर्मियों की संख्या में कमी आई, जिससे वीज़ा प्रक्रियाओं में लंबित मामलों की संख्या बढ़ी तथा छात्रों, पर्यटकों एवं व्यावसायिक पेशेवरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। |
सांस्कृतिक एवं शैक्षिक सहयोग: विश्वास को पुनर्स्थापित करने और छात्रों, पेशेवरों और पर्यटकों की सुगम आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिये सांस्कृतिक एवं शैक्षिक सहयोग को सुदृढ़ किया जाए। इसके लिये विभिन्न संस्थानों के मध्य संयुक्त सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए, जिससे आपसी सहभागिता बढ़े तथा वीज़ा एवं वाणिज्य दूतावासी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाया जा सके। |
निष्कर्ष
भारत-कनाडा संबंधों में उभरती प्रवृत्तियाँ तनाव की स्थिति से आगे बढ़कर व्यावहारिक सहयोग की दिशा में परिवर्तन का संकेत देती हैं। आर्थिक संबंधों, स्वच्छ ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा समन्वय के संवर्द्धन के माध्यम दोनों देश पारस्परिक विश्वास का पुनर्निर्माण कर सकते हैं। एक स्थिर एवं संतुलित साझेदारी न केवल आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगी, बल्कि स्वतंत्र तथा लचीले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को भी सुदृढ़ करेगी।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न प्रश्न: हिंद-प्रशांत भू-राजनीति के संदर्भ में भारत-कनाडा के हालिया कूटनीतिक संबंधों में हुए परिवर्तन के रणनीतिक महत्त्व का विश्लेषण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1. भारत–कनाडा CEPA वार्त्ताओं का क्या महत्त्व है?
व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) का उद्देश्य वस्तुओं तथा सेवाओं के व्यापार, निवेश तथा पेशेवरों की आवाजाही का विस्तार करना है। इसके माध्यम से वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रश्न 2. भारत–कनाडा असैन्य परमाणु समझौते का क्या महत्त्व है?
कैमेको (Cameco) के साथ 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता भारत के विकसित भारत विज़न के अंतर्गत वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लक्ष्य को सुदृढ़ समर्थन प्रदान करता है।
प्रश्न 3. भारत–कनाडा संबंधों में महत्त्वपूर्ण खनिज क्यों केंद्रीय भूमिका निभाते हैं?
कनाडा के समृद्ध प्राकृतिक संसाधन भारत की स्वच्छ ऊर्जा तथा विनिर्माण महत्त्वाकांक्षाओं के पूरक हैं। यह सहयोग आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता तथा जी-7 क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान के उद्देश्यों के अनुरूप है।
प्रश्न 4. भारत–कनाडा संबंधों में प्रमुख सुरक्षा चिंता क्या है?
भारत की मुख्य चिंता कनाडा की भूमि पर सक्रिय अलगाववादी तत्त्वों तथा उग्रवादी गतिविधियों की उपस्थिति है, जो राजनयिक प्रतिष्ठानों तथा प्रवासी भारतीय समुदाय की सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।
प्रश्न 5. भारतीय प्रवासी समुदाय द्विपक्षीय संबंधों को कैसे प्रभावित करता है?
कनाडा में 18 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं। यह प्रवासी समुदाय दोनों देशों के बीच आर्थिक, शैक्षिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स:
प्रश्न. निम्नलिखित में से किस एक समूह में चारों देश G-20 के सदस्य हैं? (2020)
(a) अर्जेंटीना, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की
(b) ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और न्यूज़ीलैंड
(c) ब्राज़ील, ईरान, सऊदी अरब और वियतनाम
(d) इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया
उत्तर: (a)

