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15वें वित्‍त आयोग का कार्यकाल बढ़ाने की मंज़ूरी

  • 28 Nov 2019
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

वित्त आयोग

मेन्स के लिये:

वित्त आयोग से संबंधित संवैधानिक प्रावधान, वित्त आयोग का गठन, वित्त आयोग के अधीन विचारणीय विषय, वित्त आयोग की अवधि में वृद्धि से होने वाले लाभ

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल को एक वर्ष तक के लिये बढ़ा दिया है। अब आयोग वित्‍तीय वर्ष 2020-21 के लिये अंतरिम रिपोर्ट और वित्‍तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के लिये पूर्ण रिपोर्ट 30 अक्‍तूबर, 2020 तक प्रस्‍तुत करेगा।

प्रमुख बिंदु

  • कार्यकाल के विस्‍तार से वित्‍त आयोग को 2020 से 2026 तक की अवधि के लिये अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में सहजता होगी।
  • इस दौरान आयोग नए आर्थिक सुधारों और वास्‍तविकताओं को ध्‍यान में रखते हुए वित्‍तीय अनुमानों के लिये विभिन्‍न तुलनात्मक अनुमानों की जाँच-पड़ताल भी कर सकेगा।

नोट:

  • संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति वित्त आयोग का गठन करेगा। इसकी अवधि प्रत्येक 5 वर्ष में या राष्ट्रपति के आवश्यक समझने के अनुसार पहले समाप्त होगी।
  • स्पष्ट है कि यह निर्णय भारत के संविधान में निहित प्रवधानों के विपरीत नहीं है।

कार्यकाल क्यों बढ़ाया गया?

  • वित्त आयोग के विचारणीय विषय व्‍यापक स्‍वरूप के हैं। ऐसे में जो कार्य आयोग को सौंपा गया है वह व्यापक क्षेत्र में फैला है। इनके आशयों की व्‍यापक जाँच और इन्‍हें राज्‍यों की ज़रूरतों के अनुसार बनाने के लिये केंद्र सरकार को अतिरिक्‍त समय की ज़रूरत होगी।
  • चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण, कई तरह के प्रतिबंध लगे होने के चलते आयोग ने हाल ही में विभिन्न राज्यों का दौरा पूरा किया है। इससे आयोग को राज्यों की आवश्यकताओं के विस्तृत आकलन करने के लिये पर्याप्त समय चाहिये।

इस निर्णय से सरकार को क्या लाभ होगा?

जिस अवधि के कवरेज में आयोग की सिफारिशें लागू होनी हैं, उसमें प्रस्‍तावित बढ़ोतरी से राज्‍य सरकारों और केंद्र सरकार के लिये मध्‍यावधि संसाधन की योजना बनाने में मदद मिलेगी। अप्रैल 2021 के बाद आयोग को 5 वर्ष की कवरेज अवधि उपलब्‍ध होने से राज्‍य सरकारों तथा केंद्र सरकार, दोनों को मध्‍यम से लंबी अवधि हेतु योजनाओं को तैयार करने में मदद मिलेगी। यह अनुमान है कि मौजूदा वित्‍त वर्ष में शुरू किये गए आर्थिक सुधारों का प्रभाव 2020-21 की पहली तिमाही के अंत में प्राप्‍त आँकड़ों में दिखाई देगा।

स्रोत: pib

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