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मिज़ोरम में वन अधिकार कानून

  • 28 Nov 2019
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

वन अधिनियम, 1927

मेन्स के लिये:

मिज़ोरम में वन संबंधी कानूनों से संबंधित विभिन्न मुद्दे

चर्चा में क्यों?

19 नवंबर, 2019 को मिज़ोरम सरकार ने अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकार) अधिनियम, 2006 [The Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006- FRA, 2006] के कार्यान्वयन को रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया है।

प्रमुख बिंदु

  • संविधान के अनुच्छेद 371 (G) के तहत मिज़ोरम के लिये विशेष प्रावधान किये गए हैं।
  • मिज़ोरम में संसद द्वारा पारित भूमि स्वामित्व तथा स्थानांतरण से संबंधित सभी कानूनों का लागू होने से पहले राज्य की विधानसभा द्वारा एक प्रस्ताव के माध्यम से पारित किया जाना अनिवार्य है।
  • राज्य सरकार ने इसी प्रावधान का प्रयोग करते हुए राज्य में FRA, 2006 के क्रियान्वयन को रोकने का प्रस्ताव पारित किया है।
  • जिस प्रकार अनुच्छेद 370 का उपयोग करते हुए जम्मू-कश्मीर में FRA, 2006 के अधिनियमन को रोका गया था उसी प्रकार संविधान के इस विशेष प्रावधान (371, G) का प्रयोग करके मिज़ोरम सरकार ने राज्य से FRA, 2006 को रद्द करने के लिये प्रस्ताव पारित किया।
  • मिज़ोरम सरकार ने अनुच्छेद 371 (G) का प्रयोग भारतीय वन अधिनियम, 1927 में प्रस्तावित संशोधन को अस्वीकार करने के शस्त्र के रूप में किया है। राज्य सरकार वन अधिकार अधिनियम, 2006 को रद्द करने के लिये भी इसी अनुच्छेद का प्रयोग कर रही है।
  • मिज़ोरम विधानसभा द्वारा 21 दिसंबर, 2009 को एक संकल्प पारित करके FRA, 2006 को पूरे मिज़ोरम में लागू किया गया था।

अन्य तथ्य:

  • राज्य में वनों का एक बड़ा हिस्सा लाई, मारा और चकमा (Lai, Mara and Chakma) स्वायत्त ज़िला परिषदों के स्वामित्व में है।
  • भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा 2017 की राज्य वन रिपोर्ट के अनुसार, मिज़ोरम में कुल 5,641 वर्ग किलोमीटर वन भूमि का लगभग 20 प्रतिशत अवर्गीकृत वन के रूप में है जो स्वायत्त ज़िला परिषदों के अधीन है।
  • सभी पूर्वोत्तर राज्यों में मिज़ोरम में अवर्गीकृत वन का क्षेत्र सबसे कम है। इसका मतलब यह है कि FRA, 2006 के कार्यान्वयन की संभावना मिज़ोरम में सबसे अधिक है।
  • उत्तर-पूर्वी राज्यों में ‘पूर्वोत्तर औद्योगिक एवं निवेश संवर्द्धन नीति’ (North East Industrial and Investment Promotion Policy) के लागू होने से सभी सरकारों का ध्यान ज़मीन पाने पर केंद्रित होगा। मिज़ोरम जैसे राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा वनाच्छादित है तथा उस भूमि पर विभिन्न समुदायों का स्वामित्त्व है।
  • हाल ही में प्रारंभ किया गया क्षतिपूरक वनीकरण कोष से भी मिज़ोरम सरकार द्वारा लिये गए इस निर्णय की पुष्टि होती है।

अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006

[The Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006- FRA, 2006]

  • FRA, 2006 हमारे देश के वनवासियों और जनजातीय समुदायों द्वारा वनों पर उनके अधिकारों का दावा करने के लिये किये गए संघर्ष का परिणाम है, जिस पर वे परंपरागत रूप से निर्भर थे।
  • यह अधिनियम हमारे देश के विभिन्न हिस्सों में लाखों आदिवासियों और अन्य वनवासियों के वन अधिकारों के लिये महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूरे भारत में वंचित आदिवासियों तथा अन्य वनवासियों के वन अधिकारों की बहाली करता है

स्रोत- डाउन टू अर्थ

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