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डिजिटल क्वालिटी ऑफ लाइफ इंडेक्स 2020: सर्फशर्क

  • 19 Aug 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

डिजिटल क्वालिटी ऑफ लाइफ इंडेक्स, 2020

मेन्स के लिये:

इंटरनेट से संबंधित विभिन्न सरकारी पहल

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ऑनलाइन प्राइवेसी सॉल्यूशन प्रोवाइडर, सर्फशर्क ने डिजिटल क्वालिटी ऑफ लाइफ (DQL) इंडेक्स, 2020 जारी किया है। इसके अनुसार, भारत इंटरनेट गुणवत्ता के मामले में विश्व के सबसे निचले पायदान वाले देशों में से एक है।

प्रमुख बिंदु

  • कवरेज: यह विश्व के 85 देशों (डिजिटल जनसंख्या का 81%) की डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता पर किया गया वैश्विक शोध है
  • मापदंड: इस अध्ययन में डिजिटल गुणवत्ता को परिभाषित करने वाले निम्न पाँच बुनियादी आधारों को प्रमुखता दी गई है, जिनके आधार पर देशों को अनुक्रमित किया गया है। इनमें शामिल हैं:
    1. इंटरनेट की वहनीयता
    2. इंटरनेट की गुणवत्ता
    3. इलेक्ट्रॉनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर
    4. इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा
    5. इलेक्ट्रॉनिक गवर्नमेंट
      • इन आधारों को 12 संकेतकों के माध्यम से रेखांकित किया गया है जो परस्पर जुड़े हुए हैं और समग्र डिजिटल गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिये एक साथ काम करते हैं।
  • GDP और DQL: हालांकि प्रति व्यक्ति GDP का DQL के साथ एक मज़बूत संबंध है, हालांकि ऐसे कई देश हैं जहाँ प्रति व्यक्ति GDP अपेक्षाकृत कम है जबकि डिजिटल गुणवत्ता काफी बेहतर है।
    • 13 देश (अज़रबैजान, बुल्गारिया, चीन, क्रोएशिया, ग्रीस, आदि) ई-सुरक्षा के उच्च स्तर और अधिक किफायती इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने में अन्य देशों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं जिसके चलते अपेक्षित डिजिटल गुणवत्ता काफी बेहतर हो गई है।
    • बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब में प्रति व्यक्ति GDP अपेक्षाकृत उच्च है, तथापि इंटरनेट की गुणवत्ता और ई-सुरक्षा के निम्न स्तर के कारण इन्हें अपने नागरिकों को बेहतर डिजिटल सेवा प्रदान करने में आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिली है।
  • वहनीयता: इंटरनेट की वहनीयता इसकी पहुँच को सुनिश्चित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाती है, हालाँकि अन्य आधारों की तुलना में DQL के साथ इसका परस्पर संबंध काफी कम है।
    • उदाहरण के लिये, कुछ दक्षिणी या पूर्वी यूरोपीय देशों में इंटरनेट कम खर्चीला है, लेकिन वहाँ के लोग अभी भी औसत डिजिटल गुणवत्ता से अधिक इसका आनंद उठाते हैं।
  • इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर: COVID-19 महामारी के दौरान जहाँ बैठकों की जगह वीडियो कॉन्फ्रेंस ने ले ली है ऐसे में इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिरता एक बहुत महत्त्वपूर्ण मुद्दा बन गया। नतीजतन, इसने लोगों के डिजिटल जीवन की गुणवत्ता को काफी प्रभावित कर दिया है।
    • लॉकडाउन के पहले महीने के दौरान, 85 देशों में से 49 में मोबाइल इंटरनेट की गति बहुत खराब रही जबकि 44 देशों में ब्रॉडबैंड कनेक्शन की गति खराब रही।
  • ग्लोबल रैंकिंग:
    • उच्चतम DQL वाले 10 देशों में से 7 यूरोप में हैं, जिसमें डेनमार्क 85 देशों में अग्रणी है।
      • स्कैंडिनेवियाई देशों ने अपने नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल सेवा प्रदान करने में उत्कृष्टता हासिल की है।
    • अमेरिकी महाद्वीप में कनाडा, एशिया में जापान, अफ्रीका में दक्षिण अफ्रीका और ओशिनिया में न्यूज़ीलैंड शीर्ष पर है।
  • भारतीय रैंकिंग: भारत 85 देशों में से 57 के समग्र रैंक पर है।
    • इंटरनेट अफोर्डेबिलिटी/वहनीयता: 9वां स्थान, UK, USA और चीन जैसे देशों से बेहतर प्रदर्शन।
    • इंटरनेट की गुणवत्ता: 78वां स्थान, इस श्रेणी में लगभग सबसे नीचे।
    • ई-इन्फ्रास्ट्रक्चर: ग्वाटेमाला और श्रीलंका जैसे देशों से नीचे 79वां स्थान।
    • इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा: 57वां स्थान।
    • ई-गवर्नमेंट: भारत का स्थान 15वां, न्यूज़ीलैंड और इटली जैसे देशों से ठीक नीचे।

इंटरनेट से संबंधित सरकारी पहल

  • डिजिटल इंडिया प्रोग्राम: यह भारत को ज्ञान आधारित परिवर्तन के लिये तैयार करने हेतु चलाया गया एक समग्र कार्यक्रम है।
    • ई-क्रांति: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना 2.0, जो कि डिजिटल इंडिया पहल का एक आवश्यक स्तंभ है।
  • डिजिलॉकर: यह भारतीय नागरिकों को क्लाउड पर कुछ आधिकारिक दस्तावेज़ों को संग्रहीत करने में सक्षम बनाता है।
  • BHIM App: डिजिटल भुगतान में सक्षम बनाना।
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल अभियान अभियान: नागरिकों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाना।
  • भारत नेट कार्यक्रम: सभी ग्राम पंचायतों में एक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क स्थापित करना।

स्रोत: द हिंदू

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