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जीव विज्ञान और पर्यावरण

खतरनाक रसायनों के कारण मौतें

  • 09 Jul 2021
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये

विश्व स्वास्थ्य संगठन, खतरनाक रसायन

मेन्स के लिये

खतरनाक रसायनों के कारण होने वाली मौतें और इन्हें रोकने हेतु सरकार द्वारा किये गए प्रयास

चर्चा में क्यों?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम अनुमानों के मुताबिक, दुनिया भर में खतरनाक रसायनों के संपर्क में आने से होने वाली मौतों की संख्या में वर्ष 2019 से वर्ष 2016 के बीच 29% की वृद्धि हुई है।

  • आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में खतरनाक रसायनों के संपर्क में आने से 1.56 मिलियन लोगों की मृयु हुई थी, जो कि वर्ष 2019 में बढ़कर दो मिलियन तक पहुँच गई। अनजाने में रसायनों के संपर्क में आने के कारण प्रतिदिन 4,270 से 5,400 लोगों की मौत हुई थी। 
  • यह अनुमान और आँकड़े ‘बर्लिन फोरम ऑन केमिकल्स एंड सस्टेनेबिलिटी: एम्बिशन एंड एक्शन वर्ड 2030’ में आयोजित मंत्रिस्तरीय वार्ता के दौरान ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ के महानिदेशक द्वारा जारी किये गए हैं।

प्रमुख बिंदु

खतरनाक रसायन 

  • खतरनाक रसायन का आशय एक ऐसे रसायन से है, जिसमें मानव या पशु स्वास्थ्य, पर्यावरण, या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने में सक्षम गुण मौजूद हैं।
  • इन्हें प्रायः कार्यस्थल में कच्चे माल, सॉल्वैंट्स, सफाई एजेंट, उत्प्रेरक और कई अन्य कार्यों के लिये प्रयोग किया जाता हैं।
  • इन्हें आमतौर पर स्वास्थ्य एवं संपत्ति पर इनके जोखिम स्तर के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। खतरनाक रसायनों को निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया है:
    • ज्वलनशील या विस्फोटक (उदाहरण: पेट्रोलियम, टीएनटी, प्लास्टिक विस्फोटक)।
    • त्वचा, फेफड़ों और आँखों के लिये संक्षारक (उदाहरण: एसिड, अल्काई, पेंट और धुँआ)।
    • ज़हरीले रसायन (उदाहरण: कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, साइनाइड, भारी धातु)।
  • ये रसायन हवा में, उपभोक्ता उत्पादों में, कार्यस्थल पर, पानी में या मिट्टी में मौजूद होते हैं।
  • ये मानसिक, व्यावहारिक और तंत्रिका संबंधी विकार, मोतियाबिंद या अस्थमा सहित कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

सर्वाधिक मौतों के लिये ज़िम्मेदार रसायन:

  • सीसा विषाक्तता:
    • वर्ष 2019 में यह लगभग आधी मौतों हेतु ज़िम्मेदार रसायन था।
    • लेड के संपर्क में आने से हृदय रोग (cardiovascular diseases- CVD), गुर्दे की पुरानी बीमारियांँ और प्रारंभिक बौद्धिक अक्षमता (Idiopathic Intellectual Disability) की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं ।
    • विभिन्न कारणों से पेंट में लेड/सीसा मिलाया जाता है जैसे- रंग को गढ़ा करने, जंग की समस्या के समाधान हेतु तथा रंग के सुखाने के समय को कम करने के लिये।
    • भारत सहित सिर्फ 41% देशों का सीसारहित पेंट के उत्पादन, आयात, बिक्री और उपयोग पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नियंत्रण है।
    • वर्ष 2020 में यूनिसेफ (UNICEF) ने भी बच्चों के स्वास्थ्य पर सीसा प्रदूषण के प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।
      • वैश्विक स्तर पर लगभग 800 मिलियन लोगों के रक्त में लेड का स्तर अनुमेय मात्रा (Permissible Quantity) के बराबर या अधिक है (5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर (µg/dL)।
  • कण और कार्सिनोजेन्स:
    • पार्टिकुलेट्स (धूल, धुएंँ और गैस) के व्यावसायिक संपर्क से होने वाली ‘क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़’ (Chronic Obstructive Pulmonary Disease- COPD) तथा कार्सिनोजेन्स (आर्सेनिक, एस्बेस्टस व बेंजीन) के संपर्क में आने से कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारण हैं।

विकलांगता-समायोजित जीवन वर्षों (Disability Adjusted Life Year-DALY) में कमी: 

  • वर्ष 2019 में 53 मिलियन विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष कम हुए है। यह वर्ष 2016 के बाद से 19% से अधिक की वृद्धि है।
    • WHO के अनुसार, एक DALY को "स्वस्थ" जीवन का एक खोया वर्ष (Lost Year) माना जाता है। इन DALYs के योग को वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और एक आदर्श स्वास्थ्य स्थिति के बीच अंतर के रूप में माना जाता है, जहाँ पूरी आबादी बीमारी और विकलांगता से मुक्त एक मानक आयु तक जीवित रहती है।
  • लेड/शीशे के संपर्क में आने के कारण वर्ष 2016 से विकलांगता-समायोजित जीवन-वर्षों में 56% की वृद्धि हुई है।
  • विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (Disability-Adjusted Life Years- DALYs) समय से पहले मृत्यु के कारण खोए हुए जीवन के वर्षों की संख्या और बीमारी या चोट के कारण विकलांगता के साथ रहने वाले वर्षों की एक भारित माप है।

उठाए गए कदम    

कई अंतर्राष्ट्रीय रासायनिक सम्मेलन कुछ खतरनाक रसायनों के उत्पादन, उपयोग और व्यापार को निषेध या प्रतिबंधित भी कर रहे हैं।

  • स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों (POP) पर स्टॉकहोम कन्वेंशन: मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को POP (यानी ज़हरीले रसायनों) के हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिये एक वैश्विक संधि है।
    • भारत ने इस समझौते की पुष्टि की है और इसे स्वीकार किया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कुछ खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के लिये पूर्व सूचित सहमति प्रक्रिया के बारे में रॉटरडैम कन्वेंशन।
    • भारत ने 2005 में इस कन्वेंशन की पुष्टि की।
  • खतरनाक अपशिष्टों और उनके निपटान की सीमापारीय गतिविधियों के नियंत्रण पर बेसल कन्वेंशन
    • भारत ने कन्वेंशन की पुष्टि की। 
  • रासायनिक हथियार सम्मेलन (CWC) एक हथियार नियंत्रण संधि है जो राष्ट्र संघ द्वारा रासायनिक हथियारों के विकास, उत्पादन, अधिग्रहण, भंडारण, प्रतिधारण, हस्तांतरण या उपयोग को प्रतिबंधित करती है।
    •  भारत एक हस्ताक्षरकर्त्ता और कन्वेंशन का पक्षकार है।
  • पारे (Mercury) पर मिनामाता कन्वेंशन मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे तथा इसके यौगिकों के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिये एक वैश्विक संधि है।
    • भारत सहित 140 से अधिक देशों ने कन्वेंशन की पुष्टि की है।
  • नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थ (NDPS) की अवैध तस्करी के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन/समझौता- यह समझौता दवाओं की तस्करी के विरूद्ध व्यापक उपाय प्रदान करता है जिसमें हवाला और मूल रसायनों को दूसरे रूप में बदलने (डायवर्ज़न ऑफ प्रीकर्सर केमिकल्स) के विरुद्ध प्रावधान भी शामिल हैं।
    • भारत इसके हस्ताक्षरकर्त्ताओं में से एक है।
  • वर्ष 1990 में कार्यस्थल पर रसायनों के उपयोग में सुरक्षा से संबंधित रसायन कन्वेंशन अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा प्रख्यापित किया गया था तथा 4 नवंबर, 1993 को लागू हुआ था।
  • अंतर्राष्ट्रीय रसायन प्रबंधन के लिये सामरिक दृष्टिकोण (SAICM) विश्व भर में रासायनिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिये एक नीतिगत ढाँचा है।

आगे की राह

  • व्यापक कानून की आवश्यकता: रासायनिक उपयोग, उत्पादन और सुरक्षा को विनियमित करने के लिये देशों में एक व्यापक कानून की आवश्यकता है।
  • इस संदर्भ में भारत को ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि देश की राष्ट्रीय रासायनिक नीति 2012 से लंबित है।
  • रासायनिक पदार्थों के उपयोग को कम करना या हटाना: खतरनाक रसायनों को संभालने, भंडारण, परिवहन और उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिये। 
    • खतरनाक रसायनों से खुद को बचाने के लिये उपयोगकर्त्ता को सुरक्षात्मक वस्त्रों और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण अपनाने की ज़रूरत है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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