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द वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट-2021

  • 26 Jun 2021
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये

द वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट-2021, ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय

मेन्स के लिये

नशीली दवाओं के उपयोग पर कोविड-19 का प्रभाव और इससे संबंधित सरकार के प्रयास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय’ (UNODC) ने अपनी ‘द वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट-2021’ में इस बात पर प्रकाश डाला है कि कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन प्रतिबंधों ने इंटरनेट के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी को तेज़ कर दिया है।

  • इस रिपोर्ट में दवाओं से आशय दवा नियंत्रण कन्वेंशन के तहत नियंत्रित पदार्थों और उनके गैर-चिकित्सीय उपयोग से है।

प्रमुख बिंदु

आँकड़ों का विश्लेषण

  • वर्ष 2010-2019 के बीच वैश्विक जनसंख्या में वृद्धि के कारण नशीली दवाओं का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • पिछले वर्ष दुनिया भर में लगभग 275 मिलियन लोगों ने नशीली दवाओं का इस्तेमाल किया, जबकि 36 मिलियन से अधिक लोग नशीली दवाओं के उपयोग संबंधी विकारों से पीड़ित थे।
  • नशीली दवाओं के उपयोग के कारण होने वाली बिमारियों के लिये ‘ओपिओइड’ सबसे अधिक उत्तरदायी है।
  • कोरोना वायरस महामारी के दौरान फार्मास्युटिकल दवाओं के गैर-चिकित्सा उपयोग में भी वृद्धि देखी गई।

भांग अधिक शक्तिशाली है, किंतु कम युवा इसे हानिकारक रूप में देखते हैं:

  • पिछले 24 वर्षों में विश्व के कुछ हिस्सों में भांग की क्षमता चार गुना तक बढ़ गई है, यहाँ तक ​​कि भांग को हानिकारक मानने वाले किशोरों की संख्या में भी 40 प्रतिशत की गिरावट आई है।
    • भांग में प्रमुख मनो-सक्रिय घटक Δ9-THC लंबे समय से मानसिक स्वास्थ्य विकारों के विकास के लिये उत्तरदायी है।
  • कारण: भांग उत्पादों का आक्रामक विपणन और सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से प्रचार।

बढ़ती वेब-आधारित बिक्री वैश्विक नशीली दवाओं के उपयोग के पैटर्न को बदल सकती है:

  • ऑनलाइन बिक्री के साथ दवाओं तक पहुँच भी पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गई है और डार्क वेब पर प्रमुख दवा बाज़ारों की कीमत अब लगभग 315 मिलियन डॉलर सालाना हो गई है।
  • एशियाई देश, मुख्य रूप से चीन और भारत वर्ष 2011-2020 के दौरान विश्लेषण किये गए 19 प्रमुख डार्कनेट बाज़ारों में बेची जाने वाली दवाओं के शिपमेंट से जुड़े हुए हैं।
  • डार्क वेब पर नशीली दवाओं के लेन-देन में कैनबिस या भांग सबसे प्रमुख है और सामान्य वेब पर नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थ (NDPS) तथा सिंथेटिक दवाओं के निर्माण में उपयोग किये जाने वाले पदार्थों की बिक्री शामिल है।

The-Internet

कोविड-19 का प्रभाव

  • सामाजिक आर्थिक प्रभाव
    • कोविड-19 संकट ने 100 मिलियन से अधिक लोगों को अत्यधिक गरीबी में धकेल दिया है और बेरोज़गारी तथा असमानता में भी बढ़ोतरी की है। आँकड़ों की मानें तो वर्ष 2020 में दुनिया भर में 255 मिलियन लोगों ने अपना रोज़गार खो दिया है।
    • दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। इस तरह के सामाजिक आर्थिक तनावों से दवाओं की मांग में तेज़ी आने की संभावना है।
  • सकारात्मक ट्रेंड 
    • महामारी के दौरान प्रौद्योगिकी के उपयोग में वृद्धि ने टेलीमेडिसिन जैसे सेवा वितरण के अधिक लचीले मॉडल के माध्यम से नवाचार को गति दी है, जिसने स्वास्थ्य पेशेवरों को अधिक रोगियों तक पहुँचने और उनका इलाज करने में सक्षम बनाया है।
    • वैश्विक बाज़ार में उभर रहे नए नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों (NDPS) की संख्या वर्ष 2013 में 163 से गिरकर वर्ष 2019 में 71 हो गई।
    • ओपिओइड के उपयोग संबंधी विकारों वाले लोगों के इलाज के लिये उपयोग की जाने वाली ओपिओइड दवा सुलभता से उपलब्ध है, क्योंकि विज्ञान-आधारित उपचार अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध हो गए हैं।

नशीली दवाओं के उपयोग में वृद्धि के कारण:

  • ड्रग तस्करों ने लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण शुरुआती झटके से जल्द ही स्वयं की रिकवरी कर ली है और एक बार फिर से तीव्रता से कार्य कर रहे हैं।
    • यह आंशिक रूप से प्रौद्योगिकी और क्रिप्टोकरेंसी भुगतान के उपयोग में वृद्धि से भी प्रेरित है, जो नियमित वित्तीय प्रणाली के भीतर नहीं आती है।
  • नशीली दवाओं के संपर्क रहित लेन-देन, जैसे कि मेल के माध्यम से, में भी बढ़ोतरी हो रही है और यह ट्रेंड संभवतः महामारी के बाद और अधिक तीव्र हो गया है।
  • विक्रेता अपने उत्पादों का विज्ञापन और विपणन ‘अनुसंधान रसायन’ या ‘कस्टम सिंथेसिस’ के रूप में करके कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने का प्रयास करते हैं।

सुझाव

  • भांग उत्पादों के उपयोग के सकारात्मक प्रभाव संबंधी गलत सूचनाओं का मुकाबला करना काफी महत्त्वपूर्ण है।
  • नशीली दवाओं के नकारात्मक उपयोग संबंधी वैज्ञानिक जानकारी और तथ्यों के प्रसार तथा इससे संबंधित जागरूकता अभियान शुरू किये जाने चाहिये।
  • डार्कनेट पर मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिये कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये।
  • सरकारों और निजी क्षेत्र की संयुक्त प्रतिक्रियाओं के माध्यम से इंटरनेट पर अवैध दवाओं के विज्ञापनों और लिस्टिंग को नियंत्रित करना आसान हो सकता है।
  • इंटरनेट-आधारित सेवाओं में आ रही तेज़ी के साथ वैज्ञानिक मानकों को लगातार अपडेट करना भी आवश्यक है।

ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC)

  • इसकी स्थापना वर्ष 1997 में हुई थी और वर्ष 2002 में इसे ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) के रूप में नामित किया गया था।
  • इसकी स्थापना यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल ड्रग्स कंट्रोल प्रोग्राम (UNDCP) तथा संयुक्त राष्ट्र में अपराध निवारण और आपराधिक न्याय विभाग (Crime Prevention and Criminal Justice Division- CPCJD) के संयोजन में की गई थी और यह ड्रग कंट्रोल एवं अपराध रोकथाम की दिशा में कार्य करता है।

इससे संबंधित अन्य प्रयास

  • प्रतिवर्ष 26 जून को ‘नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ का आयोजन किया जाता है।
  • सिंगल कन्वेंशन ऑन नारकोटिक्स ड्रग्स, 1961
  • कन्वेंशन ऑन साइकोट्रोपिक सब्सटेंस-1971
  • कन्वेंशन ऑन इलीसिट ट्रैफिक ऑन नारकोटिक ड्रग्स एँड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस, 1988
    • भारत उपर्युक्त तीनों का हस्ताक्षरकर्त्ता है और इसने ‘नारकोटिक्स ड्रग्स एँड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस’ (NDPS) अधिनियम, 1985 भी लागू किया है।

भारत की सुभेद्यता

  • भारत दुनिया में दो प्रमुख अवैध अफीम उत्पादन क्षेत्रों- पश्चिम में गोल्डन क्रीसेंट (ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान) और पूर्व में स्वर्णिम त्रिभुज (दक्षिण-पूर्व एशिया) के मध्य में स्थित होने के कारण ड्रग उत्पादों की तस्करी के प्रति काफी सुभेद्य है।
  •  गोल्डन क्रीसेंट क्षेत्र में अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान शामिल हैं। स्वर्णिम त्रिभुज, रूक तथा मेकांग नदियों के संगम पर स्थित वह क्षेत्र है जहाँ थाईलैंड की सीमाएँ लगती हैं।

Iran

स्रोत: द हिंदू

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