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पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध से केंद्र का इनकार

  • 22 Aug 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्र सरकार ने पटाखों पर राष्ट्र स्तरीय प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया और दिवाली के दौरान प्रदूषण को रोकने के वैकल्पिक उपायों के रूप में प्रमुख शहरों में "हरित पटाखों" के उत्पादन, सामुदायिक रूप से पटाखे फोड़ने और श्रृंखला में पटाखों या लड़ियों के उत्पादन पर नियंत्रण का सुझाव दिया।

प्रमुख बिंदु

  • केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को सुझाए गए अन्य सुझावों में कहा कि राज्य सरकारों द्वारा पूर्व निर्धारित जगहों पर भी पटाखे फोड़े जा सकते हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय आपातकालीन आधार पर प्रदूषण से निपटने के लिये किसी भी प्रकार के पटाखों और फुलझड़ियों के उपयोग, निर्माण, लाइसेंसिंग, बिक्री, पुनर्विक्रय या वितरण पर पूरी तरह से राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग से संबंधित शिकायतों के एक समूह पर सुनवाई कर रहा था। 
  • पटाखा निर्माताओं ने अदालत से इस साल दिवाली का मौसम शुरू होने से पहले अगस्त में केंद्र द्वारा दिये गए सुझावों को गति देने का आग्रह किया।

केंद्र सरकार द्वारा दिये गए महत्त्वपूर्ण सुझाव

  • केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रदूषण की समस्या से निपटने और दिवाली के दौरान प्रदूषण का मुकाबला करने के लिये अल्पकालिक उपायों को तैयार करने के तरीकों का सुझाव देते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पाँच पृष्ठ का एक शपथ-पत्र प्रस्तुत किया।
  • केंद्र सरकार ने दिवाली के दौरान प्रदूषण से निपटने के लिये वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR), राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI), पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) जैसे संस्थानों को एक साथ मिलकर काम करने का सुझाव दिया।
  • सरकार ने कच्चे माल की निरूपण सुविधाओं (Raw Material Characterization Facilities-RMCF) की स्थापना का सुझाव दिया ताकि पटाखों में बिना जली सामग्री, आंशिक रूप से जली हुई सामग्री की उच्च मात्रा या गन पाउडर में खराब गुणवत्ता की कच्ची सामग्री की उपस्थिति की जाँच हो सके।
  • केंद्र सरकार ने ‘कम उत्सर्जन वाले पटाखे या उन्नत पटाखों’ का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा। ये पटाखे "30-35% तक PM कमी के साथ निम्न ध्वनि व निम्न प्रकाश उत्सर्जक हैं और निम्न प्रदूषणकारी के रूप में अंतर्स्थाने (इन-सीटू) जल उत्पादन के दौरान नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं सल्फर डाइऑक्साइड में महत्त्वपूर्ण कमी करते हैं तथा निम्न लागत वाले ऑक्सीडेंट्स के कारण कम लागत के हैं।"
  • सरकार ने कहा कि PESO से यह सुनिश्चित करने के लिये संपर्क किया जा सकता है कि पटाखों में स्वीकृत रसायनों और निर्धारित किये गए डेसीबल स्तरों का उपयोग किया जा रहा है या नहीं। PESO लिथियम, आर्सेनिक, एंटीमोनी, सीसा, पारा जैसे प्रतिबंधित पदार्थों के लिये परीक्षण शुरू कर सकता है।
  • CPCB और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 14 दिनों (दिवाली से सात दिन पहले और दिवाली के सात दिन बाद तक) के लिये पटाखा फोड़ने के संबंध में सीपीसीबी द्वारा प्रस्तावित अल्पकालिक वायु गुणवत्ता परिवेश के विरुद्ध नियामक मानकों के अलावा एल्युमीनियम, बेरियम, आयरन के मानकों के लिये अपने शहरों में अल्पकालिक निगरानी करेंगे।
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