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केंद्र सभी गाँवों को बिजली आपूर्ति की गारंटी नहीं दे सकता

  • 26 Jun 2018
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

बिजली मंत्रालय के संयुक्त सचिव अरुण कुमार वर्मा ने हाल ही में कहा है कि बिजली ग्रिड से सभी घरों और गाँवों को जोड़ने या बिजली के वैकल्पिक स्रोत प्रदान करने की ज़िम्मेदारी केंद्र की है| बिजली आपूर्ति की गारंटी नहीं दी जा सकती। वास्तविक आपूर्ति की ज़िम्मेदारी प्रत्येक राज्य में बिजली वितरण कंपनियों की है| उल्लेखनीय है कि केंद्र ने देश भर के सभी गाँवों में 100% तथा सभी घरों में 83% विद्युतीकरण का दावा किया है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि साल के अंत तक सभी घरों में विद्युतीकरण कर लिया जाएगा।

दावों में विसंगतियाँ

  • हालाँकि एक स्वतंत्र संस्था द्वारा किये गए विश्लेषण में विद्युतीकरण की वास्तविक स्थिति और कागज़ी स्थिति के बीच कई विसंगतियाँ पाई गई हैं।
  • कुछ मामलों में  केबल्स और ट्रांसफार्मर जैसे इलेक्ट्रिकिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को इंस्टॉल किये जाने के कुछ दिनों बाद ही चुरा लिया गया था, जिससे लक्षित गाँवों में विद्युतीकरण नहीं हो पाया लेकिन सरकारी आँकड़ों में उन्हें विद्युतिकृत दिखाया गया है|
  • साथ ही अधिकांश जगहों पर दिन में केवल कुछ घंटों के लिये ही बिजली की आपूर्ति की जाती है।
  • संयुक्त सचिव ने कहा कि हर गाँव में जाना और यह जाँच करना हमारा काम नहीं है कि वहाँ बुनियादी ढाँचा है या नहीं अथवा बिजली की आपूर्ति हो रही है या नहीं||
  • उन्होंने कहा कि इसे राज्य सरकारों और वितरण कंपनियों (डिस्काम) द्वारा किया जाना है। लेकिन हमें पता है कि बिजली तक पहुँच का मतलब निरंतर आपूर्ति है।
  • उन्होंने कहा कि हम मार्च 2019 तक समयसीमा के भीतर 24x7 के आधार पर विद्युत आपूर्ति के लक्ष्य को पूरा करने के लिये संकल्पित हैं|

भारी बिजली कटौती

  • बिजली अधिशेष राष्ट्र के रूप में भारत की प्रतिबद्धता के बावजूद देश के लगभग सभी राज्य बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे हैं, खासकर चरम गर्मी के दौरान।
  • बिजली क्षेत्र के विश्लेषकों के मुताबिक यह इसलिये है क्योंकि सभी राज्यों के डिस्काम अभी भी बहुत अप्रभावी हैं, क्योंकि वे ट्रांसमिशन लागतों के मुकाबले ज़्यादा राजस्व कमाते हैं।
  • हालाँकि, विद्युत मंत्रालय ने दावा किया है कि उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस स्कीम (UDAY) के तहत स्थिति में तेज़ी से सुधार हो रहा है| 
  • विद्युत मंत्री आरके सिंह ने हाल ही में कहा है कि 2017-18 में पिछले वर्ष की तुलना में 51,096 करोड़ रुपए नुकसान जबर्दस्त रूप से घटकर 17,352 करोड़ रुपए हो गया है।

बहुत कुछ हासिल किया जाना अभी शेष है 

  • हालाँकि, विद्युत क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि डिस्काम के प्रदर्शन में सुधार हो रहा है, फिर भी वे 24x7 आधार पर आपूर्ति के लिये सक्षम नहीं हैं। 
  • कई डिस्काम दो कारणों से 24x7 आधार पर विद्युत प्रदान करने के लिये तैयार नहीं हैं| पहला, उनमें से अधिकतर ऐसा करने में वित्तीय रूप से सक्षम नहीं हैं। दूसरा, केवल कुछ ही डिस्काम में निरंतरता के आधार पर अच्छी गुणवत्ता वाली बिजली की आपूर्ति करने के लिये आधारभूत संरचना मौजूद है।
  • लेकिन यदि संबंधित राज्य सरकारें डिस्काम को वित्तीय सहायता और आश्वासन देना जारी रखती हैं, तो यह विद्युत आपूर्ति में निश्चित रूप से सुधार ला सकती है|
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