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मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • 19 Nov 2020
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये:

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना

मेन्स के लिये:

मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम और उसके उद्देश्य

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ((Ministry of Food Processing Industries), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय , ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PM-FME Scheme) के क्षमता निर्माण घटक के लिये मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 

प्रमुख बिंदु:

  • इसके साथ ही केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा एक ज़िला-एक उत्पाद (One District One Product- ODOP) का जीआईएस (GIS) डिज़िटल मैप भी जारी किया गया।
  • प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के क्षमता निर्माण घटक के अंतर्गत मास्टर ट्रेनरों को ऑनलाइन मोड, क्लासरूम लेक्चर और ऑनलाइन पाठ्य सामग्री के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
    • चूँकि सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये क्षमतावर्द्धन भी बहुत ज़रूरी है। इस उद्देश्य से ही खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों के साथ-साथ स्व सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों, श्रमिकों एवं अन्य हितधारकों को इस योजना के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  • चयनित उद्यमियों और समूहों को प्रशिक्षण एवं शोध सहायता प्रदान करने में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमशीलता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) और भारतीय खाद्य  प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी संस्थान (IIFPT), राज्य स्तरीय तकनीकी संस्थानों के समन्वय से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
  • मास्टर ट्रेनर्स, ज़िला स्तरीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इसके बाद ज़िला स्तरीय प्रशिक्षक हितग्राहियों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। क्षमता निर्माण के तहत दिये जाने वाले प्रशिक्षण का मूल्यांकन और प्रमाणन खाद्य उद्योग क्षमता और कौशल पहल (Food Industry Capacity and Skill Initiative-FICSI) द्वारा किया जाएगा।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना

(PM-FME Scheme): 

  • PM-FME योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित योजना है और आत्मनिर्भर भारत अभियान के अतंर्गत प्रारंभ की गई है। 
  • इस योजना का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में असंगठित रूप से कार्य कर रहे छोटे उद्यमियों को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में एक स्वस्थ्य प्रतिस्पर्द्धा का निर्माण करना है। 
  • इसके साथ की इस क्षेत्र से जुड़े कृषक उत्पादक संगठनों, स्व सहायता समूहों सहकारी उत्पादकों को भी सहायता  प्रदान करना है। 
  • इस योजना के तहत वर्ष 2020-21 से वर्ष 2024-25 के मध्य 2 लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय, तकनीकी एवं विपणन सहयोग प्रदान करने के लिये 10 हजार करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान किया गया है।

उद्देश्य:

  • मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का उद्देश्य इस योजना से जुड़े 8 लाख लोगों को लाभान्वित करना है।
  • इसमें किसान उत्पादक संगठन के सदस्यों के साथ ही स्व-सहायता समूह, सहकारिता, अनुसूचित जनजाति समुदाय के हितग्राही शामिल हैं।
  • एक ज़िला-एक उत्पाद योजना के डिज़िटल मानचित्र के माध्यम से इस योजना से जुड़े सभी हितधारकों के उत्पादों की समग्र जानकारी एक साथ प्राप्त हो सकेगी।
  • इसके अलावा प्रशिक्षण एवं सहयोग से छोटे खाद्य उद्यमियों को स्थापित होने में सहायता मिलेगी और यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम साबित होगा।

आगे की राह:

  • भारत को स्थानीय उत्पादन, स्थानीय विपणन और स्थानीय आपूर्ति श्रंखला निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की ज़रुरत है।

स्रोत: PIB

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