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भारतीय अर्थव्यवस्था

सेवा-निर्यात को बढ़ाना

  • 10 Nov 2021
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये:

मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम, सकल मूल्य वर्द्धित, स्किल इंडिया कार्यक्रम,क्रय प्रबंधक सूचकांक

मेन्स के लिये: 

निर्यात को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहन योजनाएँ एवं उनका महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने घोषणा की कि वह वर्ष 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के सेवा निर्यात लक्ष्य प्राप्त करने की योजना पर काम कर रहा है। यह लक्ष्य भारत द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष (FY 2020) के निर्यात का लगभग पाँच गुना है।

प्रमुख बिंदु

  • भारत का सेवा क्षेत्र:
    • डेटा विश्लेषण: भारत दुनिया का सातवाँ सबसे बड़ा सेवा निर्यातक देश है।
      • वित्त वर्ष 2011 में सेवा क्षेत्र का हिस्सा कुल सकल मूल्य वर्द्धित (जीवीए) का 54% था।
      • सेवा क्षेत्र भारत के आर्थिक विकास का एक प्रमुख संकेतक है, जो लगभग 26 मिलियन लोगों को रोज़गार प्रदान करता है और भारत के कुल वैश्विक निर्यात में लगभग 40% का योगदान देता है।
      • सेवा क्षेत्र भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा प्राप्तकर्त्ता रहा है, जो वर्ष 2000 और वर्ष 2021 के बीच कुल प्रवाह का 53% है।
    • विस्तार: भारत के सेवा क्षेत्र में व्यापार, होटल और रेस्तराँ, परिवहन, भंडारण और संचार, वित्तपोषण, बीमा, रियल एस्टेट, व्यावसायिक सेवाएँ, समुदाय, सामाजिक और व्यक्तिगत सेवाएँ और निर्माण से जुड़ी सेवाओं जैसी विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ शामिल हैं।
  • महत्त्व: 
    • सेवा व्यापार में अधिशेष ने लंबे समय से भारत के व्यापारिक ‘शिपमेंट’ में भारी घाटे को कम कर दिया है।
      • नवीनीकृत गतिविधियों के केंद्रण और लक्षित सरकारी हस्तक्षेप के माध्यम से सेवा व्यापार अधिशेष वित्तीय वर्ष 2021 में 89 बिलियन डॉलर से अधिक बढ़ सकता है और व्यापारिक निर्यात के कारण होने वाले घाटे को लगभग समाप्त कर सकता है।
    • यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के 'असेंबली अर्थव्यवस्था' से 'ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था' में संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है।
      • स्किल इंडिया कार्यक्रम में वर्ष 2022 तक 40 करोड़ से अधिक युवाओं को बाज़ार से संबंधित कौशल में पर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान करने की परिकल्पना की गई है।
  • क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधि का एक संकेतक है।

Advantage-India

  • सेवाओं के निर्यात प्रोत्साहन योजनाएंँ:
    • विविधीकरण सेवा क्षेत्र: प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी-सक्षम सेवाओं (ITeS) से बाहर उच्च विकास वाले क्षेत्रों में अवसरों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उदाहरण: 
      • घरेलू कानूनी सेवा क्षेत्र की शुरुआत  से भारतीय वकीलों का लाभ होगा क्योंकि उन्हें यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में बड़े अवसर मिलेंगे।.
      •  इसके अलावा, उच्च शिक्षा, आतिथ्य और चिकित्सा पर्यटन जैसे संभावित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
    • सेवाओं में FTA: सेवा क्षेत्र का समर्थन करने हेतु सरकार प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं (यूके, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित) के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के माध्यम से बाज़ार पहुँच के अवसरों का सक्रिय रूप से विश्लेषण कर रही है।
    • फाइन ट्यूनिंग एसईआईएस योजना: सरकार एक ऐसे कार्यक्रम पर कार्यरत है जो सर्विस एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (SEIS) को उसके मौज़ूदा स्वरूप में बदल सकता है।
      • सरकार के अनुसार, सेवा उद्योग को सरकारी सब्सिडी जैसे सहारे से दूर रहने की आवश्यकता है। 
      • यह कंपनियों को प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित करेगा।
      • साथ ही सब्सिडी राशि का उपयोग उन लोगों के लिये किया जा सकता है जिन्हें इसकी अधिक आवश्यकता है।

सर्विस एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम

  • इसे भारत की विदेश व्यापार नीति 2015-2020 के तहत अप्रैल 2015 में 5 वर्षों के लिये पेश किया गया था।
    • इससे पहले, इस योजना को वित्तीय वर्ष 2009-2014 के लिये भारत योजना (SFIS  योजना) से सेवा के रूप में नामित किया गया था।
  • इस योजना के तहत सरकार ‘ड्यूटी-क्रेडिट स्क्रिप’ के रूप में अर्जित शुद्ध विदेशी मुद्रा पर 3-5% प्रोत्साहन देती है। स्क्रिप का उपयोग आयतित माल पर मूल और अतिरिक्त सीमा शुल्क के भुगतान के लिये किया जा सकता है।

आगे की राह:

  • सेवाओं में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना: सरकार को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के अनुरूप सेवा क्षेत्र के विकास हेतु कुछ विचार करना चाहिये।
  • वैश्विक मूल्य शृंखलाओं का हिस्सा बनना: भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में खुद को एम्बेड करने का प्रयास करना चाहिये।
    • यदि भारत एक प्रमुख निर्यातक बनना चाहता है, तो उसे अपने तुलनात्मक लाभ के क्षेत्रों में अधिक विशेषज्ञता हासिल करनी चाहिये और महत्वपूर्ण मात्रा में विस्तार हासिल करना चाहिये।
  • B2B मॉडल: एक गतिशील बिज़नेस 2 बिज़नेस (B2B) पोर्टल विकसित करना, जिसका इस्तेमाल सेवा प्रदाता विदेशों के बाज़ारों तक पहुंचने के लिये कर सकते हैं।
  • विदेश व्यापार नीति (FTP): जब तक सरकार योजना-आधारित निर्यात प्रोत्साहनों की घोषणा करके आगामी विदेश व्यापार नीति (FTP) में इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित नहीं करती है और अल्पावधि में मौजूदा योजनाओं को जारी रखते हुए अंतरिम राहत प्रदान नहीं करती है, तब तक यह क्षेत्र गति खो देगा। 2021-22 के पहले पाँच महीनों में इसने गति पकड़ी है।

स्रोत-इंडियन एक्सप्रेस

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