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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

बिडेन-शी शिखर सम्मेलन

  • 17 Nov 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

शीत युद्ध, उइगर मुस्लिम, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, 'वन चाइना' नीति 

मेन्स के लिये:

बाइडेन-शी शिखर सम्मेलन का महत्त्व, अमेरिका-चीन संबंध

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पहली वर्चुअल द्विपक्षीय बैठक के लिये मुलाकात की। यह बैठक दोनों पक्षों के बीच मतभेदों को समाप्त करने में असफल रही।

  • अमेरिका-चीन के बीच विवाद कई मोर्चों पर है जिसमें वैचारिक और सांस्कृतिक आधिपत्य प्रतिद्वंद्विता, व्यापार युद्ध शामिल हैं जिसे अक्सर नया शीत युद्ध कहा जाता है।

प्रमुख बिंदु

  • चीन के विरुद्ध अमेरिका का आरक्षण:
    • मानवाधिकार उल्लंघन: अमेरिका ने शिनजियांग’ (Xinjiang) (उइगर मुस्लिम), तिब्बत और हॉन्गकॉन्ग में मानवाधिकार उल्लंघन प्रथाओं के बारे में चिंता जताई।
    • व्यापार युद्ध: वर्ष 2017 में चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा लगभग 375 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इसके कारण पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका को चीनी निर्यात पर आयात शुल्क लगाया।
      • अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी श्रमिकों और उद्योगों को चीन के अनुचित व्यापार और आर्थिक व्यवहार से बचाने की आवश्यकता है।
      • अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने चीन को करेंसी मैनिपुलेटर घोषित किया है।
    • स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र: दक्षिण चीन सागर में चीन ने दृढ़ता के साथ समुद्र के अधिकांश हिस्से को अपने क्षेत्र के रूप में दावा करते हुए अमेरिका को क्षेत्र की समृद्धि के लिये नेविगेशन की स्वतंत्रता और सुरक्षित ओवरफ्लाइट के महत्त्व को दोहराने के लिये प्रेरित किया है।
    • ताइवान: वर्ष 1949 में हुए गृहयुद्ध के दौरान चीन और ताइवान अलग हो गए, हालाँकि इसके बावजूद चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी तरह से उस पर नियंत्रण प्राप्त करने की वकालत करता है। जबकि ताइवान के नेताओं का कहना है कि ताइवान एक संप्रभु देश है।
      • अमेरिका 'वन चाइना' नीति के लिये प्रतिबद्ध है। हालाँकि वह "ताइवान जलडमरूमध्य में यथास्थिति को बदलने या शांति और स्थिरता को कमज़ोर करने के एकतरफा प्रयासों का कड़ा विरोध करता है"।
  • अमेरिका के खिलाफ चीन का आरक्षण:
    • गठबंधन और समूह: चीन ने अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधनों और समूहों के संबंध में आपत्ति जताई है। चीन ने माना कि इन समूहों ने दुनिया में ‘विभाजन’ को जन्म दिया है।
      • यह क्वाड समूह का एक बिंदु था, जिसमें अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं और ऑस्ट्रेलिया, यूके तथा यूएस के बीच ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित पनडुब्बियों को वितरित करने हेतु ‘ऑकस’ (AUKUS) सौदा शामिल है।
      • इसके अलावा अमेरिका ने हाल ही में चीन को शामिल किये बिना G7 को G-11 तक विस्तारित करने का प्रस्ताव दिया है।
    • विश्व वित्त पर हावी होने हेतु प्रतिस्पर्द्धा: अमेरिका के प्रभुत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन का मुकाबला करने के लिये चीन ‘एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक’ और ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ जैसे वैकल्पिक वित्तीय संस्थानों के साथ सामने आया है।
  • अमेरिका-भारत-चीन संबंध:

आगे की राह 

  • यूएस-चीन की ज़िम्मेदारी: यह सुनिश्चित करना चीन और अमेरिका के नेताओं की ज़िम्मेदारी है कि देशों के मध्य प्रतिस्पर्द्धा किसी संघर्ष का रूप न ले।
  • भारत उन्मुख संतुलन: भारत को अपनी बढ़ती वैश्विक शक्ति का एहसास होना चाहिये और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता में फंँसने के बजाय शांतिपूर्ण आपसी संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों और विकास को प्राथमिकता देनी चाहिये।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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