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सैन्य सूचना सामान्य सुरक्षा समझौता (GSOMIA)

  • 27 Nov 2019
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

सैन्य सूचना सामान्य सुरक्षा समझौता (GSOMIA)

मेन्स के लिये:

GSOMIA संधि तथा जापान-दक्षिण कोरिया संबंध

चर्चा में क्यों?

22 नवंबर, 2019 को दक्षिण कोरिया ने अमेरिका के दबाव के बीच जापान के साथ एक खुफिया साझाकरण समझौते (Intelligence Sharing Pact) से बाहर निकलने की अपनी योजना को स्थगित करने का फैसला किया।

  • इससे पहले, दक्षिण कोरिया ने 22 नवंबर, 2019 तक सैन्य सूचना सामान्य सुरक्षा समझौता (General Security of Military Information Agreement- GSOMIA) नामक खुफिया समझौते को समाप्त करने का फैसला किया था, इसकी शर्त थी कि यदि जापान निर्यात नियंत्रण उपायों की समीक्षा करने का फैसला नहीं करता तो यह समझौते से बाहर हो जाएगा।

GSOMIA संधि

  • जापान और दक्षिण कोरिया के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान का विचार पहली बार 1980 के दशक में आया था।
  • वर्ष 2012 में दोंनों देशों द्वारा GSOMIA पर हस्ताक्षर किये जाने की उम्मीद थी, लेकिन दक्षिण कोरिया के लोगों में इस समझौते को लेकर आक्रोश होने के कारण इस पर आगे कोई कार्यवाही नहीं हुई।
  • उत्तर कोरिया के बढ़ते खतरे (परमाणु परीक्षण करना और बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास) के बीच GSOMIA को अपनाने की आवश्यकता को महसूस किया गया।
  • अंततः नवंबर 2016 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गए।
  • इस समझौते में अमेरिका के हित उत्तर कोरिया से उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रकार के खतरे का विश्लेषण करने और उसका जवाब देने के लिये उत्तर पूर्व में एक सशक्त गठबंधन बनाने की आवश्यकता से उपजा है।
  • हालाँकि इस संदर्भ में चीन को इस बात का संदेह अवश्य हो सकता है कि GSOMIA, बीजिंग को शामिल करने के लिये अमेरिकी-जापानी-दक्षिण कोरियाई त्रिपक्षीय गठबंधन का एक प्रयास है, जिससे इस त्रिपक्षीय गठबंधन और चीन-उत्तर कोरिया-रूस के बीच विरोध बना रहे।

जापानी और दक्षिण कोरियाई संबंध

  • कोरिया, जापान का एक पूर्व उपनिवेश है, जापान ने वर्ष 1910-1945 (35 वर्षों) तक कोरिया पर शासन किया।
  • कोरियाई लोगों के मन में निहित "जापान विरोधी" भावना के पीछे आज भी कहीं न कहीं जापानी शासन है।
  • वर्ष 1948 में उत्तर और दक्षिण कोरिया के विभाजन के बाद, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच बुनियादी संबंधों पर एक संधि (Treaty on Basic Relations) पर हस्ताक्षर के साथ, वर्ष 1965 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
  • दक्षिण कोरिया और जापान दोंनों ही अमेरिका के सहयोगी हैं, लेकिन हाल के वर्षों में दोंनों देशों के बीच संबंधों में खटास आई हैं। दोंनों देशों के मध्य डोकडो द्वीप (Dokdo Islands) को लेकर विवाद बना हुआ है, जिसे जापान में ताकेशिमा (Takeshima) के रूप में जाना जाता है। जहाँ एक ओर इन द्वीपों पर दक्षिण कोरिया का नियंत्रण है, वहीं जापान इन द्वीपों पर स्वामित्व का दावा करता है।
  • इसके अलावा दोंनों देशों के लोगों के मन में जापानी शासन में कोरियाई लोगों के किये गए व्यवहार के संबंध में अलग-अलग विचार हैं, विशेषकर जबरन मज़दूरी और "सेविका" या "यौन दासियों/सेक्स स्लेव्स" के विषय में।
  • जापानी शासन में कोरिया पर किये गए अत्याचार के विषय में जापान का कहना है कि वर्ष 1965 की संधि के साथ ही उसने दक्षिण कोरिया के क्षतिपूर्ति के दावों का निपटारा कर दिया था।

वर्तमान संदर्भ में

  • यदि वर्तमान संदर्भ में बात करें तो जुलाई 2019 में जापान ने तीन रासायनिक पदार्थों पर निर्यात नियंत्रण लगा दिया जिनका इस्तेमाल दक्षिण कोरिया अपने महत्त्वपूर्ण अर्धचालक उद्योग में करता है। इतना ही नहीं हाल ही में अगस्त 2019 में भी जापान ने दक्षिण कोरिया को अपनी "व्हाइट लिस्ट" (विश्वसनीय भागीदारों की फास्ट ट्रैक व्यापार सूची) से हटाने का फैसला किया है।
  • जापान के इस फैसले को दक्षिण कोरिया के ही एक निर्णय का प्रतिउत्तर माना जा रहा है, कुछ समय पहले दक्षिण कोरिया ने खुफिया संधि GSOMIA से बाहर निकलने का फैसला किया था।

हालाँकि एक ऐसे समय में जब उत्तर कोरिया स्वयं को सभी मोर्चों पर सशक्त कर रहा है ऐसे में दक्षिण कोरिया का इस संधि से बाहर जाना वास्तव में एक अनावश्यक कदम होगा। वर्तमान स्थिति में टोक्यो और सियोल को अपने संबंधों को खराब करने की बजाय इन्हें सुदृढ़ करने पर ध्यान देना चाहिये।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस

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