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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

BCIM आर्थिक गलियारा अब BRI का हिस्सा नहीं

  • 29 Apr 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में बीजिंग में ‘बेल्ट एंड रोड फोरम की दूसरी बैठक’ (Belt and Road Forum-BRF) का आयोजन किया गया जिसमें विश्व के विभिन्न देंशो ने भाग लिया। गौरतलब है कि चीन ने बेल्ट एंड रोड परियोजना सूची से बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (Bangladesh-China-India-Myanmar) आर्थिक गलियारे को हटा दिया है।

प्रमुख बिंदु

  • भारत ने बेल्ट एंड रोड फोरम की इस बैठक में भाग नहीं लिया।
  • चीन ने 2800 किलोमीटर लंबे बांग्लादेश-चीन-भारत-म्याँमार (BCIM) आर्थिक गलियारे को हटाने के कारणों के बारे में तत्काल कुछ नहीं बताया है किंतु बेल्ट एंड रोड शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण के लीडर्स राउंडटेबल के संयुक्त पत्र में परियोजनाओं की सूची में इस गलियारे का उल्लेख नहीं किया गया है।
  • ध्यातव्य है कि भारत पाक-अधिकृत कश्मीर को संवैधानिक तौर पर अपना हिस्सा मानता है। इसलिये ‘वन बेल्ट, वन रोड’ (One Belt, One Road- OBOR) के तहत बनने वाले पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे (जो पाक-अधिकृत कश्मीर से होकर गुज़रता है) का भारत ने अपनी संप्रभुता का हनन और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए विरोध किया था।
  • इसलिये ऐसा माना जा रहा है कि इसके विरोध में चीन ने बांग्लादेश-चीन-भारत-म्याँमार आर्थिक गलियारे को सूची से बाहर कर दिया है।
  • विदित हो कि पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे (Pakistan-China Economic Corridor- CPEC) की तरह BCIM आर्थिक गलियारा भारत, बांग्लादेश, चीन एवं म्याँमार के बीच रेल एवं सड़क संपर्क परियोजना थी, जिसके तहत भारत के कोलकाता, चीन के कुनमिंग, म्याँमार के मंडाले और बांग्लादेश के ढाका और चटगाँव को आपस में जोड़ा जाना था।
  • भारत ने BCIM का विरोध नहीं किया था, किंतु इस परियोजना के संबंध में कोई खास रुचि नहीं दिखाई थी क्योंकि देश की पूर्वी सीमा पर स्थित पड़ोसी देशों में चीन का बढ़ता वर्चस्व भारत के लिये चिंता का विषय रहा है।

वन बेल्ट, वन रोड परियोजना

  • यह परियोजना 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरू की गई थी।
  • इसे ‘सिल्क रोड इकॉनमिक बेल्ट’ और 21वीं सदी की समुद्री सिल्क रोड (वन बेल्ट, वन रोड) के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह एक विकास रणनीति है जो कनेक्टिविटी पर केंद्रित है। इसके माध्यम से सड़कों, रेल, बंदरगाह, पाइपलाइनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को ज़मीन एवं समुद्र होते हुए एशिया, यूरोप और अफ्रीका से जोड़ने का विचार है।
  • हालाँकि इसका एक उद्देश्य यह भी है कि इसके द्वारा चीन वैश्विक स्तर पर अपना प्रभुत्व बनाना चाहता है।

भारत पर प्रभाव

  • भारत को चीन के लिये एक नई रणनीति बनाने की आवश्यकता है, जिसमें न केवल आर्थिक खाका हो बल्कि पड़ोसी देशों के साथ संबंध बेहतर करने की भी रणनीति हो और इसके लिये लुक-ईस्ट, लुक-वेस्ट एवं कनेक्टिंग मध्य एशिया जैसी नीतियाँ मार्गदर्शन करेंगी।
  • भारत को क्षेत्रीय रणनीति पर फिर से सोचने की ज़रूरत है तथा पड़ोस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

स्रोत-द हिंदू

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