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चीन की ‘बेल्ट और रोड’ पहल की सार्थकता

  • 12 May 2017
  • 10 min read

संदर्भ
चीन 14 मई से होने शुरू होने वाले ‘बेल्ट ओर रोड फोरम’ (Belt and Road Forum –BRF) की मेजबानी करेगा जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग अपनी महत्त्वाकांक्षी नीति तथा उसके क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे| चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ (OBOR) नीति चीन के व्यापार को बढ़ावा देने तथा नए बाज़ारों में इसके प्रवेश के मार्ग खोलने के लिये “सिल्क रोड आर्थिक बेल्ट” और 21 वीं सदी की “समुद्री सिल्क रोड” का मिलाजुला रूप है| इसके माध्यम से चीन के व्यापार में बढ़ोतरी होगी तथा नए बाज़ारों में इसके प्रवेश को भी दिशा मिलेगी| 

‘बेल्ट और रोड’ क्या है?
इस नीति का उद्देश्य एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ना है| दरअसल, चीन विकासशील पूर्वी एशिया के आर्थिक केन्द्रों को विकसित यूरोपीय आर्थिक क्षेत्रों से जोड़ना चाहता है| यहाँ ‘बेल्ट’ से तात्पर्य सिल्क रोड आर्थिक बेल्ट से है जो तीन स्थल मार्गों से मिलकर बनी है-

  • चीन, मध्य एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला मार्ग|
  • चीन को मध्य व पश्चिम एशिया के माध्यम से फारस की खाड़ी और भूमध्यसागर से जोड़ने वाला मार्ग|
  • चीन को दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया और हिन्द महासागर से जोड़ने वाला मार्ग|

‘रोड’ से तात्पर्य 21वीं सदी की समुद्री सिल्क रोड से है जिसका निर्माण दक्षिण चीन सागर व हिन्द महासागर के माध्यम से चीन के तट से यूरोप में व्यापार करने तथा दक्षिण चीन सागर के माध्यम से चीन के तट से दक्षिण प्रशांत तक व्यापार करने के लिये किया गया है|

‘वन बेल्ट वन रोड’ चीन के लिये महत्त्वपूर्ण क्यों है?

  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिये बेल्ट और रोड फोरम में विभिन देशों के 29 प्रमुख तथा 100 मंत्रीस्तरीय अधिकारी शामिल होंगे| ‘वन बेल्ट वन रोड’ नीति का उद्देश्य चीन के घरेलू विकास को बढ़ावा देना है जिसमें हाल के वर्षों में गिरावट आई है|
  • विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल चीन की आर्थिक कूटनीति का खाका है| विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि चीन स्वयं को अकेला महसूस करता है क्योंकि वह जी-7 में शामिल नहीं है और केवल ब्रिक्स देशों तक ही सीमित है| उनका मानना है कि अपने आर्थिक विस्तार को जारी रखने के लिये चीन को एक नीति की आवश्यकता थी और ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल ने उसकी इस मंशा को बखूबी पूरा किया है|

नई नीति अपनाने से चीन में क्या परिवर्तन आया है?

  • इस वर्ष चीन ने अपने सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के लक्ष्य को घटाकर 6.5% पर सीमित कर दिया है जोकि विगत 25 वर्षों में सबसे न्यूनतम स्तर है| वैश्विक रूप से चीन को अपनी आर्थिक सफलता को बरकरार रखने के लिये विकास के नए मॉडल की आवश्यकता है| ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल से चीन में बड़े पैमाने पर अवसंरचनात्मक सुधार होगा तथा इससे जुड़े देशों की अर्थव्यवस्था भी टिकाऊ बनी रहेगी|
  • ‘वन बेल्ट वन रोड’ के दो रूप है- घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय| डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के पश्चात अमेरिका की नीति में आया बदलाव और पश्चिम में संरक्षणवादी नज़रिये के उदय के कारण बाज़ार सिकुड़ रहे हैं जबकि बढ़ते श्रमिक मूल्यों, सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक, वायु प्रदूषण और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण चीन में होने वाले निवेश में कमी आई है| विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मध्यम वर्ग की धीमी प्रगति से चीन के उपभोग स्तर में भी गिरावट आई है|
  • इसके अतिरिक्त, ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल ने पश्चिम के विकसित बाज़ारों से एशिया के विकासशील देशों की ओर एक संक्रमण को दर्शाया है, इससे चीन के विकास की नीति में भी परिवर्तन हुआ है| यह अपने विकसित पूर्वी तट पर स्थित प्रान्तों की बजाय मध्य और पश्चिम चीन के प्रान्तों पर अधिक ध्यान दे रहा है|

क्रियान्वयन कैसे किया जाएगा?

  • मूलतः ‘वन बेल्ट वन रोड’ के लिये चीन के पूर्वी भाग को विकसित बनाने की आवश्यकता होगी ताकि यह अमेरिका और अन्य विकसित देशों से व्यापार कर सके, जबकि इसके मध्य और पश्चिमी प्रांत (जिनकी विकास दर कम है) एशिया के विकासशील देशों से व्यापार करेंगे| 
  • हालाँकि ‘वन बेल्ट वन रोड’ के मार्ग में एक सबसे बड़ा अवरोध यह है कि वर्तमान में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापार को बढ़ावा देने के लिये आवश्यक अवसंरचना का अभाव है| 
  • चीन इसके इच्छुक देशों के साथ कार्य करने की अपेक्षा कर रहा है तथा उनके अवसंरचनात्मक निर्माण और तकनीकी व्यवस्था को सुधारने पर विशेष ध्यान दे रहा है| ‘वन बेल्ट वन रोड’ के लिये अंतर्राष्ट्रीय मार्गों और एशिया के सभी उपक्षेत्रों तथा एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाले अवसंरचनात्मक नेटवर्क की आवश्यकता होगी|

वन बेल्ट और वन रोड का क्रियान्वयन करने की आवश्यकता !

  • माना जा रहा है है सिल्क रोड के चारों-ओर कई देशों ने अभी तक एक बाज़ारी अर्थव्यवस्था प्रणाली को स्थापित नहीं किया है तथा उनके घरेलू बाज़ारों को भी विनियमन और अवसंरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है|
  • सिल्क रोड से लगे हुए देशों के रेलवे, राजमार्गों और पाइपलाइन क्षेत्र में भी सुधार होना आवश्यक है क्योंकि परिवहन सुविधा अत्यावश्यक है| ‘वन बेल्ट वन रोड’ के साथ जुड़ने से चीन के अनुभवों, अवसंरचना निर्माण और कनेक्टिविटी तक पहुँच बनाना काफी आसान होगा|
  • चीन में ऐसी कई अवसंरचना कंपनियाँ हैं जो इन देशों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती हैं| इसके माध्यम से चीन अनेक विकासशील देशों के लिये भी लाभकारी सिद्ध होगा|

वन रोड वन बेल्ट चीन के लिये क्या महत्त्व रखता है?

  • चीन की सरकार ने ‘वन बेल्ट वन रोड’ के साथ अपनी सभी बड़ी सरकारी नीतियों को संगठित कर दिया है| वन बेल्ट वन रोड के चीन में निम्नलिखित तीन आर्थिक केंद्र हैं-

→ गुआंगडाँग, मकाऊ और हांगकांग
→ बीजिंग, तिआनजिन और हेबेई
→ हुनान प्रान्त

  • चीन ने घरेलू स्तर पर दो आयामी रणनीति को अपनाया है- एक राष्ट्रीय नीति और दूसरी नगर स्तरीय नीति| वन बेल्ट वन रोड पहल की शुरुआत चीन में घरेलू सुधार अथवा पूर्वी तट के प्रान्तों के विकास के साथ ही अन्य प्रान्तों के विकास पर भी ध्यान केंद्रित करने के लिये की गई है| इसके माध्यम से चीन के मध्य और पश्चिमी प्रान्तों की अर्थव्यवस्था में भी ज़बरदस्त सुधार होगा|

चीन की वन बेल्ट वन रोड के प्रति प्रतिबद्धता क्या है?

  • चीन ने तीन नए अवसंरचना कोषों के लिये लगभग 100 बिलियन डॉलर का फंड देने की प्रतिबद्धता जाहिर की है-

→  मध्य एशिया (जिसे ‘सिल्क रोड कोष’ कहा गया है) के लिये 40 बिलियन डॉलर का फंड|
→  नए एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक के लिये 50 बिलियन डॉलर का फंड| 
→  ब्रिक्स देशों के नए विकास बैंक के लिये 10 बिलियन डॉलर का फंड|

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