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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

रोगाणुरोधी-प्रतिरोधी गोनोरिया

  • 17 Jan 2023
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

गोनोरिया, रोगाणुरोधी प्रतिरोध

मेन्स के लिये:

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के कारण और प्रभाव

चर्चा में क्यों?  

हाल ही में केन्या में रोगाणुरोधी-प्रतिरोधी गोनोरिया का प्रकोप देखा गया।

  • शोधकर्त्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह संक्रमण कुछ मामलों में स्पर्शोन्मुख है जो प्रजनन प्रणालियों को स्थायी क्षति सहित महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौतियों का कारण बन सकता है।

गोनोरिया: 

  • गोनोरिया एक यौन संचारित संक्रमण (STI) है जो जीवाणु नीसेरिया गोनोरिया के कारण होता है।
    • यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को संक्रमित कर सकता है और जननांगों, मलाशय और गले को प्रभावित कर सकता है।
    • यदि उपचार नहीं किया जाता है तो गोनोरिया गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकता है, जिसमें बाँझपन और मानव इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह क्लैमाइडिया के बाद दुनिया भर में यौन संचरित दूसरी सबसे आम बीमारी है।
  • गोनोरिया का उपचार आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है, लेकिन जीवाणु कई उन दवाओं के प्रति तेज़ी से प्रतिरोधी हो गए हैं जो कभी प्रभावी थे।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR):

  • परिचय: 
    • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR) का तात्पर्य किसी भी सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, वायरस, कवक, परजीवी आदि) द्वारा एंटीमाइक्रोबियल दवाओं (जैसे- एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल, एंटीवायरल, एंटीमाइरियल और एंटीहेलमिंटिक्स) जिनका उपयोग संक्रमण के इलाज के लिये किया जाता है, के खिलाफ प्रतिरोध हासिल कर लेने से है। 
      • इसके अलावा, सूक्ष्मजीव जो रोगाणुरोधी प्रतिरोध विकसित करते हैं, उन्हें कभी-कभी "सुपरबग" के रूप में जाना जाता है। 
  • कारण: 
    • खराब संक्रमण नियंत्रण और अपर्याप्त स्वच्छता। 
    • एंटीबायोटिक दवाओं का अति प्रयोग और खराब गुणवत्ता वाली दवाओं का बार-बार उपयोग। 
    • बैक्टीरिया के आनुवंशिक उत्परिवर्तन। 
    • नई रोगाणुरोधी दवाओं के अनुसंधान और विकास में निवेश की कमी
  • प्रभाव: 
    • AMR संक्रमण फैलाने और इलाज हेतु जोखिम दर में वृद्धि करता है, जिससे लंबी बीमारी, विकलांगता और मृत्यु तक हो जाती है। 
    • यह स्वास्थ्य देखभाल लागत को भी बढ़ाता है और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों की स्थिरता को खतरे में डालता है
  • भारत में मान्यता: 
    • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 रोगाणुरोधी प्रतिरोध की समस्या पर प्रकाश डालती है और इसे संबोधित करने के लिये प्रभावी कार्रवाई का आह्वान करती है। 
    • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मंत्रालय के सहयोगी कार्य के लिये शीर्ष 10 प्राथमिकताओं में से एक के रूप में AMR की पहचान की है। 
    • भारत ने क्षय रोग, वेक्टर जनित रोग, एक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) आदि कार्यक्रमों में रोग पैदा करने वाले रोगाणुओं में दवा प्रतिरोध के उद्भव की निगरानी कार्य शुरू किया है। 
    • सरकारी पहल:
      • AMR रोकथाम पर राष्ट्रीय कार्यक्रम: यह कार्यक्रम वर्ष 2012 में शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत राज्य मेडिकल कॉलेज में प्रयोगशालाओं की स्थापना करके AMR निगरानी नेटवर्क को मज़बूत किया गया है।
      • AMR पर राष्ट्रीय कार्ययोजना: यह स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर केंद्रित है और अप्रैल 2017 में विभिन्न हितधारक मंत्रालयों/विभागों को शामिल करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
      • AMR सर्विलांस एंड रिसर्च नेटवर्क (AMRSN): इसे वर्ष 2013 में लॉन्च किया गया था ताकि देश में दवा प्रतिरोधी संक्रमणों के सबूत और प्रवृत्तियों तथा पैटर्न का अनुसरण किया जा सके। 
      • एंटीबायोटिक प्रबंधन कार्यक्रम: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research- ICMR) ने अस्पताल वार्डों और ICU में एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग तथा अति प्रयोग को नियंत्रित करने के लिये भारत में एक पायलट परियोजना पर एंटीबायोटिक स्टीवर्डशिप कार्यक्रम शुरू किया है।

निष्कर्ष:  

सार्वजनिक स्वास्थ्य को बनाए रखने और दवा प्रतिरोधी संक्रमणों के प्रसार को रोकने के लिये रोगाणुरोधी प्रतिरोध को नियंत्रित करना महत्त्वपूर्ण है। इसके लिये रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग को केवल उचित मामलों तक सीमित करना, संक्रमण पर नियंत्रण स्थिति में सुधार करना, अनुसंधान और विकास में निवेश करना एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने जैसे उपायों को लागू करना महत्त्वपूर्ण है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-से भारत में सूक्ष्मजीवी रोगजनकों में बहु-दवा प्रतिरोध की घटना के कारण हैं? (2019)

  1. कुछ लोगों की आनुवंशिक प्रवृत्ति 
  2. बीमारियों को ठीक करने के लिये एंटीबायोटिक दवाओं की गलत खुराक लेना
  3. पशुपालन में एंटीबायोटिक का प्रयोग 
  4. कुछ लोगों में कई पुरानी बीमारियाँ 

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4

उत्तर: (b) 


मेन्स:

प्रश्न: क्या डॉक्टर के निर्देश के बिना एंटीबायोटिक दवाओं का अति प्रयोग और मुफ्त उपलब्धता भारत में दवा प्रतिरोधी रोगों के उद्भव में योगदान कर सकते हैं? निगरानी एवं नियंत्रण के लिये उपलब्ध तंत्र क्या हैं? इसमें शामिल विभिन्न मुद्दों पर आलोचनात्मक चर्चा कीजिये। (2014, मुख्य परीक्षा)

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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