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5जी परीक्षण

  • 08 May 2021
  • 12 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications- DoT) ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (Telecom Service Providers- TSPs) को 5जी प्रौद्योगिकी (5G Technology) के उपयोग और उससे संबंधित परीक्षण की अनुमति दे दी है।

  • यह औपचारिक रूप से भारत में 5G प्रौद्योगिकी को लेकर चल रही प्रतिस्पर्द्धा से ‘Huawei’ और ‘ZTE’ जैसी चीन की कंपनियों को बाहर कर देगा।

प्रमुख बिंदु:

परीक्षण के संदर्भ में:

  • प्रारंभ में परीक्षणों की अवधि 6 महीने के लिये है। इसमें उपकरणों की खरीद और स्थापना के लिये 2 महीने की अवधि भी शामिल है।
  • TSPs को शहरी क्षेत्रों, अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अपने सेट का परीक्षण करना होगा।
  • TSPs को विभिन्न बैंडों में प्रायोगिक स्पेक्ट्रम प्रदान किये जाएंगे, जिसमें मिड-बैंड (3.2 गीगाहर्ट्ज़ से 3.67 गीगाहर्ट्ज़), मिलीमीटर वेव बैंड (24.25 गीगाहर्ट्ज़ से 28.5 गीगाहर्ट्ज़) और सब-गीगाहर्ट्ज़ बैंड (700 गीगाहर्ट्ज़) शामिल हैं।
  • इस दौरान टेली-मेडिसिन, टेली-शिक्षा, ऑगमेंटेड/वर्चुअल रियल्टी (Augmented/Virtual Reality), ड्रोन-आधारित कृषि निगरानी जैसे अनुप्रयोगों का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षणों के दौरान प्राप्त आँकड़ों को भारत में ही संग्रहीत किया जाएगा।
  • स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग: TSPs को पहले से मौजूद 5जी प्रौद्योगिकी के अलावा 5जीआई प्रौद्योगिकी (5Gi Technology) का उपयोग कर परीक्षण करने के लिये प्रोत्साहित किया गया है।
    • 5Gi प्रौद्योगिकी की वकालत भारत द्वारा की गई थी और इसे अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunications Union- ITU)- सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी द्वारा अनुमोदित किया गया है।
    • 5Gi प्रौद्योगिकी का विकास आईआईटी मद्रास के वायरलेस टेक्नोलॉजी उत्कृष्ट केंद्र (IIT Madras, Centre of Excellence in Wireless Technology- CEWiT) और आईआईटी हैदराबाद (IIT Hyderabad) द्वारा किया गया है।
    • यह 5G टावरों और रेडियो नेटवर्क की व्यापक पहुँच को सुविधाजनक बनाता है।

5जी परीक्षण की आवश्यकता:

  • वर्तमान में भारत में दूरसंचार बाज़ार केवल तीन निजी टेली कम्युनिकेशन कंपनियों (Telcos) तक ही सीमित रह गया है और शेष कंपनियाँ निवेश के मुकाबले कम आय के कारण लगभग लगभग बंद हो चुकी हैं अथवा बंद होने की कगार पर हैं। दूरसंचार क्षेत्र में वर्तमान में दो राज्य संचालित कंपनियाँ, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) और भारत संचार निगम लिमिटेड (Bharat Sanchar Nigam Limited- BSNL) बची हुई हैं, परंतु ये भी आर्थिक क्षति का सामना कर रही हैं।
  • ऐसे में अपने औसत राजस्व को बढ़ाने के लिये टेली कम्युनिकेशन कंपनियों के लिये जल्द-से-जल्द नई 5जी प्रौद्योगिकी पेशकश करना आवश्यक हो गया है।

भारत में चीनी दूरसंचार कंपनियाँ:

  • भारतीय दूरसंचार मंत्रालय ने चीनी उपकरण निर्माताओं जैसे- ‘Huawei’ और ‘ZTE’ को 5जी परीक्षणों से बाहर कर दिया है, जो इन कंपनियों को प्रतिबंधित करने वाला नवीनतम देश बन गया है।
    • अमेरिका का कहना है कि चीन द्वारा ‘Huawei’ कंपनी के 5G उपकरणों का उपयोग जासूसी के लिये किया जा सकता है, अतः अमेरिका के संघीय संचार आयोग (FCC) ने कुछ अमेरिकी दूरसंचार कंपनियों को भी आदेश दिया है कि वे अपने नेटवर्क से ‘Huawei’ के उपकरणों को हटा दें।
  • भारत ने अभी चीन की कंपनियों पर किसी भी प्रकार का आधिकारिक प्रतिबंध लागू नहीं किया है, क्योंकि चीन द्वारा भारत के मोबाइल प्रदाताओं को कई महत्त्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति की जाती है।
  • हालाँकि, सरकार ने देश के टेलीकॉम नेटवर्क के लिये एक सख्त और अधिक सुरक्षा-उन्मुख दृष्टिकोण का संकेत दिया है, ऐसे में यह माना जा रहा है कि भारत सरकार का यह दृष्टिकोण चीन की कंपनियों के खिलाफ कार्य करेगा।
    • दिसंबर 2020 में, सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र के लिये नए राष्ट्रीय सुरक्षा निर्देशों के हिस्से के रूप में दूरसंचार के ‘विश्वसनीय’ स्रोतों की पहचान करने की घोषणा की थी, जिससे देश के विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदत्ता अपने नेटवर्क में ‘विश्वसनीय’ स्रोतों से आने वाले उत्पादों का प्रयोग कर सकें।
    • इन नए खरीद नियमों के जून 2021 में लागू होने की संभावना है और यह भारतीय नेटवर्क प्रदाताओं के लिये ‘विश्वसनीय स्रोतों’ से निश्चित प्रकार के उपकरण खरीदने को अनिवार्य बनाएगा। इसमें प्रतिबंधित आपूर्तिकर्त्ताओं की सूची भी शामिल हो सकती है।

5जी प्रौद्योगिकी:

5जी प्रौद्योगिकी की विशेषताएँ:

  • 5जी में बैंड्स- 5G मुख्य रूप से 3 बैंड (लो, मिड और हाई बैंड स्पेक्ट्रम) में कार्य करता है, जिसमें सभी के बैंड्स के कुछ विशिष्ट उपयोग और कुछ विशिष्ट सीमाएँ हैं।
    • लो बैंड स्पेक्ट्रम (Low Band Spectrum): इसमें इंटरनेट की गति और डेटा के इंटरैक्शन-प्रदान की अधिकतम गति 100Mbps (प्रति सेकंड मेगाबिट्स) तक होती है।
    • मिड बैंड स्पेक्ट्रम (Mid-Band Spectrum): इसमें लो बैंड के स्पेक्ट्रम की तुलना में इंटरनेट की गति अधिक होती है, फिर भी इसके कवरेज क्षेत्र और सिग्नलों की कुछ सीमाएँ हैं।
    • हाई बैंड स्पेक्ट्रम (High-Band Spectrum): इसमें उपरोक्त अन्य दो बैंड्स की तुलना में उच्च गति होती है, लेकिन कवरेज और सिग्नल भेदन की क्षमता बेहद सीमित होती है।
  • उन्नत LTE:  5जी ‘लॉन्ग-टर्म एवोलूशन’ (LTE) मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क में सबसे नवीनतम अपग्रेड है।
  • इंटरनेट स्पीड और दक्षता: 5जी के हाई-बैंड स्पेक्ट्रम में इंटरनेट की स्पीड को 20 Gbps (प्रति सेकंड गीगाबिट्स) तक दर्ज किया गया है, जबकि 4G में इंटरनेट की अधिकतम स्पीड 1 Gbps होती है।
    • 5G तीन गुना अधिक स्पेक्ट्रम दक्षता और अल्ट्रा लो लेटेंसी प्रदान करेगा।
      • लेटेंसी, नेटवर्किंग से संबंधित एक शब्द है। एक नोड से दूसरे नोड तक जाने में किसी डेटा पैकेट द्वारा लिये गए कुल समय को लेटेंसी कहते हैं। लेटेंसी समय अंतराल या देरी को संदर्भित करता है।

5G के अनुप्रयोग:

  • चौथी औद्योगिक क्रांति: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्लाउड, बिग डेटा, कृत्रिम बुद्दिमत्ता (AI) और एज कंप्यूटिंग के साथ, 5G चौथी औद्योगिक क्रांति का एक महत्त्वपूर्ण प्रवर्तक हो सकता है।
    • सूचना का वास्तविक समय प्रसारण: 5जी के प्राथमिक अनुप्रयोगों में से एक सेंसर-एम्बेडेड नेटवर्क (Sensor-Embedded Networks) का कार्यान्वयन होगा, जो विभिन्न क्षेत्रों जैसे- विनिर्माण, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और कृषि आदि में वास्तविक समय पर सूचना के प्रसारण की अनुमति देगा।
    • कुशल परिवहन अवसंरचना: 5G परिवहन अवसंरचना को स्मार्ट बनाकर अधिक कुशल बनाने में भी मदद कर सकता है। 5G वाहन-से-वाहन और वाहन-से-अवसंरचना के संचार को सक्षम करेगा और ड्राइवर रहित कारों के निर्माण में मदद करेगा।
  • सेवाओं की पहुँच में सुधार: 5G नेटवर्क, मोबाइल बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा आदि की पहुँच में भी सुधार कर सकता है।
  • स्थानीय अनुसंधान: यह स्थानीय अनुसंधान और विकास (Research and Development) पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करेगा, ताकि वाणिज्यिक ज़रूरतों के अनुरूप अभिनव अनुप्रयोगों को विकसित किया जा सके।
  • आर्थिक प्रभाव: सरकार द्वारा नियुक्त पैनल (2018) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 5G से वर्ष 2035 तक भारत में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का संचयी आर्थिक प्रभाव पैदा होने की संभावना है।

पहली पीढ़ी से पाँचवीं पीढ़ी तक का विकास

  • 1जी को 1980 के दशक में लॉन्च किया गया था और इसने एनालॉग रेडियो सिग्नल पर कार्य किया तथा केवल वॉयस कॉल को संभव बनाया।
  • 2जी को 1990 के दशक में लॉन्च किया गया था, जो डिजिटल रेडियो सिग्नल का उपयोग करता है और 64 केबीपीएस की बैंडविड्थ के साथ वॉयस और डेटा ट्रांसमिशन दोनों का कार्य करता है।
  • 3जी को 2000 के दशक में 1 एमबीपीएस से 2 एमबीपीएस की गति के साथ लॉन्च किया गया था और इसमें डिजिटल वॉयस, वीडियो कॉल और कॉन्फ्रेंसिंग सहित टेलीफोन सिग्नल प्रसारित करने की क्षमता है।
  • 4जी को वर्ष 2009 में 100 एमबीपीएस से 1 जीबीपीएस की अधिकतम स्पीड के साथ लॉन्च किया गया था और यह 3डी आभासी वास्तविकता को भी सक्षम करता है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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