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मोबाइल बैंकिंग को अपनाने में दक्षिण भारत शेष भारत से आगे : रिपोर्ट

  • 21 Aug 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अमेरिकी बहुराष्ट्रीय प्रबंधन परामर्श फर्म बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (Boston Consulting Group -BCG) द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई है जिसके अनुसार, बचत खातों में मोबाइल बैंकिंग को अपनाने के मामले में भारत के दक्षिणी राज्य शेष भारत से आगे निकल रहे हैं।

प्रमुख बिंदु

मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के बारे में

  • रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2018 के पिछले छह महीनों में मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से कम-से-कम एक बार वित्तीय लेन-देन करने वाले खातों के संदर्भ में कुल सक्रिय बचत बैंक खातों का योगदान तेलंगाना में 10%, आंध्र प्रदेश में 6.30%, कर्नाटक में 5.50%, पुद्दुचेरी में 5.80%, तमिलनाडु में 5% और केरल में 4.70% है। उल्लेखनीय है कि पूरे भारत के लिये यह औसत 3.40% है।
  • रिपोर्ट में 2,600 से अधिक उत्तरदाताओं के नमूने को शामिल किया गया था और BCG ने 34 बैंकों को चार खंडों में विभाजित कर रिपोर्ट तैयार की।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, निजी बैंकों के लिये मोबाइल बैंकिंग सक्रियता 21% और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये 3% है।
  • वित्त वर्ष 2018 के आखिरी छह महीनों में इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से कम-से-कम एक बार वित्तीय लेन-देन करने वाले खातों के संदर्भ में, कुल सक्रिय बचत बैंक खातों के योगदान के रूप में तेलंगाना, मणिपुर और मिजोरम का औसत, राष्ट्रीय औसत 11.30% की तुलना में 20% से अधिक था।
  • अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में भी मोबाइल बैंकिंग को अपनाने वालों का औसत राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

MSMEs के बारे में 

  • वर्तमान में भारत में लगभग 100 लाख करोड़ रुपए के कुल औपचारिक ऋण में से केवल 25% MSMEs को उपलब्ध कराया गया है।
  • वस्तु एवं सेवा कर (GST) की शुरुआत से प्रेरित छोटे व्यवसायों को तेज़ी से तथा औपचारिक रूप से डिजिटलीकृत किया जा रहा है।
  • इस रिपोर्ट में कहा गया है कि GST के लागू होने के बाद डिजिटल चैनलों का उपयोग करने वाले MSMEs की संख्या कुल MSMEs का 47% हो गई है जो कि GST लागू होने से पहले 41% थी।
  • BCG के अनुसार, अर्थव्यवस्था में, MSMEs को दिया जाने वाला उधार एक अंतरंग बिंदु पर है और यह क्रेडिट वृद्धि में सहायक हो सकता है।
  • वर्तमान में डिजिटल ऋण MSMEs को दिये जाने वाले ऋण का केवल 4% है। हालाँकि, अगले पाँच वर्षों में इसके 21 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्या है?

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (Micro, Small and Medium Enterprises- MSMEs) वे उद्योग हैं जिनमें काम करने वालों की संख्या एक सीमा से कम होती है तथा उनका वार्षिक उत्पादन (turnover) भी एक सीमा के अंदर रहता है। किसी भी देश के विकास में इनका महत्त्वपूर्ण स्थान होता है।

रिपोर्ट के बारे में

  • BCG द्वारा यह रिपोर्ट भारतीय वाणिज्य और उद्योग संघ फिक्की (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry- FICCI) और भारतीय बैंक संघ (Indian Bank Association- IBA) के सहयोग से तैयार की गई है।
  • इस रिपोर्ट का विषय ‘’प्रोवाइडिंग फाइनेंसियल सर्विसेज़ टू एसएमइज़ इन एन इनक्रीजिंगली डिजिटल सिस्टम” (Providing financial services to SMEs in an increasingly digital ecosystem) है।

फिक्की

  • भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ, फिक्की (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry- FICCI) भारत के व्यापारिक संगठनों का संघ है। 
  • इसकी स्थापना 1927 में महात्मा गांधी की सलाह पर घनश्याम दास बिड़ला एवं पुरुषोत्तम ठक्कर द्वारा की गई थी। 
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
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