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भारतीय अर्थव्यवस्था

लघु वित्त बैंक

  • 31 Aug 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भारतीय रिज़र्व बैंक, लघु वित्त बैंक, नकद आरक्षित अनुपात, वैधानिक तरलता अनुपात 

मेन्स के लिये:

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हेतु सरकार के प्रयास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को वर्ष 2019 के "ऑन-टैप" लघु वित्त बैंक लाइसेंसिंग दिशा-निर्देशों के अंतर्गत दो और संस्थाओं से आवेदन प्राप्त हुए हैं।

  • RBI "ऑन-टैप" सुविधा के अंतर्गत पूरे वर्ष आवेदन स्वीकार करता है और बैंकों को लाइसेंस देता है।

प्रमुख बिंदु

  • लघु वित्त बैंक के विषय में:
    • लघु वित्त बैंक वे वित्तीय संस्थान हैं जो देश के उन क्षेत्रों को वित्तीय सेवाएँ प्रदान करते हैं जहाँ बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं।
    • लघु वित्त बैंक, कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत हैं।
    • इन्हें बैंक रहित ग्रामीण केंद्रों में अपने कम-से-कम 25% बैंकिंग आउटलेट खोलने की आवश्यकता होती है।
    • SFB को अपने समायोजित निवल बैंक ऋण (Adjusted Net Bank Credit) का 75% प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को उधार (Priority Sector Lending- PSL) में देना आवश्यक है।
      • RBI ने बैंकों को अपने फंड का एक निश्चित हिस्सा कृषि, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक बुनियादी ढाँचे, नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अन्य क्षेत्रों को ऋण देने के लिये अनिवार्य किया है।
    • इसके ऋण पोर्टफोलियो के कम-से-कम 50% में 25 लाख रुपए तक के ऋण और अग्रिम शामिल होने चाहिये।
    • एकल और समूह देनदार के लिये अधिकतम ऋण आकार तथा निवेश सीमा जोखिम क्रमशः उसके पूंजीगत निधियों के 10% एवं 15% तक सीमित होगी। ये बड़े ऋण का विस्तार नहीं कर सकते।
    • यदि बैंक में प्रमोटरों की प्रारंभिक शेयरधारिता पेड-अप वोटिंग इक्विटी पूंजी (Paid-Up Voting Equity Capital) के 40% से अधिक है, तो इसे 5 वर्षों की अवधि के भीतर 40% तक लाया जाना चाहिये।
    • नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और ‘वैधानिक तरलता अनुपात’ (SLR) आवश्यकताओं के अधीन।  
      • बैंकों के लिये अपनी जमा राशि का एक निश्चित अनुपात नकदी के रूप में रखना आवश्यक होता है, जिसे ‘नकद आरक्षित अनुपात’ कहा जाता है।
        • यह न्यूनतम अनुपात (जो कि नकद के रूप में रखी जाने वाली कुल जमा राशि का हिस्सा है) रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित किया जाता है।
      • ‘नेट डिमांड और टाइम लायबिलिटीज़’ का वह हिस्सा, जिसे एक बैंक को सुरक्षित और तरल संपत्ति जैसे- सरकारी प्रतिभूतियाँ, नकदी एवं सोना आदि के रूप में बनाए रखना होता है, ‘वैधानिक तरलता अनुपात’ कहलाता है।
  • SFBs की स्थापना हेतु पात्रता:
    • भारतीय निवासी व्यक्ति/पेशेवर, जिसे बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव हो।
    • भारतीय निवासियों के स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियाँ और सोसायटी।
    • मौजूदा ‘गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियाँ’ (NBFCs), ‘सूक्ष्म वित्त संस्थान’ (MFIs), ‘स्थानीय क्षेत्र बैंक (LABs) और भुगतान बैंक जो निवासियों के स्वामित्व एवं नियंत्रण में हैं।
  • गतिविधियाँ
    • छोटी व्यावसायिक इकाइयों, छोटे एवं सीमांत किसानों, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों और असंगठित क्षेत्र की संस्थाओं सहित असेवित वर्गों को जमा की स्वीकृति तथा उधार देने हेतु बुनियादी बैंकिंग सुविधाएँ प्रदान करना।
    • रिज़र्व बैंक के पूर्व अनुमोदन से अन्य गैर-जोखिमयुक्त साधारण वित्तीय सेवाओं जैसे- म्यूचुअल फंड इकाइयों, बीमा उत्पादों, पेंशन उत्पादों आदि का वितरण करना।
  • नियम:
    • SFB निम्नलिखित प्रावधानों द्वारा शासित होते हैं:
      • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934,
      • बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949,
      • विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999,
      • भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007,
      • क्रेडिट सूचना कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005,
      • जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम अधिनियम, 1961,
      • अन्य प्रासंगिक कानून तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और अन्य नियामकों द्वारा समय-समय पर जारी किये गए निर्देश।
  • 'ऑन-टैप' लाइसेंसिंग के लिये दिशा-निर्देश:
    • पूंजी की आवश्यकता: न्यूनतम पेड-अप वोटिंग इक्विटी पूंजी/निवल मूल्य की आवश्यकता 200 करोड़ रुपए होगी।
      • प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (UCB) हेतु स्वेच्छा से SFB में स्थानांतरित होने के लिये निवल मूल्य की प्रारंभिक आवश्यकता 100 करोड़ रुपए होगी जिसे व्यवसाय शुरू होने की तारीख से 5 वर्षों के भीतर बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए करना होगा।
    • SFB बैंकों को अनुसूचित बैंक का दर्जा: SFB बैंकों को परिचालन शुरू होने के तुरंत बाद अनुसूचित बैंक का दर्जा दिया जाएगा।
    • भुगतान बैंक का SFB में रूपांतरण: भुगतान बैंक 5 वर्ष के संचालन के बाद SFB में रूपांतरण के लिये आवेदन कर सकते हैं, यदि वे अन्यथा इन दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र हैं।

अनुसूचित बैंक

  • अनुसूचित बैंक वे बैंक हैं जो भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में सूचीबद्ध हैं।
  • अनुसूचित बैंक के रूप में अर्हता प्राप्त करने के लिये बैंक की चुकता पूंजी और जुटाई गई धनराशि कम-से-कम 5 लाख रुपए होनी चाहिये।
  • अनुसूचित बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक से कम ब्याज वाले ऋण और समाशोधन गृहों में सदस्यता के लिये उत्तरदायी हैं।
  • राष्ट्रीयकृत, अंतर्राष्ट्रीय, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित सभी वाणिज्यिक बैंक अनुसूचित बैंकों के अंतर्गत आते हैं।

स्रोत: द हिंदू

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