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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 24 Apr, 2021
  • 17 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रिलिम्स फैक्ट: 24 अप्रैल, 2021

‘मधुक्रांति पोर्टल’ व ‘हनी कॉर्नर’

(Madhu Kranti Portal & Honey Corners)

हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने ‘मधुक्रांति पोर्टल’ व ‘हनी कॉर्नर’ लॉन्च किया है। 

प्रमुख बिंदु

मधुक्रांति पोर्टल

  • यह ‘राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं मधु मिशन’ (NBHM) के तहत राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB), कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की एक पहल है।
  • यह पोर्टल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शहद व अन्‍य मधुमक्खी उत्पादों के स्रोत का पता लगाने के लिये उनके ऑनलाइन पंजीकरण हेतु विकसित किया गया है।
  • यह प्लेटफॉर्म शहद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मिलावट के स्रोत का पता लगाने में काफी मददगार साबित होगा।
  • महत्त्व
    • यह पोर्टल किसानों की आय बढ़ाने, शहद के निर्यात को बढ़ावा देने और रोज़गार सृजन में काफी मददगार होगा।
    • यह पोर्टल शहद उत्पादन, विपणन शृंखला, मधुमक्खी पालन और बिक्री आदि प्रक्रियाओं में शामिल सभी हितधारकों के डेटाबेस का निर्माण करेगा।
    • यह अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में शहद की पहुँच बढ़ाएगा।

हनी कॉर्नर

  • शहद के विपणन और बिक्री के लिये ‘हनी कॉर्नर’ एक विशेष स्थान है।
  • इसे ‘भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड' (NAFED) द्वारा संचालित किया जाएगा।

‘भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड' (NAFED)

  • NAFED, ‘बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम’ के तहत पंजीकृत कृषि उपज के लिये विपणन सहकारी समितियों का एक शीर्ष संगठन है।
  • इसे वर्ष 1958 में किसानों को लाभ पहुँचाने हेतु कृषि उपज के सहकारी विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।

राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB)

  • लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (SFAC) ने वर्ष 2000 में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत NBB को एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया था और जून 2006 में इसका पुनर्गठन किया गया था।
  • उद्देश्य
    • पोलिनेशन के माध्यम से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और मधुमक्खी पालकों/किसानों की आय बढ़ाने हेतु भारत में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन की पद्धति को बढ़ावा देकर मधुमक्खी पालन का समग्र विकास सुनिश्चित करना।
    • वर्तमान में राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड, ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन’ (NHM) और ‘उत्तर-पूर्व तथा हिमालयी राज्यों के लिये बागवानी मिशन’ (HMNEM) का क्रियान्वयन कर रहा है।

राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं मधु मिशन (NBHM)

  • इस मिशन की घोषणा ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजना के हिस्से के रूप में की गई थी। यह एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है।
  • ‘राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड’ (NBB) द्वारा क्रियान्वित राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं मधु मिशन (NBHM) का उद्देश्य ‘मीठी क्रांति’ के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु देश में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना और उसका विकास सुनिश्चित करना है।

मधु मिशन

  • ‘मधु मिशन’ को अगस्त 2017 में 'मीठी क्रांति’ के अनुरूप लॉन्च किया गया था।
    • 'मीठी क्रांति’ को वर्ष 2016 में मधुमक्खी पालन और इससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
  • ‘मधु मिशन’ के तहत खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) किसानों को मधुमक्खी कॉलोनियों के वितरण साथ-साथ जागरूकता और प्रशिक्षण प्रदान करता है।

एआईएम-प्राइम

AIM-PRIME

हाल ही में अटल नवाचार मिशन (Atal Innovation Mission- AIM), नीति आयोग (NITI Aayog) ने एआईएम-प्राइम (AIM-PRIME- नवाचार, बाज़ार परकता और उद्यमिता पर शोध कार्यक्रम) का शुभारंभ किया। 

अटल नवाचार मिशन

  • अटल नवाचार मिशन के विषय में:
    • यह मिशन देश में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार द्वारा की गई एक प्रमुख पहल है।
  • उद्देश्य:
    • इस मिशन का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिये नए कार्यक्रम और नीतियाँ विकसित करना, विभिन्न हितधारकों हेतु मंच तथा सहयोग के अवसर प्रदान करना, जागरूकता पैदा करना एवं देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी हेतु एकीकृत संरचना बनाना है।
  • प्रमुख उपलब्धि:
    • एआईएम की पहल ने भारत की स्थिति को वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) में 81वें स्थान (वर्ष 2015 में) से 48वें स्थान (वर्ष 2020 में) पर लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रमुख बिंदु

लक्ष्य:

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य 12 महीने की अवधि के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से विज्ञान आधारित ठोस प्रौद्योगिकी (Deep Technology) के विचारों को बढ़ावा देना है।
    • ठोस प्रौद्योगिकी मूर्त इंजीनियरिंग नवाचार या वैज्ञानिक प्रगति और खोजों पर आधारित होती है। इसे अक्सर उच्च स्तर की ज्ञान सामग्री के आधार पर अलग किया जाता है, जिससे विभेदन या परिवर्तन उत्प्रेरित  हो सकता है।

केंद्रित क्षेत्र:

  • विज्ञान आधारित, ज्ञानवर्धक, ठोस प्रौद्योगिकी उद्यमिता।

लॉन्च और कार्यान्वयन करने वाली एजेंसी:

  • एआईएम ने इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम को लॉन्च करने के लिये बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Melinda Gates Foundation) के साथ सहयोग किया है जिसे वेंचर सेंटर (Venture Centre) द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।

लाभार्थी:

  • इस कार्यक्रम का लाभ सबसे पहले विज्ञान आधारित ठोस टेक बिजनेस आइडिया के साथ तकनीक विकसित करने वालों (टेक स्‍टार्टअप/ वैज्ञानिक/इंजीनियर और चिकित्सक) को मिलेगा।
  • मुख्य कार्यकारी अधिकारी और एआईएम वित्तपोषित अटल ऊष्मायन केंद्रों के वरिष्ठ ऊष्मायन प्रबंधक जो गहरी तकनीक उद्यमियों का समर्थन कर रहे हैं।
  • यह कार्यक्रम एआईएम द्वारा अनुदान प्राप्त अटल इनक्यूबेटर सेंटर (AIM Funded Atal Incubation Center) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रबंधकों के लिये भी खुला है, जो टेक उद्यमियों को मदद उपलब्ध करा रहे हैं।

महत्त्व:

  • इसके लिये चयनित अभ्यर्थियों को समग्र व्याख्यान शृंखला, लाइव स्ट्रीम परियोजनाओं और परियोजना विशिष्ट हेतु मार्गदर्शन प्रदान कर प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • इनके पास टेक स्टार्टअप के लिये प्ले बुक, क्यूरेटेड वीडियो लाइब्रेरी और सीखने के अन्य कई अवसर उपलब्ध होंगे।

विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 24 अप्रैल, 2021

‘कोविरैप’ टेस्ट किट

हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- खड़गपुर (IIT-K) ने कोरोना संक्रमण की जाँच से संबंधित अपने प्रमुख उत्पाद ‘कोविरैप’ (COVIRAP) का सफलतापूर्वक वाणिज्यीकरण कर लिया है। व्यवसायीकरण के के माध्यम से यह पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित उत्पाद भारतीय बाज़ार समेत अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में किफायती मूल्य पर उपलब्ध हो सकेगा। ज्ञात हो कि बीते वर्ष अक्तूबर माह में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इस टेस्ट की प्रभावकारिता को मान्यता प्रदान की थी। हालाँकि अनुसंधानकर्त्ताओं की टीम ने SARS-CoV-2 सहित विभिन्न रोगजनक संक्रमणों के तीव्र डायग्नोस्टिक के लिये ‘कोविरैप’ उत्पाद के और अधिक उन्नत संस्करण विकसित किया है। इसके तहत RNA निष्कर्षण के लिये किसी भी विशिष्ट सुविधा की आवश्यकता के बिना, समूह द्वारा विकसित पोर्टेबल डिवाइस के माध्यम से मानव स्वाब नमूनों का प्रयोग करके कोविड-19 नैदानिक ​​परीक्षण किया जा सकता है। इस किट के माध्यम से रोगी से प्राप्त नमूनों के आधार पर मात्र 45 मिनट के भीतर परिणाम प्राप्त किया जा सकता है। अनुसंधानकर्त्ताओं के मुताबिक, इस टेस्ट किट का क्षेत्र काफी अधिक व्यापक है, जिसका अर्थ है कि यह कोरोना संक्रमण के अलावा इन्फ्लूएंज़ा, मलेरिया, डेंगू, जापानी इंसेफेलाइटिस, टीबी आदि रोगों का पता लगाने में भी सक्षम है। 

अमेरिका में हेट क्राइम के विरुद्ध बिल 

हाल ही में अमेरिकी संसद के उच्च सदन 'सीनेट' ने एशियाई अमेरिकियों और प्रशांत द्वीप समूह के निवासियों के विरुद्ध बढ़ रहे ‘हेट क्राइम’ का मुकाबला करने के लिये एक बिल को मंज़ूरी दी है।  यह बिल अमेरिकी न्याय विभाग में ‘हेट क्राइम’ की समीक्षा में तीव्रता लाएगा और पिछले वर्ष हुईं हज़ारों हिंसक घटनाओं की प्रतिक्रिया के रूप में स्थानीय कानून प्रवर्तन का समर्थन करेगा। आँकड़ों की मानें तो अमेरिका में पुलिस ने एशियाई-अमेरिकियों और प्रशांत द्वीप समूह के निवासियों के विरुद्ध ‘हेट क्राइम’ की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। हेट क्राइम ऐसे आपराधिक कृत्यों को संदर्भित करता है जो कुछ मतभेदों, प्रमुख रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं तथा रीति-रिवाजों आदि के कारण एक व्यक्ति या सामाजिक समूह के विरुद्ध पूर्वाग्रह से प्रेरित होते हैं। मौजूदा दौर में इसकी परिभाषा के तहत मॉब लिंचिंग, भेदभाव और आपत्तिजनक भाषणों के साथ-साथ अपमानजनक तथा ऐसे भाषणों को भी शामिल किया जाता है, जो एक समुदाय विशिष्ट को हिंसा के लिये उकसाते हों। ‘हेट स्पीच’ में मुख्य तौर पर जाति, नस्ल, धर्म या वर्ग आदि के आधार पर की गई टिप्पणियाँ शामिल होती हैं। भारतीय कानूनों के तहत धर्म, जातीयता, संस्कृति या नस्ल पर आधारित कोई भी अभद्र भाषा अथवा टिप्पणी पूर्णतः निषिद्ध है।

वनिता गुप्ता

हाल ही में भारतीय मूल की अमेरिकी सिविल राइट्स अधिवक्ता वनिता गुप्ता को अमेरिका में एसोसिएट अटॉर्नी जनरल के रूप में नियुक्त किया गया है, जिसके साथ ही वे अमेरिकी न्याय विभाग के इस तीसरे सबसे महत्त्वपूर्ण पद पर कार्य करने पहली भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं। वनिता गुप्ता ने न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के ‘लॉ स्कूल’ से कानून की पढाई की है और उन्हें वर्ष 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा कार्यवाहक सहायक अटॉर्नी जनरल और अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था। एसोसिएट अटॉर्नी जनरल के पद पर नियुक्त होने से पूर्व वह अमेरिका के सबसे पुराने नागरिक अधिकार गठबंधन- ‘द लीडरशिप काॅॅन्फ्रेंस ऑन सिविल एंड ह्यूमन राइट्स’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य चुकी हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के एसोसिएट अटॉर्नी जनरल के रूप में वनिता गुप्ता, विभाग के ‘सिविल राइट्स लिटिगेशन’ विभाग के साथ-साथ उसके एंटीट्रस्ट, नागरिक और पर्यावरण प्रभागों की भी प्रभारी होंगी। 

माउंट अन्नपूर्णा 

पश्चिमी महाराष्ट्र के सतारा से ताल्लुक रखने वाली पर्वतारोही प्रियंका मोहिते ने विश्व की दसवीं सबसे ऊँची पर्वत चोटी ‘माउंट अन्नपूर्णा’ पर चढ़ाई कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया है, इसी के साथ वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बन गई हैं। प्रियंका मोहिते ने इससे पूर्व वर्ष 2013 में दुनिया की सबसे ऊँची चोटी ‘माउंट एवरेस्ट’ (8,849 मीटर), वर्ष 2018 में ‘माउंट ल्होत्से’ (8,516 मीटर), ‘माउंट मकालू’ (8,485 मीटर) और 2016 में ‘माउंट किलिमंजारो’ (5,894 मीटर) को भी फतह किया है। प्रियंका मोहिते को वर्ष 2017-2018 के लिये महाराष्ट्र सरकार द्वारा साहसिक खेलों हेतु ‘शिव छत्रपति राज्य पुरस्कार’ भी प्रदान किया गया है। ‘माउंट अन्नपूर्णा’ नेपाल में स्थित हिमालय का एक पर्वतीय पुंजक है, जिसमें 8,000 मीटर से अधिक ऊँची चोटियाँ शामिल हैं और इसे चढ़ाई करने के लिये सबसे कठिन पर्वतों में से एक माना जाता है। यद्यपि ‘माउंट अन्नपूर्णा’ विश्व का दसवाँ सबसे ऊँचा पर्वत है, किंतु इसे विश्व के सबसे खतरनाक पर्वतों में से एक माना जाता है। 3 जून, 1950 को फ्राँँसीसी पर्वतारोही मौरिस हर्ज़ोग और लुई लाचेनल ने ‘माउंट अन्नपूर्णा’ को पहली बार फतह किया था।


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